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बिहार में BIADA की जमीन लेना होगा आसान, नई इंडस्ट्रियल पॉलिसी लागू

बिहार में नई इंडस्ट्रियल पॉलिसी लागू की गई है जिसके जरिए कई बदलाव किए गए हैं ताकि निवेशकों को आसानी हो और राज्य में उद्योग लगाने की रफ्तार बढ़ाई जा सके।

cm samrat choudhary

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, Photo Credit: Social Media

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संजय सिंह, पटना: बिहार में उद्योग लगाने की प्रक्रिया अब पहले से कहीं अधिक आसान, पारदर्शी और निवेशक-अनुकूल होने जा रही है। बिहार सरकार ने औद्योगिक विकास को नई गति देने के उद्देश्य से बियाडा लैंड अलॉटमेंट एंड मैनेजमेंट पॉलिसी, 2026 लागू कर दी है। इसके लागू होते ही वर्ष 2022 की पुरानी भूमि आवंटन नीति समाप्त कर दी गई है। नई नीति में ऑनलाइन आवेदन, ई-ऑक्शन, प्लग-एंड-प्ले शेड, आसान भुगतान व्यवस्था और स्पष्ट समय-सीमा जैसे कई बड़े बदलाव किए गए हैं, जिनसे निवेशकों को उद्योग स्थापित करने में सहूलियत मिलेगी।

 

उद्योग विभाग के अंतर्गत बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण की ओर से लागू की गई इस नीति का मुख्य उद्देश्य राज्य में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देना और भूमि आवंटन प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाना है। अब सभी औद्योगिक भूखंडों और शेडों का आवंटन केवल ऑनलाइन आवेदन प्रणाली के माध्यम से किया जाएगा। बियाडा (BIADA) पोर्टल पर उपलब्ध खाली प्लॉटों की जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रहेगी, जिससे निवेशक अपनी आवश्यकता और क्षमता के अनुसार सीधे आवेदन कर सकेंगे।

 

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नई नीति में औद्योगिक क्षेत्रों के विकास के लिए भूमि उपयोग का स्पष्ट ढांचा तय किया गया है। इसके अनुसार 55 से 65 प्रतिशत क्षेत्र औद्योगिक प्लॉट के लिए आरक्षित रहेगा जबकि 15 से 25 प्रतिशत क्षेत्र सड़क और आवागमन के लिए निर्धारित किया गया है। इसके अलावा 10 से 33 प्रतिशत हरित एवं खुले क्षेत्र, 8 प्रतिशत तक उपयोगिताएं, 5 प्रतिशत तक वाणिज्यिक सुविधाएं और 3 प्रतिशत तक आवासीय एवं सामाजिक अवसंरचना के लिए प्रावधान किया गया है। इससे औद्योगिक क्षेत्रों का योजनाबद्ध और संतुलित विकास सुनिश्चित होगा।

नई नीति है ज्यादा पारदर्शी

 

उद्योग विभाग के सचिव सह बियाडा के प्रबंध निदेशक कुंदन कुमार ने कहा कि यह नीति बिहार में उद्योग स्थापना प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, समयबद्ध और निवेशक अनुकूल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने बताया कि नई व्यवस्था से निवेशकों को भूमि आवंटन, भुगतान और संचालन की प्रक्रिया में अनावश्यक जटिलताओं से राहत मिलेगी।नई नीति के तहत औद्योगिक क्षेत्रों को तीन श्रेणियों क्रमशः अनसैचुरेटेड, नॉर्मल और सैचुरेटेड में विभाजित किया गया है। वहीं प्राइम लोकेशन वाले भूखंडों या एक से अधिक आवेदकों वाले प्लॉटों का आवंटन ई-ऑक्शन और ई-बिडिंग प्रक्रिया से होगा। इससे पारदर्शिता के साथ प्रतिस्पर्धात्मक माहौल भी तैयार होगा। अर्नेस्ट मनी डिपॉजिट को भी निवेशक हित में तय किया गया है। माइक्रो और स्मॉल इकाइयों के लिए 2 प्रतिशत तथा मीडियम और लार्ज इकाइयों के लिए 5 प्रतिशत ईएमडी निर्धारित किया गया है। खास बात यह है कि बिहार में पंजीकृत स्टार्टअप्स को ईएमडी में विशेष छूट दी जाएगी।

 

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भूमि लीज अवधि को 30, 60 और 90 वर्ष तक रखा गया है, जिसे बाद में रिन्यू भी कराया जा सकेगा। निवेश के आकार के अनुसार अग्रिम भुगतान की व्यवस्था भी आसान बनाई गई है। 50 लाख तक की परियोजनाओं के लिए 40 प्रतिशत, 50 लाख से 2.5 करोड़ तक 35 प्रतिशत, 2.5 करोड़ से 7.5 करोड़ तक 30 प्रतिशत और 7.5 करोड़ से अधिक निवेश वाली परियोजनाओं के लिए केवल 25 प्रतिशत अग्रिम भुगतान देना होगा। शेष राशि अधिकतम 10 किश्तों में जमा की जा सकेगी।

नीति में उद्योग शुरू करने की समय-सीमा भी तय की गई है। माइक्रो इकाइयों को 12 माह, स्मॉल इकाइयों को 18 माह, मीडियम इकाइयों को 24 माह और लार्ज इकाइयों को 30 माह के भीतर उत्पादन शुरू करना होगा। निर्धारित समय में उत्पादन शुरू नहीं होने पर दंडात्मक प्रावधान भी लागू किए जाएंगे।

आवंटन के 90 दिन के भीतर संचालन अनिवार्य 

 

नई नीति की एक बड़ी विशेषता सरेन्डर एवं एग्जिट मैकेनिज्म है। इससे निष्क्रिय या बंद पड़ी औद्योगिक भूमि का दोबारा उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा। साथ ही मर्जर, डी-मर्जर, उत्पाद परिवर्तन और हस्तांतरण जैसी प्रक्रियाओं को भी सरल बनाया गया है।इसके अलावा प्लग-एंड-प्ले शेड की अवधारणा को विशेष प्राथमिकता दी गई है। ऐसे शेडों का आवंटन शुरुआती तौर पर 5 वर्षों के लिए होगा, जिसे अधिकतम 15 वर्षों तक बढ़ाया जा सकेगा। आवंटन के 90 दिनों के भीतर संचालन शुरू करना अनिवार्य होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि बियाडा लैंड अलॉटमेंट एंड मैनेजमेंट पॉलिसी, 2026 बिहार में उद्योग, निवेश और रोजगार सृजन के नए अवसर पैदा करेगी तथा राज्य को औद्योगिक मानचित्र पर मजबूत पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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