संजय सिंह, पटना। पिछले वर्ष 15 दिसंबर को बिहार में हिजाब विवाद शुरू हुआ था। करीब 23 दिनों बाद डॉक्टर नुसरत परवीन ने नौकरी ज्वाइन कर ली है। इसके साथ ही हिजाब विवाद का अंत हो गया। मगर अब ऑल इंडिया ज्वैलर्स एंड गोल्ड फेडरेशन के एक आदेश से प्रदेश की सियासत गरमा गई। फेडरेशन ने अपने आदेश में कहा कि बुर्का, हिजाब या नकाबपोश लोगों को ज्वैलरी शॉप पर प्रवेश नहीं मिलेगा। आरजेडी ने इस फैसले का विरोध किया और इसे वापस लेने की मांग की। उधर, बीजेपी ने सुरक्षा के लिहाज से इसे जरूरी कदम बताया।
दरअसल, पिछले साल 15 दिसंबर को पटना में मुख्यमंत्री सचिवालय में नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया था। मंच पर ही सीएम नीतीश कुमार ने महिला डॉक्टर के चेहरे से हिजाब हटा दिया था। घटना का वीडियो वायरल होने के बाद मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर तक फैल गया। पाकिस्तान के एक मुख्यमंत्री ने नीतीश कुमार को धमकी दी और कई संगठनों ने खूब हंगामा किया।
विवाद के बाद महिला डॉक्टर नुसरत परवीन ने नौकरी ज्वाइन करने से मना कर दिया था। सरकार को कई बार ज्वाइनिंग डेट बढ़ानी पड़ी। हालांकि 7 जनवरी को डॉक्टर नुसरत परवीन ने पटना के सिविल सर्जन डॉक्टर अविनाश कुमार के कार्यालय में नौकरी ज्वाइन कर विवाद का अंत कर दिया।
पुराने हिजाब विवाद का अंत हो गया। मगर एक नया हंगामा शुरू हो गया। हाल ही में पटना, आरा, पूर्णिया और हाजीपुर में नकाबपोश अपराधियों ने कई ज्वैलरी शोरूम में करोड़ों रुपये की लूट को अंजाम दिया। नकाब पहनने की वजह से पुलिस को भी अपराधियों को पहचानने में दिक्कत होती है।
आरोपी आसानी से वारदात को अंजाम देकर भाग निकलते हैं। अब इन्हीं घटनाओं के बाद ज्वैलर्स एंड गोल्ड फेडरेशन ने हेलमेट, हिजाब, बुर्का, नकाबपोश लोगों का दुकान में प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया है। पूरे बिहार में फेडरेशन के फैसले को 7 जनवरी को लागू कर दिया गया है। अब इस फैसले के बाद प्रदेश की सियासत तेज हो गई है।
राजद ने की आलोचना
राजद प्रवक्ता एजाज अहमद इस फैसले से नाराज हैं। उनका कहना है कि सुरक्षा के नाम पर एक खास समुदाय के लोगों को टारगेट किया जा रहा है। यह आदेश संवैधानिक परंपरा के खिलाफ है। सुरक्षा के नाम पर यह साजिश रची गई है। इस साजिश के पीछे बीजेपी और आरएसएस का हाथ है। इससे एक खास समुदाय के लोगों की धार्मिक भावना आहत होगी। इस पर दोबारा विचार करने की जरूरत है। अगर ऐसा नहीं किया गया तो राजद आंदोलन का रास्ता अपनाएगी।
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बीजेपी बोली- सुरक्षा के प्रति जरूरी कदम
बीजेपी प्रवक्ता नीरज कुमार का कहना है कि इस आदेश से बीजेपी या आरएसएस का कोई लेना देना नहीं है। राजद बेवजह बीजेपी को बदनाम करना चाहती है। पूरे प्रदेश के लोग इस बात से अवगत हैं कि बिहार में लगातार अपराधियों के निशाने पर आभूषण कारोबारी हैं। सुरक्षा कारणों से इस नियम को लागू किया गया। विरोधी इसे सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश कर रहे हैं।
स्वर्णकार समाज विकास एवं शोध संस्थान के अध्यक्ष अरुण कुमार वर्मा का कहना है कि किसी भी समुदाय की महिला आभूषण खरीदने के लिए जा सकती है। उनका सिर्फ चेहरा दिखना चाहिए। बिना चेहरा दिखाए वे आभूषण को पहनकर पसंद कैसे करेंगी। सुरक्षा को लेकर यह कदम उठाया गया है।