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बदलता बिहार! रोड पर अब नहीं दौड़ेगा डीजे, सरकार ने उठाया सख्त कदम

राज्य सरकार ने 15 दिनों के भीतर इसे लागू करने का फैसला लिया है। साथ ही यह भी कहा है कि जिन लोगों ने बिना अनुमति के वाहनों में मॉडीफिकेशन करवाया है उन पर भी कार्रवाई की जाएगी।

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प्रतीकात्मक तस्वीर । Photo Credit: AI Generated

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संजय सिंह, पटना। बिहार देश का पहला राज्य बनने जा रहा है जहां सड़कों पर चलने वाले डीजे ऑन व्हील्स पर पूर्ण प्रतिबंध लागू होगा। यह मुद्दा पहले कई बार विधानसभा में गूंज चुका था, लेकिन अब सरकार ने इस पर सख्त और निर्णायक कदम उठाने का फैसला कर लिया है। राज्य सरकार ने 15 दिनों के भीतर बिहार को डीजे मुक्त बनाने का अभियान शुरू कर दिया है।

 

बिहार में सड़कों पर दौड़ते डीजे ऑन व्हील्स अब ज्यादा दिन तक शोर नहीं मचा पाएंगे। परिवहन विभाग के सचिव राज कुमार ने सभी जिलों के जिला परिवहन पदाधिकारियों (डीटीओ) और मोटर वाहन निरीक्षकों (एमवीआई) को स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए हैं कि बिना अनुमति के मॉडिफाइड डीजे वाहनों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।

 

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15 दिनों की सीमा

विभाग ने साफ कर दिया है कि जिन वाहनों में बिना पंजीकरण और अनुमति के डीजे सिस्टम लगाया गया है या जिनकी संरचना में बदलाव किया गया है, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा। 15 दिनों की समय-सीमा के भीतर ऐसे वाहनों पर पूर्ण प्रतिबंध लागू कर दिया जाएगा। इसके लिए राज्यभर में जांच अभियान तेज कर दिया गया है। पटना सहित कई जिलों में अब तक सैकड़ों संशोधित डीजे वाहन पकड़े जा चुके हैं।

क्या है कार्रवाई का आधार?

परिवहन विभाग ने बताया कि मोटर वाहन अधिनियम की धारा 52 के तहत किसी भी वाहन की संरचना में बिना सक्षम प्राधिकार की अनुमति के परिवर्तन प्रतिबंधित है। इसके अलावा धारा 55 (5) और 182 (ए) के अंतर्गत ऐसे वाहनों का पंजीकरण रद्द करने और दंडित करने का प्रावधान है। जरूरत पड़ने पर गिरफ्तारी तक की कार्रवाई भी की जा सकती है।

 

अभियान के तहत बिना अनुमति डीजे सिस्टम की फिटिंग, वाहन की बॉडी में अवैध संशोधन, अत्यधिक ध्वनि प्रदूषण, कमर्शियल पंजीकरण के बाद अवैध उपयोग, गाड़ी में किसी भी दिशा में मॉडिफाइड डीजे सिस्टम लगाना इन सभी मामलों में आर्थिक जुर्माने का प्रावधान है। निर्धारित ध्वनि मानकों से अधिक शोर फैलाने पर प्रदूषण नियंत्रण प्रावधानों के तहत दो हजार रुपये तक का चालान किया जा रहा है।

सड़क सुरक्षा है प्राथमिकता

सचिव राज कुमार ने कहा कि यह कदम मुख्य रूप से सड़क सुरक्षा, ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण और शादी-बारात के दौरान होने वाली अव्यवस्था को रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है। कई बार तेज आवाज और भीड़भाड़ के कारण दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है। साथ ही, आम नागरिकों, बुजुर्गों और मरीजों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

 

विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि जो लोग अपने वाहनों को कमर्शियल उपयोग के लिए पंजीकृत कराते हैं और बाद में उन्हें मॉडिफाइड डीजे वाहन में बदल देते हैं, उनके खिलाफ विशेष रूप से कड़ी कार्रवाई की जाएगी। ऐसे मामलों में वाहन जब्ती, भारी जुर्माना और पंजीकरण निरस्त करने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

जिलों में तेज हुई जांच

राज्य के सभी जिलों में चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है। परिवहन विभाग की टीम पुलिस के सहयोग से प्रमुख सड़कों, बाजार क्षेत्रों और शादी समारोह स्थलों के आसपास विशेष निगरानी कर रही है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि कार्रवाई में किसी प्रकार की ढिलाई न बरती जाए।

 

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सरकार के इस फैसले से जहां आम नागरिकों को राहत मिलने की उम्मीद है, वहीं अवैध डीजे वाहन संचालकों में हड़कंप मच गया है। आने वाले 15 दिन राज्य में डीजे वाहनों के लिए निर्णायक साबित हो सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो अब बिहार की सड़कों पर शोरगुल नहीं, कानून की गूंज सुनाई देगी।

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