उत्तर प्रदेश में मथुरा के प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर में पुरानी परंपराओं और नई व्यवस्था को लेकर चल विवाद गहरा गया है। दरअसल, गुरुवार को मंदिर के गर्भगृह पर ताला लगा दिया गया। इस फैसले के बाद सेवायत गोस्वामियों ने श्रद्धालुओं के साथ मिलकर प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और नारेबाजी करने लगे। यह हंगामा हाई पावर्ड कमेटी (सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त) बुधवार को हुई कमेटी की 12वीं बैठक के बाद लिए गए फैसलों के बाद हुआ है।
विवाद क्या है?
इसी महीने यानि फरवरी में जगमोहन दर्शन और परंपरा vs नई व्यवस्था को लेकर विवाद सामने आया। यह विवाद मुख्य रूप से सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित की गई हाई पावर मैनेजमेंट कमेटी और मंदिर के पारंपरिक सेवायत गोस्वामी समाज के बीच चल रहा है। हाई पावर कमेटी का मकसद मंदिर में भक्तों को बेहतर दर्शन सुविधा देना, भीड़ प्रबंधन करना और दर्शन का समय बढ़ाना है।
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कमेटी ने हाल ही में ठाकुर बांके बिहारी जी को गर्भगृह से जगमोहन (बाहरी चबूतरा या हॉल) में विराजमान करके दर्शन कराने का फैसला किया। इससे भक्तों को आसानी से दर्शन मिल सकें और भीड़ कम हो। मगर, परंपरा के अनुसार ठाकुर बांके बिहारी जी केवल विशेष तीज-त्योहारों पर ही जगमोहन में दर्शन देते हैं। भीड़ प्रबंधन और सुगम दर्शन के लिए ठाकुर जी को रोजाना जगमोहन में बैठाने की योजना है।
गुस्सा हो उठे श्रद्धालु
सेवायतों का कहना है कि प्रशासन प्राचीन परंपराओं को जबरन तोड़ना चाहता है। दरअसल, बुधवार को राजभोग सेवा के दौरान ठाकुर जी को जगमोहन में विराजमान किया गया था। दोपहर में दर्शन बंद होने के बाद जब 'शयनभोग' सेवा के लिए गोस्वामी मंदिर पहुंचे, तो गर्भगृह के मुख्य द्वार पर ताला लटका मिला। प्रशासन के इस फैसले से न केवल पूजा में व्यवधान पड़ा, बल्कि वहां मौजूद भक्त भी गुस्सा हो उठे।
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गर्भगृह पर ताला देखकर मंदिर में मौजूद श्रद्धालु भड़क गए और भक्त प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। भक्तों के बढ़ते दबाव और सेवायतों के कड़े विरोध को देखते हुए हाई पावर्ड कमेटी मान गई और थोड़ी देर बाद ही गर्भगृह का ताला खोला दिया और दर्शन सुचारु रूप से शुरू हो गया।