पंजाब के मानसा में एंटी ड्रग्स एक्टिविस्ट परविंदर सिंह झोटा की हत्या के बाद से पूरे राज्य में प्रदर्शन हो रहे हैं। गुरुवार को अलग-अलग संगठनों ने पंजाब बंद भी किया। इससे पहले बीते कुछ दिनों में पंजाब में ड्रग्स के खिलाफ आवाज उठाने वालों की परेशानी बढ़ने की खबरें सामने आई हैं। एक ने आत्महत्या कर ली तो दूसरे ने आत्महत्या की कोशिश। आज गुरदासपुर जिले के माड़ी पंवां गांव में बिक्रमजीत सिंह और दो अन्य लोगों पर ड्रग्स के खिलाफ आवाज उठाने के कारण हमला हुआ जिसमें एक की मौत हो गई। अब इन मामलों पर गृह मंत्रालय ने संज्ञान लिया है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने 8 सितंबर 2026 को गुलजार सिंह की आत्महत्या के मामले में पंजाब सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। गुलजार सिंह नशे के आदी एक युवक के पिता थे। गृह मंत्रालय के पत्र में कहा गया है कि आरोप है कि आत्महत्या करने से पहले गुलजार सिंह ने अपने इलाके में सिंथेटिक ड्रग्स की उपलब्धता पर सवाल उठाए थे और पंजाब सरकार के एक मंत्री के सामने सवाल उठाए थे। इसके बाद ग्राम पंचायत और सत्ताधारी पार्टी के नेताओं ने उसे खूब परेशान किया जिसके बाद उसने आत्महत्या कर ली।
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मानसा मामले का संज्ञान
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 13 अक्टूबर 2026 को पंजाब के मानसा में परविंदर सिंह उर्फ झोटा की हत्या के मामले का भी संज्ञान लिया है और पंजाब सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। झोटा पंजाब में नशीले पदार्थों की खुलेआम बिक्री और उनके दुरुपयोग के खिलाफ आवाज उठाते थे और एक मेडिकल की दुकान के मालिक ने उनकी गोली मारकर हत्या कर दी। यह घटना झोटा के फोन के कैमरे में भी कैद हो गई।

गृह मंत्रालय ने पंजाब सरकार से यह भी पूछा है कि नशामुक्त भारत के राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। इसमें एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) का पुनर्गठन और गठन, नशे से जुड़े मामलों में पैसों की जांच अनिवार्य करना, NCORD की बैठकों में लिए गए फैसलों पर कार्रवाई की समीक्षा, NDPS मामलों के लिए विशेष अदालतें बनाना, नोडल अधिकारियों की नियुक्ति और अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई जैसे कदम शामिल हैं। इन सभी पर सरकार से रिपोर्ट तलब की गई है।
गुरदासपुर में मर्डर
मानसा के बाद आज पंजाब के ही गुरदासपुर जिले से भी एक इसी तरह का मामला सामने आया है। गुरदासपुर जिले के माड़ी पंवां गांव में बिक्रमजीत सिंह और दो अन्य लोगों, निशान सिंह और गुरमुख सिंह पर हमला किया गया। यह हमला कथित तौर पर ड्रग्स बेचने का विरोध करने पर किया गया। इस हमले में बिक्रमजीत सिंह की मौत हो गई है जबकि निशान सिंह और गुरमुख सिंह गंभीर रूप से घायल हैं। इस मामले पर भी केंद्रीय गृह मंत्रालय ने रिपोर्ट तलब की है।
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घिरती जा रही सरकार
पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार है और नशे के मामले पर राज्य सरकार बैकफुट पर नजर आ रही है। सरकार के अंदर से ही आवजें उठ रही हैं। विधानसभा स्पीकर कुलतार सिंह खुद स्वीकार कर चुके हैं कि नशा खत्म करने के मामले में सरकार असफल रही है। गुलजार सिंह के मामले ने पूरे पंजाब में चर्चा शुरू कर दी। आए दिन नशे के कारण नौजवानों की मौत हो रही हैं और पंजाब की स्थिति भयानक होती जा रही है।
तीन महीने में नशा खत्म करने का वादा करने वाली भगवंत मान सरकार तमाम कोशिशों के बावजूद नशे पर काबू नहीं कर पाई। आज अमित शाह ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए पंजाब सरकार को घेरा था, जिसके बाद
अरविंद केजरीवाल
और भगवंत मान ने गुजरात में ड्रग्स और बॉर्डर पार से आने वाली ड्रग्स का मुद्दा उठाया था।