बिहार के औरंगाबाद जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। रिसियप थाना में पदस्थापित सब-इंस्पेक्टर उमेश कुमार को 50 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया गया। विजिलेंस की टीम ने शिकायत के सत्यापन के बाद ट्रैप लगाकर आरोपी एसआई को उसी समय दबोचा जब वह रिश्वत की पहली किस्त ले रहा था। गिरफ्तारी की खबर फैलते ही पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। थाने के अन्य पुलिसकर्मी भी हैरान रह गए। विजिलेंस टीम आरोपी को हिरासत में लेकर अपने साथ ले गई और आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी। निगरानी विभाग अब मामले की विस्तृत जांच कर रहा है।
यह मामला तेंदुआ गणपत गांव से जुड़ा है। गांव निवासी डॉ. लक्ष्मण राम ने निगरानी विभाग में शिकायत की थी कि मारपीट के एक मामले की जांच कर रहे एसआई उमेश कुमार उनसे रिश्वत मांग रहे हैं। शिकायत में डॉ. लक्ष्मण ने बताया कि गांव में नाली-गली को लेकर पुराना विवाद था। 14 जुलाई को इसी विवाद में मारपीट हो गई थी जिसमें वह घायल हो गए थे। डायल-112 की टीम उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले गई थी।
दूसरी तरफ विपक्षी पक्ष ने भी थाने में आवेदन दिया था। दोनों मामलों की जांच की जिम्मेदारी एसआई उमेश कुमार को सौंपी गई थी। आरोप है कि जांच के दौरान एसआई लगातार उन पर दबाव बना रहे थे। कार्रवाई में राहत देने के बदले उन्होंने डेढ़ लाख रुपये की मांग की। काफी मोलभाव के बाद सौदा एक लाख रुपये में तय हुआ। इस सौदे में पहले 50 हजार रुपये और बाकी 50 हजार रुपये बाद में देने की बात हुई।
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पहली किस्त लेते ही टीम ने दबोचा
डॉ. लक्ष्मण का आरोप है कि एसआई मुलाकात के दौरान कभी नारियल पानी, कभी पेड़ा और कभी आम मंगवाते थे। पैसा नहीं देने पर वे झूठे मुकदमे में फंसाने और पूरे परिवार को परेशान करने की धमकी भी देते थे। पीड़ित ने बताया कि डर के कारण वह पहले चुप रहे लेकिन जब धमकी बढ़ने लगी तो उन्होंने हिम्मत कर निगरानी विभाग से शिकायत करने का फैसला किया। शिकायत मिलने के बाद विजिलेंस की टीम ने पहले आरोपों का गुप्त सत्यापन किया। शिकायत सही पाए जाने पर टीम ने ट्रैप की योजना बनाई।
तय योजना के अनुसार डॉ. लक्ष्मण राम रिश्वत की पहली किस्त 50 हजार रुपये लेकर रिसियप थाना पहुंचे। जैसे ही उन्होंने एसआई उमेश कुमार को रुपये सौंपे, पहले से घात लगाए बैठी विजिलेंस की टीम ने तुरंत छापेमारी कर उन्हें रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। टीम ने मौके से रिश्वत की रकम बरामद कर ली। गिरफ्तारी के बाद आरोपी एसआई को थाने से बाहर लाकर गाड़ी में बैठाया गया। इस दौरान थाने में मौजूद अन्य पुलिसकर्मी भी सन्न रह गए। विजिलेंस टीम आरोपी को अपने साथ लेकर चली गई। निगरानी विभाग के अधिकारियों ने बताया कि आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया जा रहा है। आगे की जांच कर यह भी पता लगाया जाएगा कि एसआई इस तरह की वसूली पहले भी करता था या नहीं।
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पुलिस महकमे में हड़कंप
एसआई की गिरफ्तारी के बाद औरंगाबाद पुलिस में हड़कंप मच गया। थाने के बाहर भी लोगों की भीड़ लग गई। कई लोग इस कार्रवाई को सही बता रहे हैं और कह रहे हैं कि ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों पर इसी तरह कार्रवाई होनी चाहिए। विजिलेंस के एक अधिकारी ने कहा कि हमें शिकायत मिली थी कि एक एसआई केस में राहत देने के नाम पर रिश्वत मांग रहा है। सत्यापन के बाद ट्रैप लगाया गया और उसे रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया गया। भ्रष्टाचार में लिप्त किसी भी अधिकारी-कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा। फिलहाल आरोपी एसआई से पूछताछ की जा रही है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि उसने और कितने लोगों से इस तरह वसूली की है।