उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में एक डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट (DM) ने एक क्लर्क को डिमोट किया, जो तीन बार हिंदी टाइपिंग की परीक्षा में फेल हो गया था। इसी वजह से क्लर्क को डिमोट कर चपरासी की नौकरी दे दी गई। डिमोट होने वाले कर्मचारी की नियुक्ति मृतक आश्रित कर्मचारी के तौर पर हुई थी, जिसने 5 साल तक क्लर्क के तौर पर नौकरी की थी। क्लर्क की नौकरी के नियमों के मुताबिक कर्मचारियों को हिंदी टाइपिंग आना चाहिए। इसी लिए तीन बार क्लर्क की हिंदी टाइपिंग की परीक्षा हुई थी।
रेहान खान को क्लर्क की नौकरी 5 जुलाई 2021 को मिली थी। नियमों के हिसाब से उन्हें कंप्यूटर पर हिंदी टाइपिंग में पास होना अनिवार्य था। जिसके बाद उनके दो बार हिंदी टाइपिंग को लेकर परीक्षा हुई थी। दोनों बार रेहान खान पास नहीं हो पाए थे। जब तीसरी बार भी रेहान खान हिंदी टाइपिंग की परीक्षा में पास नहीं हो पाए, तो DM अविनाश सिंह ने रेहान का डिमोशन किया। 16 सितंबर को रेहान का डिमोशन हुआ था।
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टाइपिंग टेस्ट में हुए फेल
रेहान खान क्लर्क के पद पर 5 जुलाई 2021 को नियुक्त हुए थे, जिसके बाद उन्होंने पहली बार 2023 में हिंदी टाइपिंग टेस्ट दिया था, जिसमें वह फेल हुए थे। इसके बाद 21 जून 2024 में दूसरी बार टाइपिंग टेस्ट दिया था। दूसरी बार भी वह टेस्ट में पास नहीं हो पाए थे। इसके बाद रेहान को तीसरी और आखिरी बार 2026 में टेस्ट देने का मौका मिला था। जब 8 सितंबर को टेस्ट दिया, इस बार भी रेहान फेल हो गए। तब डीएम अविनाश सिंह ने 16 सितंबर को रेहान का डिमोशन किया।
रेहान के अलावा कुछ अन्य अधिकारी भी टाइपिंग टेस्ट पास नहीं कर पाए थे, जिन्हें सुधार करने के लिए एक और मौका दिया गया। जानकारी के लिए बता दें, लक्ष्मी सक्सेना और राहुल को टाइपिंग सीखने के लिए तीसरी बार मौका दिया गया। इनके अलावा नेहा जोशी और कंचित चौधरी दूसरी बार हिंदी टाइपिंग टेस्ट में फेल हुए थे, जिन्हें सीखने का मौका दिया गया।
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नौकरी से किया बर्खास्त
बरेली के डीएम ने न सिर्फ रेहान का डिमोशन किया, बल्कि एक अधिकारी को नौकरी से बर्खास्त किया। जब डीएम को पता चला कि फरीदपुर के अधिकारी अंशुल पर कथित तौर पर रुपये के हेरफेर का आरोप लगा था। जब जांच-पड़ताल में आरोप सही पाए गए, तो अंशुल को नौकरी से बर्खास्त किया गया।