उत्तर प्रदेश में वाराणसी में कमिश्नरेट पुलिस की एसआईटी को 7 फरवरी को शाम एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी। भोरसर लिंक रोड (मीरजापुर) के पास से पुलिस ने 2000 करोड़ रुपये के कफ सीरप तस्करी मामले में शामिल पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। तलाशी के दौरान इनके पास से थाईलैंड, दुबई (दिरहम) और नेपाल की विदेशी मुद्रा बरामद हुई है, जिसकी भारतीय कीमत करीब 55 हजार रुपये है। पकड़े गए लोगों में अमित जायसवाल, दिवेश जायसवाल और अंकुश सिंह शामिल हैं, जिन पर पुलिस ने 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित कर रखा था।
इनके अलावा घनश्याम और अभिनव कुमार को भी हिरासत में लिया गया है। आरोपियों ने पूछताछ में कबूल किया है कि उन्होंने फर्जी जीएसटी इनवॉइस और ई-वे बिल के जरिए झारखंड की एक फर्म (शैली ट्रेडर्स) की मदद से करीब 25 लाख कोडीनयुक्त कफ सीरप की शीशियों की अवैध खरीद-बिक्री की।
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पुलिस जांच में क्या आया सामने?
पुलिस जांच में सामने आया है कि इस पूरे खेल में हवाला के जरिए 40 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ, जिसमें इन आरोपियों का अपना हिस्सा 8 करोड़ रुपये था। यह गिरोह इतना शातिर था कि पुलिस की लुकआउट नोटिस के डर से ये लोग अलग-अलग राज्यों में छिपे थे और विदेश भागने की योजना बना रहे थे।
हवाला का मकड़जाल
पुलिस जांच में सामने आया कि तस्करी के पैसों को सफेद करने के लिए यह गिरोह चार लेयर के सिस्टम का इस्तेमाल करता था। आरोपी शुभम जायसवाल और प्रशांत उपाध्याय डमी फर्मों के जरिए पैसा आरटीजीएस करवाते थे। यह पैसा कई खातों से होते हुए अंत में मुख्य सरगना तक पहुंचता था। गिरोह की मीटिंग्स केबीएन प्लाजा में होती थीं, जहां तस्करी के पैसों के बंटवारे और कानूनी कार्रवाई से बचने की रणनीति बनाई जाती थी।
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आरोपियों ने बताया कि उनके अवैध कारोबार की भनक त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल और बिहार पुलिस को भी लग गई थी और उन्हें नोटिस भी जारी किए गए थे। हालांकि, गिरोह का एक साथी शुभम इन मामलों को 'मैनेज' कर लेता था। यह सिंडिकेट इतना फैला हुआ था कि इनकी फर्मों के नाम पर निकला माल सीधे बांग्लादेश की सीमा और पूर्वोत्तर राज्यों में नशे के लिए सप्लाई कर दिया जाता था। फिलहाल पुलिस अन्य फरार साथियों की तलाश में जुटी है।