बिहार में खेती और सिंचाई व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। जल सुरक्षा और सिंचाई सुविधाओं को मजबूत करने के लिए विश्व बैंक और बिहार सरकार मिलकर 4,415 करोड़ रुपये की परियोजना पर काम करेंगे। इससे सिंचाई व्यवस्था को आधुनिक बनाने के साथ बाढ़ और कटाव से निपटने की क्षमता भी बढ़ाई जाएगी। कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने इसकी जानकारी दी।
विजय ने कहा, 'बदलते मौसम में खेती को सुरक्षित और टिकाऊ बनाना जरूरी है।' इस परियोजना के तहत सिंचाई व्यवस्था को बेहतर करने के साथ किसानों को मौसम के अनुसार खेती की तकनीक से भी जोड़ा जाएगा। जल संसाधनों का सही इस्तेमाल, बाढ़ और कटाव से बचाव और किसानों की खेती को आसान बनाना भी इस परियोजना का अहम हिस्सा है। इसी को ध्यान में रखते हुए जल संसाधन विभाग, कृषि विभाग और ग्रामीण विकास विभाग मिलकर इस परियोजना पर काम कर रहे हैं।
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चार हिस्सो में होगा काम
कृषि मंत्री ने बताया कि बिहार जल सुरक्षा एवं सिंचाई आधुनिकीकरण परियोजना का कुल बजट 4,415 करोड़ रुपये है। इसमें 70 प्रतिशत राशि विश्व बैंक देगा जबकि 30 प्रतिशत राशि बिहार सरकार देगी। यह परियोजना पूरे बिहार में सिंचाई सुविधाओं को बेहतर बनाने और जल संसाधनों के सही तरीके से इस्तेमाल के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि राज्य में आधुनिक सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, जल संसाधनों का सही प्रबंधन और किसानों को मौसम के अनुसार खेती की तकनीक से जोड़ना जरूरी है। इसी उद्देश्य से परियोजना के अलग-अलग काम किए जा रहे हैं।
मंत्री ने बताया कि परियोजना को चार प्रमुख हिस्सों में लागू किया जाएगा। पहले हिस्से में सिंचाई व्यवस्था को बेहतर बनाने, उसके रखरखाव, मौसम के अनुसार खेती, प्रशिक्षण और किसानों की क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। इससे सिंचाई व्यवस्था बेहतर होगी और किसानों को बदलते मौसम के अनुसार खेती करने में मदद मिलेगी। दूसरे हिस्से में तटबंधों और नदी किनारों को मजबूत करने के साथ बाढ़ और कटाव से बचाव पर काम होगा। इससे बाढ़ और कटाव का खतरा कम करने में मदद मिलेगी। बिहार में हर साल बाढ़ और कटाव से किसानों को काफी नुकसान होता है। इस काम से नुकसान को कम करने में मदद मिलेगी।
तीसरे हिस्से में मानव संसाधन और बीआईएसडीआर की क्षमता बढ़ाने, जल विज्ञान और कृषि सूचना सहायता केंद्र बनाने, एफएमआईएससी को मजबूत करने, बिहार राज्य जल नीति तैयार करने और बिहार राज्य जल नियामक प्राधिकरण बनाने की दिशा में काम किया जाएगा। इससे जल संसाधनों से जुड़ी जानकारी, योजना और फैसले लेने की व्यवस्था बेहतर होगी। चौथे हिस्से में परियोजना के काम की निगरानी, उसकी जांच और वित्तीय प्रबंधन पर ध्यान दिया जाएगा। इसका मकसद है कि परियोजना का पैसा सही तरीके से इस्तेमाल हो और काम समय पर पूरा किया जा सके।
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11 प्रखंडों में होगी नई खेती
कृषि मंत्री ने बताया कि परियोजना के तहत मौसम के अनुसार खेती को बढ़ावा देने के लिए कमांड क्षेत्र के आधार पर 11 प्रखंडों को चिन्हित किया गया है। इनमें सोन पश्चिमी कमांड क्षेत्र के रोहतास, बक्सर और कैमूर, कोसी कमांड क्षेत्र के मधुबनी और गोपालगंज तथा सारण कमांड क्षेत्र के सिवान जिले से जुड़े प्रखंड शामिल हैं।
इन इलाकों में मौसम, पानी की उपलब्धता और खेती की स्थिति को ध्यान में रखते हुए खेती की नई तकनीकों को बढ़ावा दिया जाएगा। इसका मकसद खेती पर मौसम के बदलते असर को कम करना, पानी और दूसरे प्राकृतिक संसाधनों का सही इस्तेमाल करना और किसानों की आय बढ़ाने में मदद करना है। इन 11 प्रखंडों के किसानों को कम पानी में ज्यादा पैदावार लेने वाली तकनीक, मोटे अनाज की खेती और मौसम के अनुसार फसल चक्र के बारे में प्रशिक्षण दिया जाएगा।
मंत्री ने बताया कि मौसम के अनुसार खेती से जुड़े कामों को सही तरीके से लागू करने के लिए परियोजना के तहत जिम्मेदारियां भी तय की गई हैं। इसके तहत प्रधान सचिव, कृषि विभाग को अध्यक्ष, कृषि निदेशक को नोडल पदाधिकारी और निदेशक, भूमि संरक्षण को सह-नोडल पदाधिकारी की जिम्मेदारी दी गई है।विजय ने कहा, 'राज्य सरकार का लक्ष्य सिर्फ सिंचाई सुविधाओं का विस्तार करना नहीं है बल्कि पानी का सही और लंबे समय तक इस्तेमाल सुनिश्चित करना भी है। साथ ही खेती को मौसम में हो रहे बदलावों के लिए तैयार करना है।' आधुनिक सिंचाई व्यवस्था, बाढ़ और कटाव से सुरक्षा और मौसम के अनुसार खेती की तकनीक को बढ़ावा देने से बिहार के किसानों को सुरक्षित और बेहतर खेती में मदद मिलेगी।