logo

मूड

ट्रेंडिंग:

मणिपुर में लापता युवकों के शव मिले, नोनी जिले में तीन की हत्या

मणिपुर में हिंसा की आग अभी तक थमी नहीं है। नोनी जिले में तीन लोगों को गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया गया है। उधर, कांगपोकली जिले में लापता दो युवकों के शव मिले हैं।

Manipur News

मणिपुर में तैनात सुरक्षाबल। फाइल फोटो ( Photo Credit: PTI)

शेयर करें

google_follow_us

संबंधित खबरें

Advertisement

मणिपुर में पिछले पांच दिनों से अगवा कुकी समुदाय के दो लोगों के शवों को बरामद कर लिया गया है। 29 अक्टूबर से कांगपोकली जिले के ताफू कुकी गांव के दो युवक लापता थे। सुरक्षा बल उनकी तलाश में जुटे थे। इसी तलाशी अभियान के दौरान दो शव मिलने से हड़कंप मच गया। 

 

मृतकों की पहचान पाओगिनलाल हंगशिंग (20) और टिंगिनलुन चोंगलोई के तौर पर हुई है। आशंका जताई जा रही है कि हेंगबुंग और ताफौ गांवों के से दोनों को अगवा किया गया है। पुलिस ने एक बयान में बताया कि आज मणिपुर पुलिस, कोबरा, सीआरपीएफ, असम राइफल्स और रैपिड एक्शन फोर्स की संयुक्त टीम ने राष्ट्रीय राजमार्ग-2 के पूर्व में एसपी रोड के आसपास व्यापक तलाशी अभियान चलाया। 

 

यह भी पढ़ें: भीषण कार हादसे में हनी सिंह के भतीजे की मौत, पार्टी से लौटते वक्त हुआ हादसा

 

बताया जा रहा है कि तलाशी अभियान के दौरान दो शव मिले हैं। एसपी रोड एक पहाड़ी मार्ग रास्ता है। यह सेनापति और कांगपोकपी जिलों को आपस में जोड़ता है। 29 अक्टूबर से कमिटी ऑन ट्राइबल यूनिटी ने घटना के विरोध में पूरे कांगपोकपी जिलों को बंद करने का एलान किया था।

 

इस बीच मणिपुर के नोनी जिले में ही फायरिंग में कुकी समुदाय के तीन लोगों की मौत की खबर है। पुलिस के मुताबिक पहाड़ी इलाके में स्थित केकरू नगा गांव में शनिवार सुबह कई घंटों तक फायरिंग चली। इसमें तीन लोगों की मौत हो गई। 

 

कुकी इनपी मणिपुर संगठन ने हत्याकांड की निंदा की और आरोप लगाया कि इन हत्याओं के पीछे नगा उग्रवादी समूहों का हाथ है। संगठन ने न्याय, जवाबदेही और तत्काल कार्रवाई की मांग की है। पुलिस ने दावा किया कि पूरे इलाके में सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं।  

 

यह भी पढ़ें: हिना खान ने बॉयफ्रेंड रॉकी से 15 मिनट में की थी शादी, क्यों लिया था अचानक फैसला?

 

मणिपुर साल 2003 से हिंसा की आग में झुलस रहा है। शुरुआत में हिंसा कुकी और मेतैई के बीच भड़की। अब कुकी और नागा समुदाय के बीच भी हिंसा का दौर जारी हिंसा के कारण करीब 66 लोग बेघर हो गए। 368 से अधिक मौते हैं। जातीय समूहों ने अपने अपने इलाके में दबदबा बना रखा है। एक-दूसरे के खिलाफ में जाते ही हत्या और अपहरण को अंजाम देते हैं। कुछ गुटों का संचालन म्यांमार से हो रहा है।


और पढ़ें