संजय सिंह, पटना। बिहार में शिक्षा के प्रति जागरूकता और बेटियों के बढ़ते हौसले की एक अनोखी मिसाल गया जी जिले के शेरघाटी से सामने आई है। यहां शादी की रस्मों के तुरंत बाद एक नवविवाहिता दुल्हन सीधे परीक्षा केंद्र पहुंच गई। हाथों में गहरी मेहंदी, लाल जोड़ा, माथे पर सिंदूर और गहनों से सजी दुल्हन जब मैट्रिक की परीक्षा देने पहुंची, तो यह दृश्य वहां मौजूद हर किसी के लिए कौतूहल का विषय बन गया।
मामला शेरघाटी स्थित एसएमएसजी कॉलेज परीक्षा केंद्र का है। जानकारी के अनुसार, शेरघाटी प्रखंड के एक गांव की रहने वाली छात्रा निशु की शादी 20 फरवरी की रात संपन्न हुई थी। घर में शादी की खुशियां, बारात, फेरे और विदाई की तैयारियों के बीच उसकी मैट्रिक परीक्षा की तारीख भी तय थी। सामान्यतः शादी के बाद दुल्हन ससुराल जाकर पारंपरिक रस्मों में व्यस्त हो जाती है, लेकिन निशु ने पढ़ाई को अपनी पहली प्राथमिकता माना।
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विदाई के बाद पहुंची परीक्षा केंद्र
21 फरवरी की सुबह विदाई की रस्म पूरी होते ही निशु ने सीधे परीक्षा केंद्र का रुख किया। सुबह करीब आठ बजे वह अपने पति के साथ सजी हुई कार से शेरघाटी स्थित एसएमएसजी कॉलेज पहुंची। जैसे ही दूल्हा-दुल्हन की गाड़ी कॉलेज के गेट पर रुकी, वहां मौजूद परीक्षार्थी, अभिभावक और स्थानीय लोग हैरान रह गए। लाल जोड़े में दुल्हन को परीक्षा देने आते देख लोग उत्सुकता से उसे निहारने लगे।
कई लोगों ने इस अनोखे पल को अपने मोबाइल कैमरे में कैद कर लिया। स्थिति ऐसी हो गई कि केंद्र के बाहर भीड़ जमा हो गई। परीक्षा की शांति भंग न हो, इसके लिए मौके पर तैनात पुलिसकर्मियों को भीड़ नियंत्रित करनी पड़ी। हालांकि, इस बीच निशु पूरी तरह संयमित और आत्मविश्वास से भरी नजर आई। उसने किसी भी तरह की हलचल पर ध्यान न देते हुए सीधे परीक्षा कक्ष में प्रवेश किया और अपना पेपर लिखने में जुट गई।
पति करता रहा इंतजार
करीब तीन घंटे तक परीक्षा हॉल के अंदर वह प्रश्नपत्र हल करती रही, जबकि उनका पति बाहर कार में बैठकर उनका इंतजार करता रहा। इस दौरान दूल्हे ने भी पत्नी के फैसले का पूरा समर्थन किया। परीक्षा समाप्त होने के बाद जब निशु केंद्र से बाहर निकली, तो एक बार फिर लोगों की नजरें उस पर टिक गईं। परीक्षा देने के बाद वह अपने पति के साथ ससुराल के लिए रवाना हो गई। निशु का यह फैसला आसान नहीं था।
शादी की तारीख पहले से तय थी और बिहार बोर्ड की मैट्रिक परीक्षा भी उसी समय पड़ रही थी। उसके सामने विकल्प था कि वह परीक्षा छोड़ दे और बाद में अफसोस करे, या फिर परिस्थितियों से लड़ते हुए अपने भविष्य को प्राथमिकता दे। उसने दूसरा रास्ता चुना। परिवार और ससुराल पक्ष के सहयोग से उसने यह साबित कर दिया कि यदि इरादे मजबूत हों, तो परंपराएं भी शिक्षा के मार्ग में बाधा नहीं बन सकतीं।
दुल्हन बनी हौसले की मिसाल
सोशल मीडिया पर इस घटना की चर्चा तेज है। लोग निशु की जिद, लगन और साहस की सराहना कर रहे हैं। कई लोग इसे ‘बेटी पढ़ाओ’ अभियान की सच्ची तस्वीर बता रहे हैं। यह घटना न केवल शेरघाटी बल्कि पूरे बिहार के लिए एक सकारात्मक संदेश है कि अब बेटियां अपने सपनों के लिए किसी भी परिस्थिति का सामना करने को तैयार हैं।
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निशु की यह पहल उन हजारों छात्राओं के लिए प्रेरणा है, जो सामाजिक दबाव या पारिवारिक परिस्थितियों के कारण पढ़ाई बीच में छोड़ देती हैं। लाल जोड़े में परीक्षा देने पहुंची यह दुल्हन आज शिक्षा और संकल्प की नई पहचान बन गई है।