उत्तर प्रदेश में अवैध निर्माण के खिलाफ बुलडोजर अभियान और सख्त कार्रवाई के दावों के बीच सरकारी आंकड़ों ने चौंकाने वाली तस्वीर पेश की है। राजधानी लखनऊ समेत प्रदेशभर में 2,48,854 अवैध निर्माण ऐसे हैं, जिन पर ध्वस्तीकरण के आदेश जारी किए जा चुके हैं, लेकिन अब तक कार्रवाई पूरी नहीं हो सकी है।
हजारों निर्माणों पर बुलडोजर चलने के बावजूद अवैध निर्माणों की बढ़ती संख्या प्रशासनिक निगरानी और कार्रवाई की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। ऐसे में सरकार के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती केवल नए अवैध निर्माण रोकने की नहीं, बल्कि वर्षों से लंबित मामलों का समयबद्ध निस्तारण करने की भी है।
लेवाना से अलीगंज तक, हादसों ने उठाए बड़े सवाल
राजधानी लखनऊ में पहले होटल लेवाना अग्निकांड और अब अलीगंज अग्निकांड में कुल 15 लोगों की जान जा चुकी है। दोनों हादसों के बाद यह सवाल और गहरा हो गया है कि आखिर अवैध निर्माणों और सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हुई। लगातार सामने आ रही घटनाओं ने विकास प्राधिकरणों की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
आवास विभाग का दायित्व भी संभाल रहे मुख्यमंत्री
योगी आदित्यनाथ
कई बार विकास प्राधिकरणों और आवास विकास परिषद के अधिकारियों और इंजीनियरों को अवैध निर्माण पर सख्ती से अंकुश लगाने के निर्देश दे चुके हैं। बावजूद इसके, प्रदेश के शहरों में अवैध निर्माण का खेल थमता नहीं दिख रहा। सरकारी रिकॉर्ड बताते हैं कि ध्वस्तीकरण के आदेश जारी होने के बाद भी बड़ी संख्या में निर्माण आज तक नहीं हटाए जा सके।
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4.32 लाख निर्माण चिन्हित, लाखों पर कार्रवाई अब भी अधूरी
सरकारी आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में विकास प्राधिकरणों और आवास विकास परिषद ने 4,32,188 अवैध निर्माण चिन्हित किए हैं। इनमें से 23,408 निर्माणों को ध्वस्त किया गया, जबकि 2,48,854 निर्माणों पर ध्वस्तीकरण के आदेश जारी होने के बावजूद कार्रवाई पूरी नहीं हो सकी। इससे साफ है कि अवैध निर्माण के खिलाफ अभियान अभी भी अपने लक्ष्य से काफी दूर है।
अलीगंज अग्निकांड की रिपोर्ट के बाद बड़े फैसलों की उम्मीद
अलीगंज अग्निकांड की जांच रिपोर्ट आने के बाद सरकार से बड़ी कार्रवाई की उम्मीद जताई जा रही है। माना जा रहा है कि इस बार जिम्मेदार अधिकारियों और इंजीनियरों की जवाबदेही तय की जाएगी, ताकि भविष्य में विकास प्राधिकरण या आवास विकास परिषद का कोई भी अधिकारी अवैध निर्माण को संरक्षण देने या कार्रवाई टालने का साहस न कर सके। अगर ऐसा होता है तो प्रदेश में अवैध निर्माण पर प्रभावी अंकुश लगने की उम्मीद भी बढ़ेगी।
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सिर्फ बुलडोजर नहीं, जवाबदेही भी जरूरी
विशेषज्ञों का मानना है कि अवैध निर्माण पर प्रभावी रोक तभी लगेगी, जब नियमों का उल्लंघन करने वालों के साथ-साथ लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की भी जवाबदेही तय होगी। लेवाना और अलीगंज जैसे हादसों ने यह साफ कर दिया है कि कार्रवाई में देरी केवल कानून व्यवस्था का नहीं, बल्कि लोगों की जान से जुड़ा गंभीर मामला है। ऐसे में सरकार के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती आदेश जारी करने की नहीं, बल्कि उन्हें पूरी सख्ती से जमीन पर लागू कराने की है।