बिहार के सुपौल जिले के राघोपुर प्रखंड के सिमराही बाजार में चल रहे एक अवैध नशा मुक्ति केंद्र का रविवार शाम खुलासा हुआ। बिना वैध कागजात और लाइसेंस के चल रहे इस केंद्र में 70 मरीज बेहद अस्वच्छ और दयनीय स्थिति में भर्ती मिले। बीरपुर SDM विनय कुमार, राघोपुर रेफरल अस्पताल प्रभारी डॉ. दीपनारायण राम और राघोपुर थानाध्यक्ष अमित कुमार ने रविवार शाम औचक निरीक्षण किया तो केंद्र की स्थिति सामने आई। केंद्र के पास न तो कोई वैध लाइसेंस था, न डॉक्टरों की टीम और न ही इलाज की कोई सुविधा। छोटे-छोटे कमरों में मरीजों को ठूंस-ठूंस कर रखा गया था। अधिकारियों ने संचालकों को सोमवार शाम तक सभी मरीजों को उनके घर पहुंचाने का निर्देश दिया है। इसके बाद केंद्र के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
बता दें कि सिमराही बाजार में यह नशा मुक्ति केंद्र लंबे समय से चल रहा था। स्थानीय लोगों की शिकायत थी कि यहां मरीजों के साथ दुर्व्यवहार किया जाता है और अवैध रूप से पैसे वसूले जाते हैं। कई बार परिजनों ने भी शिकायत की थी कि उनके मरीजों को ठीक से खाना तक नहीं दिया जाता। इसी शिकायत पर रविवार को प्रशासन ने औचक छापेमारी की।
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70 मरीज बदहाल हालत में मिले
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने देखा कि केंद्र में 70 मरीज भर्ती हैं। सभी मरीज बेहद अस्वच्छ और दयनीय स्थिति में मिले। छोटे-छोटे कमरों में 10-10 मरीजों को रखा गया था। जमीन पर गंदी चादरें बिछी थीं और उसी पर मरीज पड़े थे। कमरों में बदबू आ रही थी। शौचालय में गंदगी का अंबार लगा था। पीने के पानी की भी कोई व्यवस्था नहीं थी। खाने के नाम पर सिर्फ दाल-भात दिया जा रहा था वो भी खराब क्वालिटी का।
सबसे बड़ी बात यह कि केंद्र में न तो कोई योग्य डॉक्टर था, न नर्स और न ही दवाओं का कोई स्टॉक। सिर्फ दो-तीन अप्रशिक्षित लड़के मरीजों की देखभाल कर रहे थे। मरीजों को नशा छुड़ाने के नाम पर बंद करके रखा गया था और परिजनों से हर महीने 10 से 15 हजार रुपये लिए जा रहे थे। कुछ मरीजों ने बताया कि उन्हें घर जाने भी नहीं दिया जाता और उनके साथ मारपीट भी की जाती है। कई मरीज मानसिक रूप से परेशान दिखे।
SDM विनय कुमार ने जब संचालक से लाइसेंस और कागजात मांगे तो वह कोई कागज नहीं दिखा पाया। न स्वास्थ्य विभाग का लाइसेंस था, न नगर पंचायत की NOC और न ही फायर सेफ्टी का सर्टिफिकेट। पूरा केंद्र बिना जरूरी कागजात के चल रहा था।
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सुपौल के दूसरे नशा मुक्ति केंद्रों की भी जांच
बीरपुर SDM ने बताया कि सूचना मिली थी कि सिमराही में एक नशा मुक्ति केंद्र अवैध रूप से चल रहा है। रविवार शाम औचक निरीक्षण किया गया तो केंद्र बिना वैध कागजात और लाइसेंस के संचालित मिला। यहां 70 मरीज बेहद अस्वच्छ और दयनीय स्थिति में भर्ती पाए गए। उन्होंने कहा कि नशा मुक्ति के नाम पर लोगों की मजबूरी का फायदा उठाया जा रहा था। संचालकों को सोमवार शाम तक सभी मरीजों को उनके परिजनों के पास सुरक्षित पहुंचाने का निर्देश दिया गया है। इसके बाद केंद्र को सील कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
राघोपुर रेफरल अस्पताल प्रभारी डॉ. दीपनारायण राम ने बताया कि केंद्र की स्थिति देखकर झटका लगा। मरीजों को जिस हालत में रखा गया था वह इलाज के लायक नहीं थी। कई मरीज कुपोषित दिखे और कई के शरीर पर चोट के निशान थे। यहां इलाज के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति हो रही थी। उन्होंने कहा कि केंद्र पूरी तरह अवैध है। सभी मरीजों की सूची बनाई गई है और उनकी स्वास्थ्य जांच की जाएगी। थानाध्यक्ष अमित कुमार ने कहा कि केंद्र के संचालकों से पूछताछ की जा रही है। यदि परिजनों की ओर से शिकायत मिलती है तो FIR दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस नजर बनाए हुए है।
सुपौल जिले में इस तरह के कई अवैध नशा मुक्ति केंद्र चल रहे हैं। सिमराही, राघोपुर, बीरपुर और सुपौल शहर में बिना लाइसेंस के कई केंद्र खुले हुए हैं। आरोप है कि यहां नशा छुड़ाने के नाम पर मरीजों से मोटी रकम वसूली जाती है और उन्हें बंद करके रखा जाता है। कई केंद्रों में मारपीट और यातना की भी शिकायतें सामने आई हैं। रविवार की कार्रवाई के बाद प्रशासन ने जिले के सभी नशा मुक्ति केंद्रों की जांच के निर्देश दिए हैं। स्वास्थ्य विभाग भी सभी केंद्रों के लाइसेंस की जांच करेगा। स्थानीय लोगों ने प्रशासन की कार्रवाई की सराहना की है और ऐसे अवैध केंद्रों पर कार्रवाई की मांग की है ताकि गरीब और मजबूर लोगों को ठगा न जा सके।