logo

मूड

ट्रेंडिंग:

बिहार: कोसी-सोन से घटने लगा पानी, बाढ़ से राहत, 14 जिलों में सबसे ज्यादा खतरा

बिहार में बाढ़ के बीच कोसी और गंडक नदी के जलस्राव में कमी से राहत की उम्मीद जगी है। कई नदियां अब भी खतरे के निशान से ऊपर हैं। 14 जिलों में करीब 35.89 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं।

AI generated image

प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit- Gemini

शेयर करें

google_follow_us

संबंधित खबरें

Advertisement

बिहार में बाढ़ की गंभीर स्थिति के बीच अब थोड़ी राहत की उम्मीद जगी है। राज्य की प्रमुख नदियों के जलस्राव में कमी और स्थिरता देखने को मिल रही है। आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, कोसी और गंडक नदी के जलस्राव में कमी की प्रवृत्ति है जबकि सोन नदी का जलस्राव स्थिर बना हुआ है। कई नदियां अभी भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं और निचले इलाकों में पानी भरा हुआ है। वहीं बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव का काम जारी है। राज्य में 450 से अधिक सामुदायिक रसोई के जरिए 10 लाख से ज्यादा लोगों को सुबह-शाम खाना दिया जा रहा है। आपदा प्रबंधन विभाग लगातार बाढ़ की स्थिति पर नजर रख रहा है।

 

वीरपुर बराज पर शाम 6 बजे तक कोसी का जलस्राव 1,61,135 क्यूसेक दर्ज किया गया। इसमें कमी की प्रवृत्ति है। वहीं इंद्रपुरी बराज पर सोन नदी का जलस्राव 1,05,827 क्यूसेक दर्ज किया गया और इसकी स्थिति स्थिर है। वाल्मीकिनगर बराज पर गंडक का जलस्राव 92,900 क्यूसेक दर्ज किया गया जिसमें कमी की प्रवृत्ति है।

 

दूसरी ओर भागलपुर के सुल्तानगंज में गंगा का जलस्तर 36.80 मीटर दर्ज किया गया। यह 17 अगस्त 2021 के पिछले उच्चतम बाढ़ स्तर 36.75 मीटर से 0.05 मीटर ज्यादा है। गंगा का जलस्तर अभी स्थिर है। गंडक, कोसी, बूढ़ी गंडक, गंगा, पुनपुन, बागमती और घाघरा नदियां कई जगहों पर अभी भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। इसके कारण निचले इलाकों में अब भी पानी जमा है।

 

यह भी पढ़ें: सीवान में दिनदहाड़े ज्वेलरी दुकान में लूट, विरोध पर कारोबारी को मारी गोली

14 जिलों में बाढ़ का असर

बाढ़ से राज्य के 14 जिले पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया, पूर्णिया और अरवल प्रभावित हैं। इन जिलों के 82 प्रखंडों की 491 ग्राम पंचायतों में करीब 35.89 लाख लोग बाढ़ की चपेट में हैं। बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए 456 सामुदायिक रसोई चल रही हैं। अब तक 10 लाख से ज्यादा लोगों को सुबह-शाम खाना दिया जा चुका है। प्रशासन की कोशिश है कि कोई भी बाढ़ पीड़ित भूखा न रहे। इसके लिए हर पंचायत में रसोई की व्यवस्था की गई है।

 

14 राहत शिविरों में 12,000 से ज्यादा बाढ़ प्रभावित लोगों के रहने, खाने और इलाज की व्यवस्था की गई है। इन शिविरों में बच्चों को दूध और महिलाओं को सैनिटरी किट दी जा रही है। मेडिकल कैंप और बोट एंबुलेंस के जरिए लोगों को इलाज की सुविधा भी दी जा रही है। बाढ़ के पानी में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए 1,876 नावें चलाई जा रही हैं। मवेशियों के लिए भी चारे की व्यवस्था की गई है। अब तक 4,650 क्विंटल से ज्यादा पशुचारा बांटा जा चुका है।

 

यह भी पढ़ें: सुपौल के मदरसे में बंटा मिठाई-समोसा, 4 छात्राएं बीमार, एक की मौत

राहत सामग्री बांटी गई

बाढ़ प्रभावित लोगों के बीच 1.2 लाख से ज्यादा पॉलिथीन शीट और 22,900 ड्राई राशन पैकेट बांटे जा चुके हैं। जिन इलाकों में पानी ज्यादा है और सामुदायिक रसोई तक पहुंचना मुश्किल है वहां ड्राई राशन पैकेट दिए जा रहे हैं।

 

बचाव कार्य के लिए एसडीआरएफ की 27 और एनडीआरएफ की 10 टीमें अलग-अलग जिलों में तैनात हैं। ये टीमें लगातार बाढ़ प्रभावित इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रही हैं। कई जगहों पर लोगों को घरों की छतों से भी निकाला गया है।

 

मौसम विभाग के अनुसार, 1 जून से 8 सितंबर तक बिहार में 601.1 मिमी बारिश दर्ज हुई है जो सामान्य से 27 फीसदी कम है। हालांकि सितंबर में अब तक सामान्य से 31 फीसदी ज्यादा बारिश हुई है। मौसम विभाग ने अगले दो दिनों में राज्य के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश और कुछ जगहों पर भारी बारिश होने की संभावना जताई है।


और पढ़ें