महिला पुलिसकर्मी को घेरकर फाड़ दिए कपड़े, छत्तीसगढ़ के तमनार में हुआ क्या था?
छत्तीसगढ़ के तमनार में हुए बवाल के बाद एक महिला पुलिसकर्मी के कपड़े फाड़े जाने का मामला सामने आया है। अब इस केस में 2 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है।

प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit: Sora AI
छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में एक महिला पुलिसकर्मी के साथ बदसलूकी का मामला सामने आया है। एक पंचायत के दौरान प्रशासन की टीम के साथ पहुंची महिला पुलिसकर्मी के साथ स्थानीय लोगों ने न सिर्फ बदसलूकी की बल्कि उसके कपड़े तक फाड़ दिए। यह मामला रायगढ़ के तमानर में कोयला खनन के लिए दी गई जमीन से जुड़ा हुआ है। मामला चर्चा में आने के बाद केस दर्ज कर लिया गया है और दो आरोपियों को अभी तक गिरफ्तार किया जा चुका है। इस मामले की जांच के आदेश भी दिए गए हैं।
वायरल हुए वीडियो में देखा गया कि महिला पुलिसकर्मी की वर्दी फाड़कर जिस्म से नोंच ली गई थी। वह उन चिथड़ों को छाती से भींच र बार-बार माफी मांग रही थी। बार-बार कह रही थी, 'भाई मुझे माफ कर दो। मुझे छोड़ दो।' उसकी सांस उखड़ रही थी लेकिन उन लोगों ने उसे आधे किलोमीटर तक खेत में दौड़ाया था।
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क्या है पूरा मामला?
रायगढ़ के तमनार में जिंदल पावर लिमेटेड (JPL) को कोयला खनन के लिए सरकार ने बड़ी जमीन अलॉट की है। JPL इस इलाके में पहले से कोयला खनन कर रहा है लेकिन अब उसका दायरा बढ़ाया जा रहा है। खदान के लिए जिन नई जमीनों को चुना गया है उसमें 14 गांव आते हैं। जिसमें हजारों परिवार रहते हैं। सैकड़ों किसान रहते हैं। हजारों एकड़ की खेती यहां मौजूद है। ये ग्रामीण और किसान अपना घर और जमीन देना नहीं चाहते क्योंकि उनको पुर्नवास पर भरोसा नहीं है और जमीन के बदले मिलने वाले कम मुआवजे से वे संतुष्ठ नहीं हैं।
जमीन अधिग्रहण के लिए मोटे तौर पर दो कानून लागू होते हैं। एक है पेसा कानून। दूसरा है कोल बेरिंग ऐक्ट। मोटा-मोटी इन दोनों कानून को समझ लेते हैं।
पेसा कानून- यह जमीन अधिग्रहण के मुआवजे और पुर्नवास से जुड़ा कानून है लेकिन इन सब से पहले होती है जनसभा। पैसा कानून कहता है कि किसी भी गांव की जमीन पर अधिग्रहण से पहले ग्राम सभा कराई जाती है। इस सभा में तीन पार्टियां होती है। पहली पार्टी होती है - प्रभावित लोग यानी कि ग्रामीण। दूसरी पार्टी होती है- जमीन अधिग्रहीत करने वाले लोग यानी कि प्राइवेट कंपनी जो खदान खोलने वाली है और तीसरी पार्टी होता है- प्रशासन। जिसकी देख-रेख में डील होती है।
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जनसभा में पंचायत एकमत होकर यह तय करती है कि जमीन देनी है या नहीं। अगर देनी है तो फिर मुआवजे पर बात होती है और अगर नहीं देनी है तो बात यहीं खत्म।
यहीं पिक्चर में आता है कोल बेरिंग ऐक्ट। इसे ग्रामीणों का दुश्मन भी कहा जा सकता है। जो केंद्र सरकार को यह शक्ति देता है कि अगर किसी क्षेत्र में कोयला होने की संभावना है, तो सरकार सिर्फ नोटिफिकेशन जारी करके उस इलाके में कोयला खनन कर सकती है। वहां कोयले पर आधारित प्लांट्स लगाए जा सकते हैं। इस कानून में इसे राष्ट्रहित का मामला बताया गया है। ऐसे में प्रशासन या फिर प्राइवेट कंपनियां कई बार इसी कानून को आधार बनाकर पेसा कानून के अधिकार खत्म कर देती है और फिर सरकारी रेट पर ग्रामीणों की जमीन खरीद ली जाती है। अभी जो मुआवजे का रेट चल रहा है उसके भाव आखिरी बार साल 2004 में अपडेट किए गए थे। आज तक उसी रेट पर जमीन का अधिग्रहण हो रहा है। कानून और प्रशासन के तले दबे ग्रामीण मजबूरी में अपनी जमीन, घर, खेत सब कुछ छोड़ कर विस्थापित होते हैं जिसके ऐवज में उन्हें सही दाम भी नहीं मिलता। छत्तीसगढ़ में ही ऐसे दर्जनों उदाहरण मौजूद हैं। कोरबा की दीपका माइन्स वाली खदानें हों। सरगुजा की अमेरा माइन्स वाला मामला हो या फिर यही रायगढ़ के तमनार का मामला हो।
क्यों हो रहा है विरोध?
