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बिहार में भूदान भूमि की होगी मैपिंग, गरीबों को कैसे पहुंचेगा फायदा?

बिहार सरकार भूदान भूमि की मैपिंग करवाएगी। इसके अलावा डिजिटल डाटाबेस बनाया जाएगा। हर दस्तावेज अपडेट करने का फैसला लिया गया है।

Minister Dr. Dilip Kumar Jaiswal

मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल। (Photo Credit: FB/Dilip Jaiswal )

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भूदान भूमि के अभिलेखों के अपडेटशन और प्रबंधन को लेकर राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने समीक्षा की। मंत्री ने अधिकारियों को मिशन मोड में अभिलेखों की इन्वेंट्री, स्कैनिंग एवं डिजिटलीकरण का निर्देश दिया। अपर समाहर्ताओं की अध्यक्षता में टीम बनेगी और भूदान भूमि की अलग मैपिंग तैयार की जाएगी। मंत्री ने कहा कि भूदान भूमि से जुड़े सभी अभिलेखों को व्यवस्थित और सुरक्षित किया जाए, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की कठिनाई न हो। भूदान भूमि के पुराने और महत्वपूर्ण अभिलेखों को डिजिटल रूप में सुरक्षित रखा जाएगा।

 

मंत्री ने विभागीय अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में भूदान भूमि से जुड़े उपलब्ध अभिलेखों के सत्यापन, अभिलेखों की स्थिति, संरक्षण, स्कैनिंग एवं डिजिटलीकरण सहित विभिन्न बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। मंत्री ने कहा कि भूदान आंदोलन के समय हजारों एकड़ जमीन दान में मिली थी और उसका वितरण भूमिहीनों के बीच किया गया था, लेकिन कई जिलों में इसके अभिलेख बिखरे हुए हैं और कई जगह अभिलेख खराब स्थिति में हैं। इसलिए सभी अभिलेखों को एक जगह समेकित कर डिजिटल रूप में सुरक्षित करना जरूरी है।

अभिलेखों को व्यवस्थित और अपडेट करें, सत्यापन कर सुरक्षित रखें

मंत्री ने अधिकारियों को मिशन मोड में कार्य करते हुए भूदान भूमि से संबंधित सभी उपलब्ध अभिलेखों को व्यवस्थित एवं अपडेट करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि उपलब्ध भू-अभिलेखों का आवश्यकतानुसार सत्यापन कर उन्हें सुरक्षित एवं व्यवस्थित तरीके से संरक्षित किया जाए, ताकि भविष्य में इन अभिलेखों के उपयोग और सत्यापन में किसी प्रकार की कठिनाई न हो। कई बार भूदान भूमि को लेकर विवाद होता है और अभिलेख नहीं मिलने से मामला उलझ जाता है। 

 

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बैठक में दान-पत्र, संपुष्टि पंजी सहित भूदान भूमि से संबंधित विभिन्न पंजियों एवं अभिलेखों की स्थिति की भी समीक्षा की गई। मंत्री ने बताया कि भूदान के समय दान-पत्र भरवाए गए थे और उसके बाद संपुष्टि पंजी में जमीन को संपुष्ट किया गया था। कई जिलों में दान-पत्र तो हैं, लेकिन संपुष्टि पंजी नहीं मिल रही है। कहीं संपुष्टि पंजी है तो दान-पत्र नहीं है। इसलिए सभी पंजियों को एक साथ मिलाकर समेकित रिकॉर्ड तैयार करने की जरूरत है। 

भूदान भूमि की मैपिंग की तैयारी

मंत्री ने निर्देश दिया कि भूदान की सभी संपुष्ट भूमि से संबंधित उपलब्ध आंकड़ों का समेकन करते हुए अलग से भूदान भूमि मैपिंग तैयार की जाए। इससे भूदान भूमि का स्पष्ट, समेकित एवं व्यवस्थित रिकॉर्ड तैयार करने में मदद मिलेगी। मंत्री ने कहा कि भूदान भूमि की अलग मैपिंग तैयार होने से पता चलेगा कि किस जिले में कितनी भूदान भूमि है, उसमें से कितनी भूमि का वितरण हुआ है और कितनी भूमि अभी भी विवादित है या अतिक्रमित है। मैपिंग के बाद भूदान भूमि को अतिक्रमण से बचाना आसान होगा और भूमिहीनों को जमीन देने में भी आसानी होगी। मंत्री ने कहा कि भूदान भूमि गरीबों के लिए है और इसे गरीबों तक ही पहुंचना चाहिए।

समय पर काम पूरा करने का निर्देश

सचिव जय सिंह ने निर्देश दिया कि सभी जिलों में अपर समाहर्ता की अध्यक्षता में टीम गठित कर भूदान भूमि से संबंधित अभिलेखों की विस्तृत इन्वेंट्री तैयार की जाए। इन्वेंट्री तैयार होने के बाद उपलब्ध अभिलेखों की स्कैनिंग एवं डिजिटलीकरण का कार्य किया जाएगा। इससे पुराने और महत्वपूर्ण अभिलेखों का डिजिटल रूप में सुरक्षित संरक्षण सुनिश्चित होगा। सचिव ने कहा कि सबसे पहले हर जिले में पता लगाया जाए कि भूदान से जुड़े कितने अभिलेख उपलब्ध हैं, वे किस स्थिति में हैं और कहां रखे हुए हैं। कई अभिलेख अंचल कार्यालयों में हैं तो कई जिला अभिलेखागार में पड़े हैं। कई अभिलेख तो फटे-पुराने हो चुके हैं। इसलिए उनकी इन्वेंट्री बनाना जरूरी है। सचिव ने कहा कि इन्वेंट्री बनने के बाद स्कैनिंग और डिजिटलीकरण का काम शुरू किया जाएगा। 

 

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हर जिले में बनेगी टीम

पुराने अभिलेखों को स्कैन कर डिजिटल फॉर्म में सुरक्षित रखा जाएगा, ताकि भविष्य में वे खराब भी हो जाएं तो उनका डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रहे। डिजिटलीकरण होने से भूदान भूमि के अभिलेखों को ऑनलाइन भी देखा जा सकेगा और लोगों को अभिलेखों के लिए कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। यह काम मिशन मोड में करना है और इसके लिए हर जिले में अपर समाहर्ता की अध्यक्षता में टीम बनाई जाएगी। टीम में जिला भूदान पदाधिकारी, अंचल अधिकारी और अन्य कर्मी शामिल होंगे। मंत्री ने इस पूरे कार्य की जिला स्तर पर नियमित निगरानी की जिम्मेदारी जिलाधिकारियों को देने का निर्देश दिया।


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