उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में जनता भीषण बिजली कटौती से जूझ रही है। हालांकि ऊर्जा मंत्री एके शर्मा इसे मानने को तैयार नहीं है। उनका कहना है कि कुछ मोहल्लों और गांवों में दिक्कत थी। दो दिन पहले ही इसे ठीक कर लिया गया। बाकी पूरे प्रदेश में रोस्टर के हिसाब से बिजली आपूर्ति की जा रही है।
अब सोचने की बात यह है कि अगर मंत्री जी का दावा सच है तो जनता प्रदर्शन क्यों कर रही है? ख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को दखल क्यों देना पड़ रहा है। रविवार को सीएम योगी आदित्यनाथ ने बिजली आपूर्ति बाधित होने पर जनता को सटीक जानकारी और सही बिल उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।
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सीएम योगी आदित्यनाथ ने एक्स पर लिखा, 'विद्युत आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में आमजन को समयबद्ध और सही जानकारी उपलब्ध कराई जाए। उपभोक्ताओं को समय पर और सही बिल उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाए। गर्मी के मौसम में किसी भी प्रकार की तकनीकी बाधा को न्यूनतम रखा जाए और ट्रांसमिशन नेटवर्क की सतत मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए।'
सीएम योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में बिजली आपूर्ति की स्थिति की समीक्षा की। बैठक में ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा और राज्य मंत्री कैलाश सिंह राजपूत भी मौजूद रहे। सीएम ने हर स्तर पर बिजली आपूर्ति की निगरानी सुनिश्चित करने को कहा है, ताकि आम जनता, किसानों, व्यापारियों और उद्योगों को संकट का सामना न करना पड़े।
लापरवाही बरती तो होगा सख्त एक्शन
सीएम ने अधिकारियों को ट्रांसमिशन नेटवर्क को मजबूत करने और फीडर-वार जवाबदेही तय करने का निर्देश दिया है। फीडर और ट्रांसफार्मर में खराबी आने पर तुरंत समाधान करने को कहा। सीएम ने आगाह किया कि अगर फील्ड अधिकारी कोई लापरवाही बरतते हैं तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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पहले पांच गांवों में आती थी बिजली: ऊर्जा मंत्री का दावा
उर्जा मंत्री एके शर्मा ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर लिखा, 'यूपी में कल रात की पीक डिमांड 30395 मेगावाट थी, लेकिन लगता है कि कुछ लोग उत्तर प्रदेश को बदनाम करने का प्रण करके बैठे हैं। पहले सिर्फ पांच गाँवों में बिजली आती थी तो उन्हें समस्या नहीं लगती थी। अब पूरे राज्य में बिजली आती है। हर गांव हर गली में रोस्टर के अनुसार 18 से 24 घंटे आती है, लेकिन कुछ गांव या कुछ शहरों के कुछ मोहल्लों में व्यवधान आता है तो बड़ी बात बन जाती है। यूपी में ‘बत्ती गुल’ ‘बिजली संकट’ और ‘बिजली व्यवस्था ध्वस्त’ जैसी क्षवि बनाते और बनवाते हैं। यह राज्य का और उसके विद्युत कर्मियों का अपमान है।'