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हिमाचल में 366 मौतें, 3412 करोड़ का नुकसान, केंद्रीय टीम करेगी तबाही का आंकलन

हिमाचल प्रदेश में मानसून से हुई तबाही का आकलन करने के लिए केंद्र की विशेष टीम हिमाचल पहुंच गई है। प्रदेश में इस बार 366 मौतें दर्ज हुई हैं, जबकि ₹3412 करोड़ के नुकसान का अनुमान है।

हिमाचल प्रदेश में भूस्खलन से बाधित सड़क, Photo Credit- File Photo

हिमाचल प्रदेश में भूस्खलन से बाधित सड़क, Photo Credit- File Photo

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हिमाचल प्रदेश में इस मानसून प्राकृतिक आपदाओं से हुई भारी तबाही के बाद अब केंद्र सरकार की नजर नुकसान के जमीनी आकलन पर है। प्रदेश में 366 लोगों की मौत और करीब 3412.80 करोड़ रुपये के नुकसान के बाद अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय टीम सोमवार से हिमाचल के चार दिवसीय दौरे पर पहुंची है। टीम आपदा प्रभावित क्षेत्रों का मौके पर निरीक्षण कर नुकसान का जायजा लेगी। इसके आधार पर केंद्र से मिलने वाली राहत और आर्थिक सहायता को लेकर आगे की प्रक्रिया तय होगी।

 

केंद्रीय टीम 28 सितंबर से 1 अक्तूबर तक प्रदेश के विभिन्न जिलों का दौरा करेगी। टीम का नेतृत्व गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव एम रामचंद्रुडू कर रहे हैं। इसमें जल शक्ति, ग्रामीण विकास, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग और वित्त मंत्रालय के अधिकारियों के अलावा इसरो के नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर के विशेषज्ञ भी शामिल हैं।

12 जिलों में हजारों करोड़ की तबाही

प्रदेश सरकार के आकलन के अनुसार मानसून के दौरान बादल फटने, अचानक आई बाढ़, भूस्खलन और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से प्रदेश के 12 जिलों में 3412.80 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। सबसे ज्यादा नुकसान सड़क और पुलों को हुआ है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक सड़क एवं पुल क्षेत्र में करीब 2531.84 करोड़ रुपये का नुकसान आंका गया है। आपदा की वजह से प्रदेश में लगभग 6215 किलोमीटर सड़कें प्रभावित हुई हैं। कई स्थानों पर सड़कें पूरी तरह बह गईं, जबकि अनेक मार्गों पर भूस्खलन और डंगे गिरने से यातायात बाधित हुआ।

जल शक्ति विभाग की योजनाओं को भी बड़ा नुकसान

आपदा से जल शक्ति विभाग की पेयजल और अन्य योजनाएं भी बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। प्रदेश में करीब 4784 पेयजल योजनाओं को नुकसान पहुंचा है। विभाग को लगभग 385 करोड़ रुपये के नुकसान का आकलन किया गया है। कई ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में पाइपलाइनें बहने और जल स्रोतों के प्रभावित होने से लोगों को पेयजल संकट का सामना करना पड़ा। केंद्रीय टीम इन क्षेत्रों में हुए नुकसान का भी मौके पर जायजा लेगी। इस मानसून प्राकृतिक आपदाओं ने प्रदेश में बड़ी मानवीय त्रासदी पैदा की है। अब तक 366 लोगों की मौत की सूचना है, जबकि 614 लोग घायल हुए हैं। चार लोग अभी भी लापता बताए गए हैं। आपदा की चपेट में आने से 579 मवेशियों की भी मौत हुई है। इसके अलावा 144 मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं, जबकि 526 मकानों को आंशिक नुकसान पहुंचा है।

 

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इन क्षेत्रों में जाएगी केंद्रीय टीम

केंद्रीय टीम को नुकसान का जमीनी आकलन करने के लिए प्रभावित क्षेत्रों का विस्तृत दौरा कराया जाएगा। प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार टीम चंबा के भटियात और चुवाड़ी, कांगड़ा के बोह, कुल्लू-मंडी के सैंज और बंजार सहित अन्य प्रभावित क्षेत्रों में जाएगी। टीम शिमला, कसौली और परवाणू में भी आपदा से हुए नुकसान का जायजा लेगी। अलग-अलग विभागों के अधिकारी केंद्रीय टीम को मौके पर हुए नुकसान, राहत कार्यों और पुनर्निर्माण की जरूरतों की जानकारी देंगे।

केंद्रीय टीम खुद करगी दौरा

28 सितंबर को टीम चंबा और कांगड़ा के प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करेगी। 29 सितंबर को कांगड़ा और कुल्लू, 30 सितंबर को कुल्लू तथा 1 अक्तूबर को शिमला और सोलन में नुकसान का जायजा लेने का कार्यक्रम है। केंद्रीय टीम के दौरे को इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि राज्य सरकार द्वारा भेजे गए नुकसान के आकलन के बाद अब केंद्र की टीम स्वयं प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति देखेगी।

 

टीम की रिपोर्ट में दर्ज नुकसान और जरूरतों के आधार पर केंद्रीय सहायता को लेकर आगे निर्णय लिया जा सकता है। राज्य सरकार ने मानसून में हुए नुकसान का विस्तृत आकलन केंद्र सरकार को भेजा है और प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्निर्माण तथा राहत कार्यों के लिए केंद्रीय सहायता की मांग की है। अब सभी की नजर केंद्रीय टीम के निरीक्षण और उसके बाद तैयार होने वाली रिपोर्ट पर है।


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