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कोसी-मेची लिंक और बाढ़ पर कहां अटकी बात? जल शक्ति मंत्री से मिले CM सम्राट चौधरी

बिहार सीएम सम्राट चौधरी ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री से मुलाकात कर सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण की लंबित परियोजनाओं को जल्द मंजूरी और फंड देने की मांग की।

samrat choudhray and jal shakti minister cr paatil

सम्राट चौधरी और जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल, Photo Credit- Social Media

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बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने नई दिल्ली में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल से मुलाकात की। बैठक में बिहार की सिंचाई, बाढ़ नियंत्रण और जल संसाधन से जुड़ी बड़ी परियोजनाओं की प्रगति पर चर्चा हुई। इस दौरान उप मुख्यमंत्री सह जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी भी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने केंद्र से लंबित परियोजनाओं को जल्द मंजूरी देने और जरूरी राशि जारी करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि बिहार देश का सबसे ज्यादा बाढ़ प्रभावित राज्यों में है इसलिए राज्य को विशेष केंद्रीय मदद की जरूरत है।

 

मुख्यमंत्री ने बताया कि बिहार का करीब 73 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र हर साल बाढ़ की चपेट में आता है। गंगा, कोसी, गंडक और बागमती जैसी नदियों के कारण कई इलाकों में हर साल बाढ़ की समस्या रहती है। उन्होंने केंद्रीय मंत्री से केंद्रीय बजट 2024-25 और 2025-26 में बिहार के लिए की गई घोषणाओं के तहत राशि जल्द जारी करने की मांग की।

 

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कोसी-मेची समेत कई योजनाओं पर चर्चा

मुख्यमंत्री ने बताया कि बिहार सरकार ने सिंचाई और जल संसाधन से जुड़ी 16,339.18 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का डीपीआर केंद्र को भेजा है। इनमें अब तक सिर्फ दो परियोजनाओं को मंजूरी मिली है जबकि बाकी प्रस्तावों पर केंद्र के स्तर पर विचार चल रहा है। बैठक में कोसी-मेची अंतर्राज्यीय रिवर लिंक परियोजना पर खास तौर पर चर्चा हुई। करीब 3,652.56 करोड़ रुपये की इस परियोजना का मकसद कोसी बेसिन के अतिरिक्त पानी का बेहतर इस्तेमाल कर उत्तर बिहार में सिंचाई की सुविधा बढ़ाना है। इससे अररिया, पूर्णिया, किशनगंज और कटिहार जैसे जिलों को फायदा मिलने की उम्मीद है।

 

परियोजना के पहले चरण के लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 में 395.41 करोड़ रुपये और 2026-27 में 570 करोड़ रुपये का प्रावधान है। अब तक सिर्फ 156.745 करोड़ रुपये मिले हैं। मुख्यमंत्री ने बाकी राशि जल्द जारी करने और दूसरे चरण के डीपीआर को मंजूरी देने का आग्रह किया। राज्य सरकार के अनुसार, परियोजना पूरी होने पर उत्तर बिहार में 2 लाख हेक्टेयर से ज्यादा जमीन को सिंचाई की सुविधा मिल सकती है।

 

मुख्यमंत्री ने पूर्वी चंपारण की सिकरहना दायां तटबंध निर्माण योजना पर भी बात की। 125.08 करोड़ रुपये की केंद्रीय हिस्सेदारी वाली इस योजना को केंद्रीय समिति पहले ही मंजूरी के लिए सुझा चुकी है। मुख्यमंत्री ने इसके लिए केंद्रीय सहायता जल्द देने का आग्रह किया। इसके अलावा सिंचाई की तीन और बाढ़ प्रबंधन की 15 परियोजनाओं की स्थिति पर भी चर्चा हुई। बैठक में पश्चिमी कोसी नहर परियोजना के विस्तार, नवीकरण और आधुनिकीकरण की भी समीक्षा हुई। बिहार सरकार ने इसके लिए 8,338.89 करोड़ रुपये का डीपीआर केंद्रीय जल आयोग को भेजा है। केंद्र से मदद मिलने की उम्मीद में राज्य सरकार अपने संसाधनों से पहले चरण का काम शुरू कर चुकी है। मुख्यमंत्री ने इसकी जल्द मंजूरी और केंद्रीय सहायता देने की मांग की।

तीन योजनाओं को बजट में शामिल करने की मांग

मुख्यमंत्री ने आगामी केंद्रीय बजट 2026-27 में बिहार की तीन बड़ी परियोजनाओं को शामिल करने का अनुरोध किया। इनमें इंद्रपुरी जलाशय परियोजना, सोन-फल्गु रिवर लिंक परियोजना और सारण जिले की बाढ़ नियंत्रण एवं जल निकासी परियोजना शामिल हैं।

 

इंद्रपुरी जलाशय परियोजना से सोन नहर प्रणाली को पूरे साल पानी उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। इससे रोहतास, औरंगाबाद, गया और अरवल जैसे जिलों को फायदा होगा। वहीं सोन-फल्गु रिवर लिंक परियोजना के तहत सोन नदी के पानी को पाइपलाइन और नहरों के जरिए फल्गु नदी तक पहुंचाने की योजना है। इससे गया और औरंगाबाद के सूखाग्रस्त इलाकों में सिंचाई और पेयजल की सुविधा बढ़ेगी। फल्गु नदी में सालभर पानी रहने से पितृपक्ष के दौरान पिंडदान करने आने वाले लोगों को भी राहत मिल सकती है।

 

सारण जिले की बाढ़ नियंत्रण एवं जल निकासी परियोजना की अनुमानित लागत 1,350.95 करोड़ रुपये है। इसके तहत जलनिकासी चैनलों की मरम्मत, नए रेगुलेटर और दूसरी जरूरी संरचनाएं बनाई जाएंगी। इससे सारण क्षेत्र में बाढ़ का असर कम करने और कृषि भूमि को बचाने में मदद मिलेगी।

 

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बाढ़ और गाद की समस्या भी उठाई

मुख्यमंत्री ने बाढ़ नियंत्रण के लिए चल रहे फ्लड मैनेजमेंट एंड बॉर्डर एरिया प्रोग्राम के तहत बिहार का बजट बढ़ाने की भी मांग की। उन्होंने कहा, 'राज्य को मिलने वाली राशि जरूरत के मुकाबले कम है।' इसके अलावा गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग के अध्यक्ष का मुख्यालय पटना में ही रखने का मुद्दा भी उठाया गया। मुख्यमंत्री ने कहा, 'बिहार बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्यों में है इसलिए आयोग का पटना में रहना जरूरी है।'

 

बैठक में गाद की समस्या और गंगा जल की उपलब्धता पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय स्तर पर गाद प्रबंधन नीति बनाने और इसके लिए अलग फंड बनाने का आग्रह किया। नेपाल से जुड़ी कोसी हाई डैम, कमला बहुउद्देशीय परियोजना और बागमती बांध परियोजना को जल्द आगे बढ़ाने की मांग भी रखी गई। इन परियोजनाओं के पूरा होने से बिहार के कई जिलों में बाढ़ से राहत, सिंचाई सुविधा और जलविद्युत उत्पादन के अवसर बढ़ सकते हैं।


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