संजय सिंह, पटनाः देशभर के मेडिकल कॉलेजों में फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनाकर नामांकन कराने का खेल बड़े पैमाने पर चल रहा है। पूर्णिया के सरकारी मेडिकल कॉलेज में सीतामढ़ी का एक छात्र फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र के आधार पर नामांकन कराते रंगे हाथों पकड़ा गया। पुलिस गिरफ्तारी के बाद इस मामले की जांच कर रही है।
इस बीच कॉलेज प्रबंधन ने 2023-2024 में दिव्यांगता प्रमाण पत्र के आधार पर नामांकन लेने वाले अन्य छात्रों की भी जांच करवाई। जांच के दौरान सात अन्य छात्रों के भी प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए। पकड़े जाने के भय से फर्जी छात्र हॉस्टल छोड़कर फरार हैं। यह फर्जीवाड़ा देश के अन्य मेडिकल कॉलेजों में भी हुआ है।
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देश स्तर पर संगठित है गिरोह
फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र का धंधा उत्तर प्रदेश से संचालित हो रहा है। यह गिरोह फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र पर मेडिकल कॉलेज में नामांकन कराने के नाम पर पांच से 10 लाख रुपये की ठगी करता है। बीते 9 दिसंबर को सीतामढ़ी का छात्र कार्तिक पूर्णिया मेडिकल कॉलेज में नामांकन के लिए पहुंचा।
उसका आधार कार्ड उत्तर प्रदेश के मेरठ का बना हुआ था। जब मेडिकल कॉलेज के कर्मियों ने जब उसके आधार कार्ड के संबंध में पूछताछ की तो वह भड़क गया। मामला कॉलेज के प्राचार्य के पास पहुंचा। प्राचार्य को भी उसके दिव्यांगता प्रमाण पत्र पर संदेह हुआ। जब उसकी जांच करवाई गई तो प्रमाण पत्र फर्जी पाया गया। उसे तत्काल पुलिस के हवाले कर दिया गया। पुलिस उसके खिलाफ कानूनी कारवाई कर रही है।
तीन मेडिकल कॉलेज से बना है फर्जी सर्टिफिकेट
पूर्णिया मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य को जब संदेह हुआ तो उन्होंने दिव्यांगता कोटे पर मेडिकल में नामांकन लेने वाले अन्य छात्रों के प्रमाण पत्रों की जांच करानी भी शुरू कर दी। जांच में यह पाया गया कि नामांकन लेने वाले अधिकांश छात्रों ने कान की दिव्यांगता का प्रमाण पत्र देकर नामांकन लिया था। इन लोगों ने अपने प्रमाण पत्र कोलकाता, बीएचयू और पीजीआई चंडीगढ़ से फर्जी रूप से प्राप्त किए थे। इन लोगों द्वारा दिए गए दिव्यांगता प्रमाण पत्र की जांच तीनों मेडिकल कॉलेजों से करवाई गई।
यहां के कॉलेज प्रबंधन ने यह लिखकर दिया कि इन मेडिकल कॉलेजों से दिव्यांगता का प्रमाण पत्र कभी जारी किया ही नही गया है। धीरे धीरे यह मामला पूरे कॉलेज में जंगल में लगी आग की तरह फैल गई। संगठित गिरोह द्वारा मामले पर पर्दा डालने के लिए राजनीतिक पहुंच का भी इस्तेमाल किया गया। पर प्राचार्य किसी दबाव के आगे नही झुके।
अधिकांश छात्र अल्पसंख्यक
फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र पर नामांकन लेने वाले अधिकांश छात्र अल्पसंख्यक समुदाय से हैं। इनमें से ज्यादातर बिहार के मिथिलांचल के रहनेवाले हैं। वर्ष 2023 में मोहम्मद शहाबुद्दीन, फरहत शमीम और अजीत कुमार ने नामांकन लिया था। इसी तरह 2024 में मोहसिन, मोजाहिद, अजहर और मोहम्मद रशीद ने अपना नामांकन करवाया। कॉलेज के प्राचार्य हरिशंकर मिश्रा ने बताया कि पकड़े गए छात्रों के खिलाफ कार्रवाई के लिए स्वास्थ्य विभाग को लिखा गया है। ये पकड़े गए छात्र सेकेंड और थर्ड ईयर में पढ़ते थे।
हॉस्टल विवाद के कारण खुली पोल
मेडिकल कॉलेज के कर्मी बताते हैं कि यदि हॉस्टल विवाद को लेकर बात आगे नहीं बढ़ती तो इस फर्जीवाड़े का पोल नही खुलता। कार्तिक नामांकन लेने के बाद हॉस्टल में रहना चाहता था, लेकिन हॉस्टल में उसे जगह नहीं मिली। इससे नाराज होकर कार्तिक ने अपने साथियों से मिलकर कॉलेज में जमकर बवाल काटा। कॉलेज कर्मियों ने हंगामे को शांत करवाने की पूरी कोशिश की। मामला कॉलेज के प्राचार्य तक पहुंचा।
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छात्रों ने प्राचार्य के साथ भी दुर्व्यवहार किया। इससे नाराज होकर प्राचार्य ने दिव्यांगता प्रमाण पत्र जांच करानी शुरू कर दी। जांच में दिव्यांगता के सभी सात प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए। जब यह मामला छात्रों के बीच पहुंचा तो फर्जीवाड़ा करने वाले सभी छात्र छात्रावास छोड़कर फरार हो गए। प्राचार्य ने स्वास्थ्य विभाग के निदेशक को पत्र लिखकर इन छात्रों के खिलाफ विधिसम्मत कारवाई करने की अनुमति मांगी है। मेडिकल कॉलेज के सूत्र बताते हैं कि यह धंधा देश स्तर पर एक संगठित गिरोह द्वारा किया जा रहा है। देश के अन्य मेडिकल कॉलेजों में भी यदि जांच हुई तो, एक बड़े जालसाज गिरोह का भंडाफोड़ हो जाएगा।