सीतापुर से कांग्रेस सांसद राकेश राठौर को हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने दुष्कर्म मामले में उन्हें डिस्चार्ज कर दिया है। एक महिला ने पिछले साल जनवरी में सीतापुर कोतवाली में सांसद राकेश राठौर के खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज कराया था। इसमें महिला ने सांसद पर शादी का झांसा देकर 2020 में दुष्कर्म करने का आरोप लगाया था। हाईकोर्ट की बेंच ने माना कि दोनों के बीच आपसी सहमति से संबंध थे।
शुक्रवार को लखनऊ बेंच के न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी ने एक आदेश पारित किया। इसमें कहा कि शिकायतकर्ता ने शादी का वादा करके शारीरिक संबंध बनाने का आरोप लगाया था। लेकिन प्रथम दृष्टया कथित अपराध होने को लेकर गंभीर संदेह पैदा होता है। कोर्ट ने महिला के पति, विवाहित बेटे और बहू के बयान का भी संज्ञान लिया। इसके आधार पर सांसद को डिस्चार्ज कर दिया।
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दरअसल, सांसद राकेश राठौर ने निचली अदालत ने खुद को बरी करने की याचिका दाखिल की थी। हालांकि उनकी याचिका को खारिज कर दिया गया था। पांच मई 2025 को निचली अदालत ने उनके खिलाफ आरोप तय कर दिए थे। आदेश के खिलाफ सांसद ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। शुक्रवार को हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने उन्हें डिस्चार्ज कर दिया।
अदालत ने पाया कि शिकायतकर्ता ने कहा था कि वह एक जनसभा में राकेश राठौर से मिली। इसके सांसद ने उसे राजनीतिक संरक्षण की पेशकश की। शिकायतकर्ता ने यह पेशकश स्वीकार भी कर ली। दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और बाद में शिकायतकर्ता महिला को एक संगठन का जिला महिला अध्यक्ष बना दिया गया।
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अदालत ने महिला के पति का भी उल्लेख किया। इसमें पति ने कहा था कि राकेश राठौर अक्सर उसकी पत्नी को अपने घर पर बुलाते थे और कभी-कभी वह देर रात तक वहां रहती थी। कोर्ट ने कहा, 'उक्त परिस्थितियों के आधार पर अभियोजन पक्ष की सामग्री दो विवाहित और परिपक्व वयस्कों के बीच लंबे समय से विवाहेतर और परस्पर सहमति से बने संबंध का संकेत देती है।'
अदालत ने आगे कहा कि शादी करने के वादे पर संबंध बनाने का आरोप तथ्य के विपरीत है। ऐसे विरोधाभासी और निराधार आरोपों के आधार पर आपराधिक मुकदमा जारी रखना, कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।