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स्पीति की दो रणनीतिक सड़कों को केंद्र की बड़ी प्राथमिकता, क्या होगा बदलाव?

हिमाचल के शीत मरुस्थल स्पीति घाटी की दो रणनीतिक सड़कों को केंद्र की बड़ी प्राथमिकता में शामिल किया गया है। सुमदो-क्योटो-कोरजोक सड़क को Priority-1 में डाला गया है। विधायक अनुराधा राणा को इसका श्रेय जाता है।

Spiti Valley

लाहौल स्पीती की विधायक अनुराधा राणा और केंद्र कि नोटिफिकेशन, Photo Credit-Social Media

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लाहौल-स्पीति के दुर्गम और सीमावर्ती स्पीति क्षेत्र से सड़क संपर्क को लेकर अहम जानकारी सामने आई है। केंद्र सरकार और रक्षा मंत्रालय के स्तर पर स्पीति से जुड़ी दो महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं को रणनीतिक प्राथमिकता दिए जाने की जानकारी है। इनमें सुमदो-क्योटो-कोरजोक मार्ग को प्राथमिकता-एक और वांगतु-मुध-अत्तरगू मार्ग को प्राथमिकता-दो में शामिल किए जाने की बात कही गई है।

 

इस जानकारी के सामने आने के बाद लाहौल-स्पीति की विधायक अनुराधा राणा ने क्षेत्रवासियों को बधाई दी है। उनके अनुसार इन दोनों मार्गों का निर्माण क्षेत्र के विकास के साथ-साथ सामरिक और आपदा प्रबंधन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण होगा।

कोरजोक तक पहुंचेगा वैकल्पिक सड़क संपर्क

सुमदो-क्योटो-कोरजोक मार्ग स्पीति को लद्दाख के कोरजोक क्षेत्र से जोड़ने वाली प्रस्तावित महत्वपूर्ण सड़क परियोजना है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इसकी लंबाई करीब 100 किलोमीटर बताई गई है।

 

यह मार्ग त्सोमोरीरी झील के समीप स्थित कोरजोक क्षेत्र तक संपर्क उपलब्ध कराने के साथ लद्दाख के लिए एक वैकल्पिक सड़क संपर्क विकसित करने में भूमिका निभा सकता है। सीमावर्ती और अत्यधिक ऊंचाई वाले इलाकों तक पहुंच के लिहाज से इस मार्ग को रणनीतिक महत्व का माना जा रहा है।

शिमला-काजा दूरी में करीब 100 KM की कमी

दूसरी महत्वपूर्ण परियोजना वांगतु-मुध-अत्तरगू सड़क है। यह मार्ग किन्नौर और लाहौल-स्पीति के बीच संपर्क को मजबूत करने वाला प्रस्तावित मार्ग है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक यह सड़क अत्तरगू, सगनम और मुध होते हुए भावा क्षेत्र को जोड़ सकती है। मार्ग का एक हिस्सा करीब 4,865 मीटर की ऊंचाई वाले क्षेत्र से गुजरने की बात कही गई है। परियोजना के पूरा होने पर शिमला से काजा की दूरी करीब 100 किलोमीटर तक कम होने की उम्मीद जताई गई है। लंबे समय से प्रस्तावित इस सड़क को रणनीतिक प्राथमिकता मिलने की जानकारी से क्षेत्र में सड़क संपर्क को लेकर उम्मीद बढ़ी है। 

 

स्पीति जैसे दुर्गम और सीमावर्ती क्षेत्र में सड़क संपर्क का महत्व सामान्य यातायात से कहीं अधिक है। बेहतर सड़क नेटवर्क से स्थानीय लोगों की आवाजाही आसान होने के साथ आपदा के समय राहत एवं बचाव, प्रशासनिक पहुंच और आवश्यक सेवाओं की आपूर्ति को भी मजबूती मिल सकती है। उच्च हिमालयी क्षेत्र में भारी बर्फबारी और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण सड़क संपर्क लंबे समय से बड़ी चुनौती रहा है। ऐसे में रणनीतिक महत्व वाली सड़कों को प्राथमिकता मिलने से क्षेत्र की कनेक्टिविटी को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

 

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अनुराधा राणा ने दी क्षेत्रवासियों को बधाई

विधायक अनुराधा राणा ने दोनों सड़क परियोजनाओं को प्राथमिकता मिलने की जानकारी पर लाहौल-स्पीति की जनता को बधाई दी। उन्होंने कहा कि सुदूर क्षेत्रों तक सड़क संपर्क, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, आपदा प्रभावित क्षेत्रों में आधारभूत ढांचे को मजबूत करना और टिकाऊ पर्यटन को बढ़ावा देना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है।

 

उन्होंने इन दोनों मार्गों को क्षेत्रीय विकास के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बताया।

पूरा प्रोजेक्ट एक नजर में

Priority-1: सुमदो-क्योटो-कोरजोक
Priority-2: वांगतु-मुध-अत्तरगू
करीब 100 किमी: प्रस्तावित सुमदो-क्योटो-कोरजोक मार्ग
करीब 4,865 मीटर: वांगतु-मुध-अत्तरगू मार्ग की प्रस्तावित ऊंचाई
करीब 100 किमी: शिमला-काजा दूरी घटने की संभावित जानकारी

 

स्पीति में इन दोनों मार्गों को रणनीतिक प्राथमिकता मिलने की जानकारी से स्थानीय स्तर पर सड़क संपर्क को लेकर नई उम्मीद जगी है। हालांकि परियोजनाओं की वास्तविक प्रगति, स्वीकृति, निर्माण और समयसीमा की स्थिति संबंधित केंद्रीय एवं रक्षा मंत्रालय के आधिकारिक दस्तावेजों से स्पष्ट होना बाकी है।


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