भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) नेता और हैदराबाद से लोकसभा चुनाव लड़ चुकीं कोम्पेला माधवी लता को कर्नाटक के बागलकोट जिले में गणेश शोभायात्रा में शामिल होने से रोक दिया गया है। जानकारी के अनुसार, माधवी लता को बागलकोट में हिंदू महा गणपति विसर्जन कार्यक्रम में बुलाया गया था। बागलकोट जिला प्रशास की ओर से डिप्टी कमिश्नर (DC) संगप्पा ने उनके जिले में प्रवेश पर रोक लगाने का आदेश जारी किया है। इसी को लेकर अब माधवी लता और कर्नाटक प्रशासन के बीच विवाद खड़ा हो गया है।
माधवी लता के मुताबिक, उन्हें बागलकोट में गणेश शोभायात्रा में शामिल होना था लेकिन बुधवार को बागलकोट पुलिस के अधिकारी तेलंगाना पुलिस की मदद से उनके पास पहुंचे और उन्हें एक नोटिस दिया। इस नोटिस में उन्हें बागलकोट में प्रवेश नहीं करने के बारे में बताया गया था। माधवी लता ने कहा कि उन्होंने पुलिस अधिकारियों की ओर से लाए गए कागजों पर सिग्नेचर कर दिए हैं।
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प्रशासन ने क्यों लगाई रोक?
बागलकोट जिला प्रशासन ने 23 सितंबर से 23 अक्टूबर तक माधवी लता के जिले में प्रवेश पर रोक लगाई है। यह आदेश जिला मजिस्ट्रेट की शक्तियों के तहत भारतीय न्याय संहिता यानी BNS की धारा 163 के तहत जारी किया गया है। आदेश में कहा गया है कि इसका पालन करना जरूरी है और उल्लंघन होने पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, बागलकोट के एसपी सिद्धार्थ गोयल ने जिला प्रशासन को पत्र लिखकर माधवी लता के प्रवेश पर रोक लगाने की सिफारिश की थी। इसके बाद डिप्टी कमिश्नर संगप्पा ने आदेश जारी किया। प्रशासन की ओर से कानून-व्यवस्था और शांति भंग होने की आशंका को इसका आधार बताया गया है। पुलिस की रिपोर्ट में माधवी लता के अलग-अलग मौकों पर दिए गए भाषणों का भी जिक्र किया गया है। इनमें एक ऐसा मामला भी शामिल है, जिसमें उन्होंने मस्जिद की तरफ तीर चलाने की नकल की थी।
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माधवी लता ने क्या कहा?
इस विवाद पर अब माधवी लता ने खुद सामने आकर बयान दिया है और प्रशासन के फैसले पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें यह जानकर हैरानी हुई कि गणेश शोभायात्रा के मौके पर बागलकोट जाने से उन्हें रोका जा रहा है। उन्होंने कहा,'एक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते मैंने प्रशासन की ओर से दिए गए नोटिस पर सिग्नेचर कर दिए लेकिन मेरा इन अधिकारियों से एक सवाल है कि तुमने मुझे जिस आधार पर रोका है क्या आपके पास कोई सबूत है कि उस घटना के बाद कोई दंगा हुआ था। मेरा चुनाव सबसे शांतिपूर्ण चुनाव था। क्या मैंने इसके बाद अल्पसंख्यकों के लिए काम करना कर दिया।'