बिहार सरकार के मंत्री अशोक चौधरी ने कई अहम मुद्दों पर बयान दिया है। उन्होंने गंगा में गाद की समस्या से लेकर देश की जीडीपी वृद्धि, विपक्ष की राजनीति, मछलियों की मौत और आरक्षण के मुद्दे पर खुलकर अपनी राय रखी। मंत्री ने कहा कि यदि गंगा के लिए स्पष्ट गाद नीति बनती है तो इसका सीधा फायदा बिहार को मिलेगा। वहीं देश की जीडीपी ग्रोथ को लेकर उन्होंने केंद्र सरकार के वित्तीय प्रबंधन की जमकर सराहना की।
गंगा बेसिन में लगातार बढ़ रही गाद की समस्या को लेकर मंत्री ने कहा कि गंगा की मौजूदा स्थिति को देखते हुए एक स्पष्ट गाद नीति बनाए जाने की जरूरत है। गंगा में हर साल करोड़ों टन गाद जमा हो रही है। इससे नदी की गहराई कम हो रही है, बाढ़ का खतरा बढ़ रहा है और नौवहन में दिक्कत आ रही है। मंत्री ने कहा कि यदि गाद नीति बनती है तो इसका सीधा फायदा बिहार को मिलेगा।
उन्होंने कहा, 'बिहार गंगा के मध्य में है। यहां गाद सबसे ज्यादा जमा होती है। गाद निकालने से बाढ़ से बचाव होगा, कृषि योग्य जमीन बचेगी और गाद का उपयोग निर्माण कार्य में हो सकेगा। इससे बिहार को आर्थिक लाभ भी होगा।' उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। बिहार सरकार पहले भी इस मुद्दे को उठा चुकी है।
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जीडीपी पर क्या बोले?
देश की जीडीपी वृद्धि को लेकर मंत्री ने प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी
के बयान का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में भी यदि देश की जीडीपी 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है, तो यह केंद्र सरकार के मजबूत और सफल वित्तीय प्रबंधन को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि मिडिल ईस्ट संकट के बाद गैस और पेट्रोलियम की कीमतों में बढ़ोतरी के साथ महंगाई का दबाव भी बढ़ा, लेकिन इसके बावजूद भारत अपनी जीडीपी ग्रोथ को बनाए रखने में सफल रहा है।
उन्होंने आगे कहा कि पूरी दुनिया में मंदी का माहौल है, कई बड़े देशों की अर्थव्यवस्था लड़खड़ा रही है, फिर भी भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बना हुआ है। ऐसे में सिर्फ राजनीतिक विरोध के लिए आर्थिक उपलब्धियों पर सवाल उठाना उचित नहीं है। मंत्री ने कहा कि विपक्ष को सकारात्मक सोच रखनी चाहिए। देश की तरक्की पर सबको गर्व होना चाहिए। जीडीपी ग्रोथ का फायदा सीधे आम लोगों तक पहुंच रहा है। गरीब कल्याण योजनाएं, इंफ्रास्ट्रक्चर और रोजगार में इसका असर दिख रहा है।
विपक्ष पर साधा निशाना
अशोक चौधरी ने विपक्ष की राजनीति पर भी निशाना साधते हुए कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी विपक्ष में रहते हुए भी देशहित और विदेश नीति के मुद्दों पर सरकार के साथ खड़े होते थे। विदेश में जाकर वे कभी भारत की आलोचना नहीं करते थे। अशोक चौधरी ने कहा, 'देश पहले, राजनीति बाद में, यही उनकी सोच थी। इसके विपरीत आज विपक्ष के नेता विदेशों में जाकर भारत की विदेश नीति और प्रधानमंत्री पर सवाल उठाते हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि यह राजनीतिक सोच और राजनीति की गुणवत्ता में अंतर को दर्शाता है। आज का विपक्ष सिर्फ विरोध के लिए विरोध करता है। विदेशी धरती पर देश की बुराई करना बंद होना चाहिए। इससे देश की छवि खराब होती है।'
मृत मछली खाने से बचने की अपील
हिमालयी क्षेत्रों में मछलियों की मौत और उन्हें खाने को लेकर जारी एडवाइजरी पर मंत्री ने कहा कि हिमालय क्षेत्र में करीब एक हजार से ग्यारह सौ जल निकाय हैं, जो अलग-अलग और दुर्गम क्षेत्रों में स्थित हैं। इन जल निकायों में मछलियां पाई जाती हैं, लेकिन विषम परिस्थितियों में मरने वाली मछलियां मानव उपभोग के लिए सुरक्षित नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को लगातार जागरूक कर रही है और लोगों से अपील की जा रही है कि मृत अवस्था में मिलने वाली मछलियों का सेवन न करें। ऐसी मछली खाने से बीमारी फैल सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि मछलियों के प्रजनन के समय उनके सेवन को लेकर भी लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है। प्रजनन काल में मछली पकड़ने से उनकी संख्या कम होती है।
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आरक्षण पर क्या बोले?
आरक्षण की समीक्षा को लेकर चल रही बहस पर मंत्री अशोक चौधरी ने इसे बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण मुद्दा बताया। उन्होंने कहा, 'आरक्षण संविधान से प्रदत्त अधिकार है । इस पर किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता। आरक्षण दलित, पिछड़ा और वंचित समाज के उत्थान का आधार है।'
उन्होंने कहा कि यदि आरक्षण को लेकर समीक्षा या बदलाव की जरूरत महसूस होती है, तो इस पर बहस मीडिया में नहीं, बल्कि संसद में होनी चाहिए। संसद को ही इस तरह के संवेदनशील संवैधानिक विषयों पर चर्चा करने का अधिकार है। टीवी डिबेट में इस पर बयानबाजी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि उनके नेता ने दलित आयोग का गठन किया है। वह अपने नेताओं तथा अपनी विचारधारा के अनुसार ही इस मुद्दे पर आगे बढ़ेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि आरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी के बजाय संवैधानिक प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए।