तमिलनाडु में बीजेपी के सामने संकट गहराता जा रहा है। के. अन्नामलाई के इस्तीफे के बाद बीजेपी प्रदेश उपाध्यक्ष कारू नागराजन और प्रदेश सचिव सुमति वेंकटेश ने भी पार्टी का साथ छोड़ दिया है। वहीं 14 पदाधिकारियों के इस्तीफे की बात कही जा रही है। बता दें कि तमिलनाडु बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने शुक्रवार को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दिया। बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन इसे स्वीकार भी कर लिया। मंगलवार को नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ मुलाकात के बाद अन्नामलाई ने यह कदम उठाया है।
अन्नमलाई तमिलनाडु में एक नया सियासी आंदोलन शुरू करेंगे। उनके इस ऐलान के कुछ समय बाद ही कारू नागराजन और सुमति वेंकटेश ने अपना इस्तीफा दिया है। पिछले साल दिसंबर में ही अन्नामलाई ने इस्तीफा देने की इच्छा जताई थी। तब बीजेपी हाईकमान ने विधानसभा चुनाव तक पार्टी में बने रहने की गुजारिश की थी। अब अन्नामलाई अपना अलग दल बनाएंगे। उनका दावा है कि नया सियासी आंदोलन पंथवादी और वंशवादी सियासत को खत्म करने पर केंद्रित होगा।
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पिछले साल ही बीजेपी छोड़ना चाहते थे अन्नामलाई
बीजेपी छोड़ने के बाद अन्नामलाई ने कहा, 'मेरी राय अलग थी। मैं पिछले 18 महीनों से बीजेपी नेताओं के सामने यह बात रख रहा था। मैंने 4 दिसंबर 2025 को पार्टी को बता दिया था कि मैं इस्तीफा देने जा रहा हूं और उन्हें यह नहीं सोचना चाहिए कि मैंने यह फैसला जल्दबाजी में लिया है। पार्टी ने मुझसे कहा कि मैं चुनाव खत्म होने तक इंतजार करूं और उसके बाद जाऊं। एक सच्चे कार्यकर्ता के तौर पर मैंने चुनाव का अपना काम आखिर तक पूरा किया।'
बीजेपी के और नेता भी दे सकते इस्तीफा
कारू नागराजन ने अन्नामलाई की नई सियासी पार्टी में शामिल होने की ख्वाहिश जताई है। वहीं सुमति वेंकटेश ने अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में तमिलनाडु बीजेपी के कई और नेता भी अन्नामलाई के साथ जा सकते हैं। इस बीच अन्नामलाई के समर्थकों में जश्न का माहौल है। लोगों ने मिठाई बांटकर और फटाखे फोड़कर खुशियां मनाई।
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पार्टी को कोई झटका नहीं: प्रदेश अध्यक्ष
उधर, तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन का दावा है कि अन्नामलाई के इस्तीफे से पार्टी को कोई झटका नहीं लगा है। आक्रामक शैली में अपनी बात रखने वाले अन्नामलाई तमिलनाडु में बीजेपी के सबसे लोकप्रिय चेहरे थे। लोकसभा चुनाव में उनकी ही मेहनत का नतीजा था कि पार्टी का वोट शेयर काफी हद तक बढ़ गया था।