बिहार के मुख्यमंत्री
सम्राट चौधरी
ने वैशाली और सारण जिले के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। उन्होंने हाजीपुर और सोनपुर में चल रहे बाढ़ राहत शिविरों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने राहत शिविरों में रह रहे लोगों से बातचीत की और वहां मिल रही सुविधाओं की जानकारी ली। उन्होंने खुद लोगों को भोजन परोसा और उनके साथ बैठकर भोजन भी किया। मुख्यमंत्री के इस दौरे को लेकर बाढ़ पीड़ितों में काफी उत्साह देखा गया। लोगों का कहना है कि मुख्यमंत्री ने खुद आकर उनका हालचाल लिया इससे उन्हें हिम्मत मिली है।
वैशाली जिले में गंगा ब्रिज थाना के सामने चल रहे बाढ़ राहत शिविर में मुख्यमंत्री ने सबसे पहले कम्युनिटी किचन का निरीक्षण किया। उन्होंने भोजन वितरण काउंटर और निबंधन सह नियंत्रण कक्ष की व्यवस्थाओं की जानकारी ली। साथ ही किचन में बन रहे भोजन की गुणवत्ता भी देखी। इसके बाद मुख्यमंत्री ने खुद लोगों को भोजन परोसा। उन्होंने थाली में चावल, दाल और सब्जी परोसते हुए बाढ़ पीड़ितों से पूछा कि भोजन और दूसरी सुविधाओं को लेकर किसी तरह की परेशानी तो नहीं है। लोगों ने बताया कि शिविर में अच्छी व्यवस्था है और उन्हें पर्याप्त भोजन मिल रहा है।
यह भी पढ़ें: बिहार में बाढ़ की स्थिति नियंत्रण में, विजय चौधरी ने सुधार की उम्मीद जताई
पशुओं के लिए भी इंतजाम
मुख्यमंत्री ने राहत शिविर में चल रहे आंगनबाड़ी केंद्र का निरीक्षण किया और बच्चों से बातचीत की। उन्होंने शैक्षणिक शिविर में भी बच्चों से उनकी पढ़ाई, शैक्षणिक गतिविधियों और खान-पान के बारे में जानकारी ली। शिविर में महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग रहने की व्यवस्था की गई है। मुख्यमंत्री ने दोनों जगहों पर जाकर लोगों से सीधे बातचीत की। उन्होंने महिलाओं से पूछा कि उन्हें किसी तरह की परेशानी तो नहीं है और शौचालय, पानी व सुरक्षा की व्यवस्था कैसी है। महिलाओं ने व्यवस्थाओं पर संतोष जताया।
स्वास्थ्य शिविर के निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने चिकित्सकों से जांच और इलाज की सुविधाओं की जानकारी ली। उन्होंने निर्देश दिया कि बीमार होने पर बाढ़ पीड़ितों को तुरंत इलाज मिले और किसी को भी इलाज के लिए परेशानी न हो। उन्होंने यह भी कहा कि दवाओं की कोई कमी नहीं होनी चाहिए।
सीएम ने पशु चिकित्सा शिविर की भी जानकारी ली और अधिकारियों को पशुओं के लिए पर्याप्त दवा उपलब्ध रखने के निर्देश दिए। उन्होंने जिला प्रशासन से पशु चारे की भी उचित व्यवस्था करने को कहा ताकि बाढ़ के कारण पशुओं को किसी तरह की परेशानी न हो। बाढ़ के दौरान पशुओं के लिए चारे की समस्या अक्सर सामने आती है इसलिए सरकार का इस पर विशेष ध्यान है। मुख्यमंत्री ने बाढ़ के पानी में डूबने से हुई मौत के मामलों में मृतकों के आश्रितों को 4-4 लाख रुपये की सहायता राशि भी दी।
यह भी पढ़ें: बिहार में मखाना खेती को मिलेगा बढ़ावा, 21 जिलों के किसानों को 75 प्रतिशत अनुदान
बाढ़ पीड़ितों के साथ किया भोजन
इसके बाद मुख्यमंत्री ने सारण जिले के सोनपुर शहर स्थित स्काउट एंड गाइड सेंटर में चल रहे बाढ़ राहत शिविर का निरीक्षण किया। यहां भी उन्होंने कम्युनिटी किचन की व्यवस्था देखी और शिविर में रह रहे लोगों से बातचीत कर भोजन और दूसरी सुविधाओं की जानकारी ली। यहां मुख्यमंत्री ने बाढ़ पीड़ितों के साथ बैठकर भोजन किया और खाने की गुणवत्ता का जायजा लिया। लोगों ने शिविर में की गई व्यवस्थाओं के लिए मुख्यमंत्री को धन्यवाद व्यवस्था को अच्छा बताया है।
मुख्यमंत्री ने कहा, 'बाढ़ से हुई फसल क्षति का आकलन कराया जाएगा और प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा दिया जाएगा। साथ ही, गंगा में बाढ़ की समस्या के स्थायी समाधान के लिए भी सरकार काम कर रही है। किसानों को चिंता करने की जरूरत नहीं है सरकार हर कदम पर उनके साथ है।'
हाजीपुर और सोनपुर में राहत शिविरों के निरीक्षण के दौरान पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा, 'गंगा नदी के जलस्तर में करीब 17 से 18 सेंटीमीटर की गिरावट दर्ज की गई है। यह राहत की बात है। फरक्का बैराज से अभी करीब 15 लाख क्यूसेक पानी लगातार छोड़ा जा रहा है। अगले दो-तीन दिनों में स्थिति में और राहत मिलने की संभावना है। अधिकारी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और लोगों को बाढ़ से राहत दिलाने के लिए सरकार हर स्तर पर प्रयास कर रही है।'