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जमाबंदी में गड़बड़ी नहीं चलेगी, सरकारी जमीन के सत्यापन पर सचिव का सख्त निर्देश

बिहार में जमाबंदी शुद्धिकरण और सरकारी जमीन के सत्यापन को लेकर राजस्व विभाग ने सख्त निर्देश दिए हैं। 5 एकड़ से बड़ी सरकारी जमीन का पहले सत्यापन करने और जाली दस्तावेज पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

Bihar Department of Revenue and Land Reforms Secretary Jai Singh

बिहार राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव जय सिंह, Photo Credit- Social Media

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बिहार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने जमाबंदी और सरकारी जमीन से जुड़े मामलों में तेजी लाने के लिए सख्त रुख अपनाया है। विभाग के सचिव जय सिंह ने जमाबंदी शुद्धिकरण में तेजी लाने और सरकारी जमीन का प्राथमिकता के आधार पर सत्यापन करने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि 5 एकड़ से अधिक क्षेत्रफल वाले सरकारी प्लॉट का सत्यापन सबसे पहले किया जाए। जाली दस्तावेज के मामलों में भी कार्रवाई तेज करने का निर्देश दिया गया है। राजस्व (सर्वे) प्रशिक्षण संस्थान, पटना में बेगूसराय, मधुबनी और जमुई जिले के सभी अंचल अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक हुई। इसमें जमाबंदी शुद्धिकरण, सरकारी जमीन की पहचान, नामांतरण, दाखिल-खारिज सहित सभी राजस्व सेवाओं की प्रगति की समीक्षा की गई।

 

सचिव ने कहा कि जमाबंदी में हुई छोटी सी गलती भी आम लोगों के लिए बड़ी समस्या बन जाती है। इसके कारण किसानों को सालों तक दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। कई बार लोन नहीं मिल पाता और जमीन की खरीद-बिक्री में भी परेशानी होती है। इसलिए मौजा-वार विशेष अभियान चलाकर सभी जमाबंदियों का शुद्धिकरण करने का निर्देश दिया गया। उन्होंने कहा, 'किसी भी स्तर पर लापरवाही या काम को बिना वजह लंबित रखने की प्रवृत्ति स्वीकार नहीं की जाएगी। जमाबंदी शुद्धिकरण केवल संख्या पूरी करने के लिए नहीं बल्कि सही तरीके से किया जाना चाहिए। हर जमाबंदी को सही करना जरूरी है ताकि आम लोगों को राहत मिल सके।'

 

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बड़ी जमीन की पहले होगी जांच

सरकारी जमीन के भौतिक सत्यापन की समीक्षा के दौरान सचिव ने 5 एकड़ से अधिक क्षेत्रफल वाली सरकारी जमीन का सत्यापन प्राथमिकता के आधार पर शुरू करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा, 'बड़े प्लॉट पर अतिक्रमण का खतरा ज्यादा होता है। इसलिए पहले उनकी पहचान और सत्यापन करना जरूरी है।' सरकारी प्लॉट से जुड़ी जमाबंदियों की भी जांच करने और उनकी वास्तविक स्थिति साफ करने का निर्देश दिया गया। कई जगह सरकारी जमीन पर गलत तरीके से जमाबंदी बना दी गई है। ऐसी जमाबंदियों को चिह्नित कर नियम के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। लॉक की गई जमाबंदियों को नियमानुसार अनलॉक करने की कार्रवाई में भी तेजी लाने को कहा गया।

 

बैठक में भू-अभिलेख पोर्टल पर प्राप्त अनुरोधों के साथ स्कैन किए गए दस्तावेजों को अपलोड करने और निबंधन से पहले अभिलेखों के सत्यापन की स्थिति की समीक्षा की गई। सचिव ने राजस्व महाअभियान के तहत मिले आवेदनों का सिर्फ संख्या के आधार पर नहीं बल्कि सही तरीके से निष्पादन करने को कहा। उन्होंने कहा, 'केवल आंकड़ा दिखाने के लिए काम नहीं होना चाहिए। हर आवेदन का सही तरीके से निष्पादन जरूरी है। निबंधन से पहले अभिलेखों का सत्यापन किया जाए ताकि फर्जीवाड़े को रोका जा सके।'

 

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मृत रैयतों की जमाबंदी पर कार्रवाई

मृत रैयतों की जमाबंदी पर सचिव ने खुद संज्ञान लेकर उनके वारिसों के नाम दर्ज करने और जमीन के बंटवारे की कार्रवाई करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा, 'मृत रैयतों की जमाबंदी को वर्षों तक लंबित रखना व्यवस्था की गंभीर कमी है। ऐसे मामलों को अभियान चलाकर जल्द निपटाया जाए।' कई परिवारों में पिता की मृत्यु के बाद भी जमाबंदी उन्हीं के नाम पर चलती रहती है। इससे जमीन के बंटवारे में विवाद होता है। इसलिए अंचल अधिकारियों को खुद संज्ञान लेकर उत्तराधिकार नामांतरण करने का निर्देश दिया गया।

 

दाखिल-खारिज के आवेदनों में गलत प्रश्नावली भरने पर सचिव ने नाराजगी जताई। उन्होंने ऐसे लोगों के खिलाफ नोटिस जारी करने का निर्देश दिया। जाली या कूटरचित दस्तावेज पेश करने के मामलों की भी समीक्षा की गई। सचिव ने ऐसे मामलों में नियमानुसार कार्रवाई करने और दर्ज प्राथमिकी की स्थिति की लगातार निगरानी करने को कहा।

 

बैठक में कर्मचारियों की केसी डायरी और मोबाइल ऐप के जरिए केसी उपस्थिति दर्ज करने की स्थिति की भी समीक्षा की गई। विवादित जमीन की मापी से जुड़े फीडबैक को गंभीरता से लेने और मापी के काम में पारदर्शिता और निष्पक्षता रखने का निर्देश दिया गया। सचिव ने कहा, 'राजस्व सेवाओं में देरी का सीधा असर आम लोगों पर पड़ता है। इसलिए सभी अंचल अधिकारी अपने स्तर पर नियमित निगरानी करें और हर लंबित काम को तय समय में पूरा करें। आम लोगों को समय पर न्याय मिलना चाहिए।'


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