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सीमांचल में चाय की खेती को मिलेगा बढ़ावा, 6.55 करोड़ की योजना को मिली मंजूरी

बिहार सरकार ने किशनगंज, पूर्णिया और कटिहार में चाय की खेती को बढ़ावा देने के लिए 6.55 करोड़ रुपये की योजना की मंजूरी दी है। इस योजना के तहत किसानों को प्रशिक्षण, पौधे और तकनीकी सहायता मिलेगी।

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प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit- ChatGPT

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बिहार के सीमांचल क्षेत्र की तस्वीर अब चाय से बदलने जा रही है। राज्य सरकार ने किशनगंज, पूर्णिया और कटिहार जिले में चाय की खेती को बढ़ावा देने के लिए 6.55 करोड़ की चाय विकास योजना को मंजूरी दे दी है। कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि इस योजना से सीमांचल के किसान आत्मनिर्भर बनेंगे और क्षेत्र की पहचान देश के उभरते चाय उत्पादक क्षेत्र के रूप में मजबूत होगी।

 

कृषि मंत्री ने योजना की जानकारी देते हुए कहा कि बिहार सरकार अब परंपरागत खेती से आगे बढ़कर उच्च मूल्य वाली फसलों को प्रोत्साहित कर रही है। सीमांचल की जलवायु और मिट्टी चाय की खेती के लिए बेहद अनुकूल है। यहां की बारिश, नमी और पहाड़ी इलाकों की मिट्टी चाय के पौधों के लिए आदर्श मानी जाती है। इसी प्राकृतिक क्षमता का लाभ उठाकर सरकार सीमांचल के किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में काम कर रही है।

 

मंत्री ने कहा कि अब तक सीमांचल के किसान मुख्य रूप से धान, मक्का और जूट पर निर्भर थे लेकिन इन फसलों से आमदनी सीमित रहती थी। चाय एक ऐसी फसल है जो एक बार लगाने के बाद कई वर्षों तक आमदनी देती है। इससे न सिर्फ किसानों की आय बढ़ेगी बल्कि प्रसंस्करण, पैकेजिंग और विपणन से जुड़े नए रोजगार भी सृजित होंगे। उन्होंने कहा कि इस योजना के जरिए सरकार का उद्देश्य सीमांचल में कृषि विविधीकरण को गति देना है ताकि किसान एक ही फसल पर निर्भर न रहें।

 

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कृषि विभाग किसानों को देगा तकनीकी जानकारी

6.55 करोड़ की इस योजना के तहत तीनों जिलों में चाय के नर्सरी, पौधारोपण, प्रशिक्षण और विपणन की व्यवस्था की जाएगी। कृषि विभाग किसानों को तकनीकी जानकारी देने के साथ-साथ चाय की वैज्ञानिक खेती का प्रशिक्षण भी देगा। योजना में उन किसानों को प्राथमिकता दी जाएगी जो कम उपजाऊ जमीन पर खेती करते हैं। विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि योजना का क्रियान्वयन पूरी पारदर्शिता और समयबद्ध तरीके से हो। पात्र किसानों का चयन जल्द हो ताकि अगले सीजन में ही पौधारोपण शुरू किया जा सके।

 

कृषि मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार भी पूर्वोत्तर और सीमावर्ती क्षेत्रों में चाय उत्पादन को बढ़ावा दे रही है। बिहार सरकार उसी सोच के साथ काम कर रही है। डबल इंजन की सरकार का फोकस अब कृषि में आत्मनिर्भरता और मूल्य संवर्धन पर है। चाय विकास योजना इसी कड़ी का हिस्सा है। इससे सीमांचल के किसान न सिर्फ अपनी आमदनी बढ़ाएंगे बल्कि बिहार को भी चाय के नक्शे पर लाने में मदद करेंगे।

 

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किसानों को मिलेगा फायदा

विशेषज्ञों का मानना है कि किशनगंज, पूर्णिया और कटिहार की जलवायु पश्चिम बंगाल के चाय उत्पादक क्षेत्रों से काफी मिलती-जुलती है। पहले से ही इन जिलों में कुछ किसान छोटे स्तर पर चाय की खेती कर रहे हैं। अब सरकारी सहयोग मिलने से बड़े पैमाने पर खेती संभव हो सकेगी। इससे क्षेत्र में चाय प्रसंस्करण इकाइयां भी लगेंगी जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा। कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार योजना के तहत किसानों को प्रति हेक्टेयर अनुदान, पौधे, खाद और तकनीकी सहायता दी जाएगी।

 

साथ ही महिला स्वयं सहायता समूहों को भी चाय प्रसंस्करण और पैकेजिंग से जोड़ा जाएगा। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। विभाग का लक्ष्य है कि अगले तीन वर्षों में सीमांचल में कम से कम 500 हेक्टेयर क्षेत्र में चाय की खेती शुरू हो जाए। कृषि मंत्री  ने कहा कि सरकार की मंशा है कि सीमांचल के किसान अब केवल परंपरागत फसलों तक सीमित न रहें। चाय, औषधीय पौधे और बागवानी जैसी फसलों से ही किसानों की आमदनी में वास्तविक बढ़ोतरी संभव है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे गांव-गांव जाकर किसानों को योजना की जानकारी दें और उन्हें चाय की खेती के लिए प्रेरित करें।

 

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