रायगढ़ के तमनार में भी यही हो रहा है। ग्रामीण जनसभा का विरोध कर रहे हैं। 8 दिसंबर 2025 को यहां जनसभा हुई थी लेकिन ग्रामीण उन्हें मिले मुआवजे से संतुष्ट नहीं हैं। ग्रामीणों ने यहां पर मौजूद एक गांव- दौराभांठा में अपना मंच बनाया है। जहां पूरे दिसंबर महीने से लगातार विरोध प्रदर्शन जारी है। ग्रामीणों का कहना है कि कोल बेरिंग ऐक्ट थोपकर जमीन ले ली जा रही है और ग्रामीण अपनी जमीन से हटना नहीं चाहते।
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27 दिसंबर को तमनार में विरोध तेज हो गया। प्रशासनिक अमला पहुंचा लोगों को वहां से हटाने और विस्थापन की प्रक्रिया शुरू कराने। ताकी घरों पर बुलडोजर चलाया जा सके और फिर वहां खुदाई का प्रोसेस शुरू किया जा सके। जैसे-जैसे प्रशासनिक अमला पहुंचा। वैसे-वैसे ग्रामीणों की संख्या बढ़ती गई। अचानक करीब 4 हजार ग्रामीण यहां इकट्ठा हो गए। पुलिस और ग्रामीणों की बीच झड़प होने लगी। दोनों ओर से लाठी-डंडे, आंसू गैस के गोले और पत्थर चलने लगे। सरकारी गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया गया।
इसी दौरान एक वीडियो सामने आया। भीड़ से घिरी तमनार थाने की प्रभारी को भीड़ दबोचने की कोशिश कर रही थी। उन्हें लात-घूंसों से ग्रामीण पीट रहे थे। पुलिस से झड़प के बाद भीड़ सीधे जिंदल के कोल हैंडलिंग प्लांट की ओर बढ़ गई। भीड़ ने वहां घुसकर कन्वेयर बेल्ट, ट्रैक्टर और गाड़ियों में आग लगा दी। प्लांट के दफ्तर में जमकर तोड़फोड़ की गई। जिसके बाद भीड़ छितरा गई। मामला थोड़ा शांत हुआ लेकिन रात होते-होते तक एक और वीडियो वायरल होने लगा। महिला TI की पिटाई के वीडियो से ज्यादा भयावह। यह वीडियो भी एक महिला पुलिसकर्मी का था। जो खेत पर अपनी आबरू बचा रही थी। गांव के लड़के उसे घेरे हुए थे। उसके जिस्म से उसके कपड़े नोंच रहे थे और वह महिला आरक्षक हाथ जोड़कर भाई-भाई कहकर माफी मांग रही थी।
खबरगांव ने इस संबंध में बिलासपुर संभाग के आईजी संजीव शुक्ला से बात की। उन्होंने बताया, 'इस घटना के खिलाफ अपराध पंजीबद्ध किया जा चुका है और दो आरोपियों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है। पूरे मामले में जांच के भी आदेश दिए गए हैं।'
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