चंडीगढ़ नगर निगम में रिश्वतखोरी का एक मामला सामने आया है जिसमें केंद्रीय जांच ब्यूरो (
CBI
) ने बड़ी कार्रवाई की है। सीबीआई ने नगर निगम में तैनात एक सेनेटरी इंस्पेक्टर को 5 लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। आरोपी ने कथित तौर पर एक ठेकेदार से नगर निगम के बिलों को पास कराने के बदले 14 लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी। मामले में सीबीआई ने 7 अक्टूबर को केस दर्ज किया और उसी दिन ट्रैप लगाकर आरोपी को गिरफ्तार किया।
सीबीआई की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, आरोपी सेनेटरी इंस्पेक्टर पर आरोप है कि उसने नगर निगम से जुड़े एक ठेकेदार की फर्म के लंबित और भविष्य के बिलों की प्रोसेसिंग और क्लियरेंस के लिए 14 लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी। आरोप है कि आरोपी ने ठेकेदार को धमकी भी दी कि अगर रिश्वत नहीं दी गई तो उसके बिल रोक दिए जाएंगे और फर्म का टेंडर तक रद्द कराया जा सकता है। यह मामला डंपिंग ग्राउंड पर जेसीबी और अन्य मशीनों के जरिए कचरा उठाने के काम से जुड़े ठेके से संबंधित है।
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रंगे हाथों पकड़ा
शिकायत मिलने के बाद सीबीआई ने मामले की जांच शुरू की। एजेंसी के मुताबिक, शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि के बाद 7 अक्टूबर को ट्रैप लगाकर आरोपी को पकड़ने की कोशिश की गई। इसी दौरान आरोपी सेनेटरी इंस्पेक्टर को 14 लाख रुपये की मांगी गई रिश्वत की पहली किस्त के तौर पर 5 लाख रुपये लेते हुए पकड़ लिया गया। आरोप है कि आरोपी ने ठेकेदार से हर महीने एक लाख रुपये की रकम देने की मांग की थी। ठेकेदार के बिल करीब 10 लाख रुपये महीने के बताए जा रहे हैं। इसी भुगतान प्रक्रिया को लेकर रिश्वत की मांग किए जाने का आरोप है।
CBI ने की रेड
गिरफ्तारी के बाद सीबीआई ने आरोपी के घर और ऑफिस में तलाशी ली। सीबीआई की ओर से मिली जानकारी के अनुसार, तलाशी के दौरान कुछ आपत्तिजनक डॉक्यूमेंट्स और प्रॉपर्टी से जुड़े डॉक्यूमेंट भी बरामद हुए हैं। अब सीबीआई की टीम बरामद किए गए डॉक्यूमेंट्स की जांच कर रही है और पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या आरोपी ने पहले भी रिश्वत ली है। सीबीआई ने बताया कि मामले की जांच अभी जारी है और गिरफ्तार आरोपी को आज यानी 8 अक्टूबर को कोर्ट में पेश किया जाएगा।
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पहले भी हुई गिरफ्तारी
चंडीगढ़ नगर निगम के सैनिटेशन विभाग से जुड़ा रिश्वत का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले अगस्त 2023 में भी सीबीआई ने नगर निगम के दो अधिकारियों को रिश्वत के मामले में गिरफ्तार किया था। उस मामले में चीफ सैनिटेशन इंस्पेक्टर चंद्र मोहन और हेल्थ सुपरवाइजर संदीप धनखड़ पर एक कर्मचारी को दोबारा नौकरी पर रखने के बदले रिश्वत मांगने का आरोप लगा था। अब यह दूसरा मामला सामने आने से एक बार फिर नगर निगम में फैला भ्रष्टाचार चर्चा में है।