संजय सिंह, पटना, बिहार के परिवहन मंत्री श्रवण कुमार ने परिवहन विभाग के अधिकारियों को जुगाड़ गाड़ी के परिचालन पर नकेल लगाने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा है कि जिस क्षेत्र में इस गाड़ी का परिचालन होगा, वहां के परिवहन पदाधिकारी इसके लिए जिम्मेवार होंगे। इस गाड़ी का इस्तेमाल अब कई जगहों पर बालू तस्करी के लिए हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट ने भी इसके परिचालन पर रोक लगाने का आदेश दिया है। इस गाड़ी को चलाने से पर्यावरण पर भी असर पड़ता है। मंत्री के इस आदेश से जुगाड़ गाड़ी के संचालकों और परिवहन विभाग के अधिकारियों में हड़कंप मच गया है।
जुगाड़ गाड़ी की शुरुआत पश्चिम बंगाल से हुई थी। इस गाड़ी से ग्रामीण इलाकों में सामान ढोया जाता था लेकिन धीरे धीरे लोगों ने इस गाड़ी से व्यवसाय शुरू कर दिया। कई जगहों पर तो इससे यात्री ढोए जाते हैं। खनन विभाग की कड़ाई के बाद बालू तस्करों ने ट्रैक्टर को छोड़कर इसी गाड़ी का इस्तेमाल करना चालू कर दिया है। गैर कानूनी कामों में इस गाड़ी का इस्तेमाल किया जा रहा है और सुप्रीम कोर्ट पहले ही इन गाड़ियों पर रोक लगा चुका है। ऐसे में अब परिवहन मंत्री ने भी इन पर रोक लगाने के सख्त आदेश दे दिए हैं।
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2 लाख से ज्यादा जुगाड़ गाड़ी
इस गाड़ी के निर्माण में डीजल पंप से, मोटरसाइकिल का हैंडल, माल ढोने वाले ठेले का बॉडी के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। इस गाड़ी को सड़कों पर दौड़ाने के लिए ना तो रजिस्ट्रेशन की जरूरत पड़ती है और ना ही परमिट की। बीमा, फिटनस और प्रदूषण प्रमाण पत्र का तो कोई मतलब ही नही है। दुर्घटना होने पर मुआवजा का भी प्रावधान नही है। पूरे प्रदेश में ऐसे गाड़ियों की संख्या दो लाख से ज्यादा है। पुलिस और परिवहन विभाग के अधिकारियों के सांठगांठ से यह गाड़ियां शहरी एवं ग्रामीण इलाकों में धड़ल्ले से चल रही हैं।
शो रुम खोलकर बेची जा रही गाड़ियां
प्रतिबंध के बावजूद राज्य के कई जिलों में लोगों ने इस गाड़ी को बेचने के लिए शो रुम खोल रखा है। पांच साल पहले इस गाड़ी का कीमत 55 हजार रुपये थी। जब बालू तस्करी में इस गाड़ी का धडल्ले से इस्तेमाल होना शुरू हुआ तो, अब इसकी कीमत लगभग एक लाख रुपये कर दी गई है। एक ट्रैक्टर पर लगभग 100 क्यूबिक फीट यानी सीएफटी बालू लादा जाता है।
ट्रैक्टर के पकड़े जाने पर 80 हजार रुपये जुर्माना के रूप में वसूला जाता है। एक जुगाड़ गाड़ी पर भी 100 सीएफटी बालू आता है। इस गाड़ी पर जुर्माना लगाने का कोई प्रावधान नही है। कोई टैक्स चुकाने की भी जरूरत नही है। परिणामस्वरूप अधिकांश बालू तस्करों ने इसी गाड़ी का इस्तेमाल करना शुरु कर दिया है। इसको चलाने के लिए ड्राइविंग लाइसेंस की भी जरूरत नही है।
क्या बोले मंत्री?
मंत्री श्रवण कुमार का कहना है कि यह मामला जनहित और न्यायालय से जुड़ा है। इस कारण प्राथमिकता के आधार पर इसके परिचालन पर रोक लगाना जरूरी है। इसमें कोताही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नही की जाएगी। कुछ लोग रोजगार होने का हवाला देते हैं। जिनको जरूरत है उन्हें मुख्यमंत्री प्रखंड परिवहन और ग्राम परिवहन योजना का लाभ दिया जाएगा। बशर्ते इसके लिए उन्हें आवेदन करना होगा। देखना होगा कि मंत्री का यह आदेश अधिकारियों के लिए कितना मायने रखता है।