बिहार में जल्द ही दो दिवसीय हिन्दी साहित्य समागम आयोजित किया जाएगा। मुख्यमंत्री
सम्राट चौधरी
ने इसके आयोजन का निर्देश दिया है। इस समागम में देशभर के प्रमुख हिन्दी साहित्यकारों, रचनाकारों, कवियों और विद्वानों को आमंत्रित किया जाएगा। कार्यक्रम का उद्देश्य हिन्दी साहित्य और संस्कृति को बढ़ावा देना है। मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को आयोजन की तैयारी समय पर पूरी करने के निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री हिन्दी दिवस के मौके पर नेहरू पथ स्थित बिहार राज्य अभिलेख भवन सभागार में आयोजित हिन्दी दिवस समारोह-सह-कवि सम्मेलन में शामिल हुए। कार्यक्रम का आयोजन मंत्रिमंडल सचिवालय (राजभाषा) विभाग की ओर से किया गया था। उन्होंने दीप जलाकर कार्यक्रम का उद्घाटन किया। इस मौके पर उन्होंने प्रदेशवासियों को हिन्दी दिवस की बधाई और शुभकामनाएं दीं।
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हिन्दी को दुनिया तक पहुंचाने पर जोर
समारोह में मुख्यमंत्री ने कहा, 'हिन्दी सिर्फ बातचीत की भाषा नहीं है बल्कि यह हमारी पहचान, संस्कृति, सभ्यता और साहित्यिक परंपरा का हिस्सा है। हिन्दी के गौरव को समझते हुए इसके प्रचार-प्रसार के लिए लगातार काम करना चाहिए। हिन्दी दुनिया में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली भाषाओं में से एक है और दुनिया में तीसरी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है। यह हमारे सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है।'
मुख्यमंत्री ने कहा, 'हिन्दी साहित्य को समृद्ध बनाने में बिहार के कई महान साहित्यकारों का बड़ा योगदान रहा है। मिथिला के कोकिल विद्यापति, राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर और जनकवि नागार्जुन ने अपनी रचनाओं से हिन्दी साहित्य को नई ऊंचाई दी और समाज को नई दिशा दिखाई।' उन्होंने इन सभी महान साहित्यकारों को नमन किया। मुख्यमंत्री ने कहा, 'अब जरूरत है कि अपनी भाषा, संस्कृति और सभ्यता की पहचान को देश से बाहर दुनिया तक पहुंचाया जाए।'
CM ने अटल और मोदी का जताया आभार
मुख्यमंत्री ने हिन्दी को दुनिया में पहचान दिलाने में देश के नेताओं के योगदान को भी याद किया। उन्होंने कहा, 'पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने संयुक्त राष्ट्र के मंच से हिन्दी में भाषण देकर हिन्दी को अंतरराष्ट्रीय मंच पर सम्मान दिलाया था। यह हर भारतीय के लिए गर्व की बात है। प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी
भी अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय मंचों पर हिन्दी में भारत की बात दुनिया के सामने रखते हैं।' ब्रिक्स जैसे महत्वपूर्ण मंच पर हिन्दी में भारत का पक्ष रखने के लिए मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री का आभार जताया।
मुख्यमंत्री ने कहा, 'हिन्दी दिवस हमें अपनी भाषा पर गर्व करने के साथ उसकी जिम्मेदारी भी याद दिलाता है। हिन्दी को सिर्फ सरकारी कार्यक्रमों या एक दिन तक सीमित नहीं रखना चाहिए। इसका इस्तेमाल रोजमर्रा की जिंदगी, बातचीत और कामकाज में ज्यादा से ज्यादा होना चाहिए। भाषा तभी मजबूत होती है जब समाज के हर वर्ग के लोग उसका आसानी से इस्तेमाल करें।'
मुख्यमंत्री ने राज्य के लोगों से हिन्दी के प्रति गर्व की भावना मजबूत करने और अपने जीवन में हिन्दी का ज्यादा इस्तेमाल करने की अपील की। उन्होंने कहा,' अपनी भाषा, संस्कृति और सभ्यता की पहचान मजबूत करके ही भारत की समृद्ध विरासत को दुनिया के सामने और बेहतर तरीके से रखा जा सकता है। आज नई तकनीक के जरिए भी हिन्दी का प्रचार-प्रसार किया जा सकता है।'
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बाढ़ का स्थायी समाधान किया जाएगा
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने बिहार में बाढ़ की स्थिति का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, 'बिहार में बाढ़ की समस्या के स्थायी समाधान के लिए राज्य सरकार गंभीरता से काम कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ब्रिक्स जैसे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में व्यस्त रहने के बावजूद बिहार में बाढ़ की स्थिति को लेकर संवेदनशील रहे। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में केंद्रीय टीम बिहार आएगी और बाढ़ से हुई स्थिति और नुकसान का आकलन करेगी।' मुख्यमंत्री ने इस पहल के लिए प्रधानमंत्री का आभार जताया।
उन्होंने कहा, 'बिहार की नदियां राज्य के जीवन और अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार हैं। इसलिए नदियों को जोड़ने के साथ उन्हें बचाना भी जरूरी है। नदी तंत्र को बचाने, पानी के बेहतर इस्तेमाल और बाढ़ पर रोक के लिए लंबे समय की योजना के साथ काम किया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि बाढ़ से होने वाले जान-माल के नुकसान को कम किया जाए और इस समस्या का स्थायी और प्रभावी समाधान निकाला जाए।'