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विधानसभा में नीतीश समझते हैं बच्चा, अब राज्यसभा जाएंगे तेजस्वी यादव?

बिहार विधानसभा में तेजस्वी यादव और नीतीश कुमार के बीच अक्सर टकराव होता है। CM नीतीश कुमार, कई बार उन्हें याद दिला चुके हैं कि वह, उनके बच्चे की तरह हैं।

Tejashwi Yadav

राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव। Photo Credit: PTI

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बिहार में राज्यसभा चुनाव से पहले बड़ा राजनीतिक मोड़ आया है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने रविवार को औपचारिक रूप से चुनाव में उतरने का फैसला किया है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने तेजस्वी यादव को सही उम्मीदवार चुनाव में उतारने का अधिकार दिया है। अब तेजस्वी यादव खुद राज्यसभा चुनाव में उतर सकते हैं। विधानसभा में नेता विपक्ष होने के बाद भी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार उनसे अक्सर उलझते हैं। 

बिहार विधानसभा की 243 सदस्यीय सदन में 5 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव होने हैं, जहां हर उम्मीदवार को जीत के लिए कम से कम 41 वोट चाहिए। एनडीए ने हालिया चुनाव में 202 सीटें जीती हैं। यह गठबंधन 4 सीटें आसानी से हासिल कर सकता है, लेकिन पांचवीं सीट के लिए उसे तीन क्रॉस वोट की जरूरत होगी। आरजेडी के इस फैसले ने मुकाबले में नई चुनौती और अनिश्चितता पैदा कर दी है।

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अभी क्या समीकरण बन रहे हैं?

आरजेडी के पास विधानसभा में 25 विधायक हैं, जबकि विपक्षी महागठबंधन के पास कुल मिलाकर 41 सीटें हैं। इसके लिए भी तेजस्वी यादव को जोड़-तोड़ करनी पड़ सकती है। वजह यह है कि कांग्रेस 6, सीपीआई-एमएल 2, सीपीआई-एम 1, आईआईपी 1, AIMIM के पास 5 और बहुजन समाज पार्टी 1 विधायक हैं। कुल मिलाकर 41 वोट हो रहे हैं।

असदुद्दीन ओवैसी, विपक्ष का हिस्सा नहीं हैं। तेजस्वी यादव अगर राज्यसभा आना चाहते हैं तो उन्हें असदुद्दीन ओवैसी के समर्थन की जरूरत पड़ेगी। AIMIM ने अपना अलग उम्मीदवार उतारने का फैसला किया है।  BSP नीतीश कुमार को अतीत में समर्थन दे चुकी है। 

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BSP और AIMIM का फैसला होगा निर्णायक

BSP और AIMIM दोनों दल इंडिया गठबंधन और महागठबंधन से बाहर रहे और हालिया विधानसभा चुनाव स्वतंत्र लड़कर आए। राजनीतिक हलकों में तेजस्वी यादव खुद उम्मीदवार बनने की अटकलें जोरों पर हैं। हालांकि पार्टी नेता इस पर आधिकारिक रूप से चुप्पी साधे हुए हैं और अंतिम फैसले पर सस्पेंस बरकरार है। 

RJD क्यों  यह दांव चल रही है?

RJD ने राज्यसभा चुनाव में उतरने का ऐलान कर दिया है। पार्टी की संसदीय बोर्ड की बैठक में लालू प्रसाद और तेजस्वी यादव को उम्मीदवार चुनने की जिम्मेदारी सौंपी गई। यह फैसला एनडीए की सभी पांच सीटें जीतने की योजना पर ग्रहण लगा सकता है।

किसकी दावेदारी कितनी मजबूत है?

विधानसभा में एनडीए के 202 विधायक हैं। संख्या बल की वजह से यह गठबंधन, चार सीटें आसानी से जीत सकता है। पांचवीं सीट के लिए आरजेडी को पूरे विपक्ष के 41 वोट चाहिए। AIMIM और BSP की भूमिका निर्णायक है। दोनों दल, अलग-अलग रुख अपना रहे हैं।

 

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तेजस्वी चुनावी मैदान में उतर सकते हैं

तेजस्वी यादव खुद राज्यसभा के लिए चुनावी मैदान में उतर सकते हैं। पार्टी के नेता अभी चुप हैं। आधिकारिक तौर पर इसके एलान का इंतजार है। 

क्यों चुनावी मैदान में उतरे हैं?

तेजस्वी यादव के राज्यसभा आने की चर्चाओं के पीछे की एक वजह यह है कि वह अब पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व देना चाह रहे है। बिहार में नीतीश के साथ उनके व्यक्तिगत रिश्ते रहे हैं, जिसकी दुहाई वह अक्सर देते हैं। कई बार विधानसभा में तेजस्वी यादव, नीतीश कुमार से असहज कर जाते है। 

बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता के तौर पर वह अपनी जड़ें मजबूत कर चुके हैं। बिहार की राजनीति में सीट शेयरिंग और सहयोगियों के साथ तालमेल बिठाने के लिए भी जैसे समीकरण बन रहे हैं, उसमें तेजस्वी यादव अगर खुद उतरें, तभी संभावनाएं बन सकती हैं। तेजस्वी यादव, यह मौका नहीं गंवाना चाहते हैं। 

बच्चा वाला एंगल क्या है?

हाल ही में बिहार विधानसभा का बजट सत्र गुजरा है। इसी बजट सत्र में चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने तेजस्वी यादव की जमकर आलोचना ही। उन्होंने जो कहा, उस पर विधानसभा में खूब हंगामा बरपा।

नीतीश कुमार, मुख्यमंत्री, बिहार:-
 'चुपचाप सुनो, बीच में मत बोलो। यह बच्चा है। इसका बाप मेरे समय का था। इसका बाप हटा, तो इसकी मां को सीएम बनाया। छह विधायक को खींचने के लिए पैसे कहां से लाया था? गड़बड़ करता था, उसी से ये सब पैसे लाता था।'

नीतीश कुमार, एक जमाने में लालू यादव के दोस्त रहे हैं। तेजस्वी यादव, उन्हें चाचा बुलाते रहे हैं। हो सकता है कि बिहार विधानसभा में तेजस्वी यादव, अपनी जिम्मेदारी किसी सीनियर नेता को सौंपे जो नीतीश कुमार का जवाब दे सकें। राज्यसभा में आने से उनकी पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती मिलेगी। 

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