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बीमारी भी नहीं रोक पाई, कैंसर से जूझने वाला बच्चा 10वीं में ले आया 92% नंबर

कैंसर को मात देकर नोएडा के श्रीयांश वत्स ने सीबीएसई 10वीं में 92 परसेंट नंबर हासिल किए हैं। बीमारी और सामाजिक दबाव के बावजूद उन्होंने अपनी जिद से यह शानदार सफलता पाई।

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प्रतीकात्मक तस्वीर, AI Generated Image

उत्तर प्रदेश के नोएडा में रहने वाले श्रीयांश वत्स ने कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से जूझते हुए सीबीएसई 10वीं की परीक्षा में 92 परसेंट नंबर हासिल किए हैं। नोएडा के कैंब्रिज स्कूल के छात्र श्रीयांश का साल 2025 में बोन मैरो ट्रांसप्लांट हुआ था, जिसके बाद उन्होंने कम समय में अपनी पढ़ाई पूरी की और बोर्ड परीक्षा में यह शानदार सफलता प्राप्त की।

 

श्रीयांश के पिता दिग्विजय सिंह ने बताया कि उनके बेटे को साल 2023 में थर्ड स्टेज लिंफोमा हुआ था। इलाज के बाद वह ठीक हो गए थे लेकिन मई 2025 में यह बीमारी दोबारा वापस आ गई। इसके बाद जुलाई 2025 में उनका बोन मैरो ट्रांसप्लांट किया गया, जिसकी रिकवरी में करीब 6 महीने का समय लगा। इलाज के दौरान एक समय ऐसा भी आया था जब श्रीयांश के ब्लड काउंट और प्लेटलेट्स लगभग जीरो हो गए थे और उनकी स्थिति काफी नाजुक बनी हुई थी।

 

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परीक्षा देने की जिद

बीमारी की गंभीरता को देखते हुए रिश्तेदारों और परिवार के सदस्यों ने श्रीयांश के पिता पर दबाव बनाया था कि उसे स्कूल न भेजा जाए और बोर्ड परीक्षा न दिलवाई जाए। लोगों का मानना था कि बीमारी के कारण श्रीयांश परीक्षा का दबाव नहीं झेल पाएगा। हालांकि, श्रीयांश ने खुद परीक्षा देने का फैसला किया और अच्छे नंबर लाने की जिद ठानी। इसके बाद उनके माता-पिता ने उन्हें पूरा सपोर्ट किया और ऑनलाइन कोचिंग के माध्यम से उनकी पढ़ाई जारी रखवाई।

फेल होने के बाद शानदार वापसी

अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद जब श्रीयांश ने स्कूल ज्वाइन किया, तो वह हाफ इयरली परीक्षा में फेल हो गए थे। इसके बाद उन्होंने और उनके पिता ने मिलकर लक्ष्य रखा कि हर अगली परीक्षा में पिछले के मुकाबले 10 नंबर ज्यादा लाने हैं। रात के 2 बजे तक जागकर पढ़ाई करने और स्कूल के शिक्षकों और ऑनलाइन टीचर्स की मदद से उनके प्रदर्शन में लगातार सुधार हुआ, जिसका नतीजा 92 परसेंट नंबर के रूप में सामने आया।

 

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भविष्य का सपना

श्रीयांश ने बताया कि उनके माता-पिता ने पूरी जर्नी में उनका साथ दिया और जब वह देर रात तक पढ़ते थे, तो पूरा परिवार उनके साथ जागता था। हालांकि, उनका टारगेट देशभर में पहला स्थान (AIR-1) हासिल करना था लेकिन वह अपने वर्तमान स्कोर से भी खुश हैं क्योंकि उन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी हार नहीं मानी। श्रीयांश अब आगे चलकर चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) बनना चाहते हैं।

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