तमिलनाडु के समाज सुधारक ई.वी. रामासामी 'पेरियार' के नाम पर कोयंबटूर में एक लाइब्रेरी बनाई गई है। 300 करोड़ रुपये के नए 'पेरियार अरिवुलगम' लाइब्रेरी और साइंस सेंटर में किताबों की खरीद को लेकर एक बड़ा घोटाला सामने आया है। तमिल लेखक पेरुमल मुरुगन ने एक मैगजीन में खुलासा किया है कि इस लाइब्रेरी के लिए कई ऐसे पब्लिशर्स से हजारों किताबें बहुत ऊंची कीमतों पर खरीदी गईं, जिनके पते और नाम तक फर्जी हैं। इन किताबों में बड़ी ऐतिहासिक गलतियां, व्याकरण की अशुद्धियां और आर्टिफिसियल इंटेलिजेंस (AI) से तैयार किया गया बेतुका कंटेंट भरा हुआ है। इस खुलासे के बाद सत्तारुढ़ पार्टी 'तमिलगा वेत्री कजगम' (TVK) और मुख्य विपक्षी दल 'द्रविड़ मुन्नेत्र कज़गम' (DMK) के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरु हो गया है।
जहां TVK इसे पिछली डीएमके सरकार के दौरान हुआ भ्रष्टाचार बता रही है, वहीं DMK का दावा है कि ये किताबें सरकार बदलने के बाद खरीदी गई हैं। राज्य के स्कूल शिक्षा मंत्री राज मोहन ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। उन्होंने कहा है कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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कैसे हुआ खुलासा?
पेरुमल मुरुगन के मुताबिक, चौथी मंजिल पर रखी तमिल किताबों के सेक्शन में 'अगल विलक्कू' नाम के पब्लिशर की करीब 1,800 किताबें भरी पड़ी हैं। 40 साल से साहित्य की दुनिया में रहने के बावजूद उन्होंने इस पब्लिशर का नाम पहली बार सुना है। कई किताबों पर 1,400 रुपये से ज्यादा की कीमत लिखी है।
पेरुमल ने कहा कि 'नलाडियार वाझकईयिन वाझकाट्टी' नामक 1,445 रुपये की किताब में 'नलाडियार' को एक प्रसिद्ध कवि बताया गया है जबकि यह जैन मुनियों के 400 श्लोकों का संग्रह है। वहीं 'मदुरै कांची ओरु इलक्किया पयनम' नाम की किताब में दावा किया गया है कि इसे मदुरै कूझत्तिप पेरुवझुथि नाम के राजा ने लिखा था। जबकि इसके असली रचयिता कवि मांगुडी मरुथनायर हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि 'कीझाडी सेप्पम वरलाऋ' नाम की किताब में कीझाडी पुरातात्विक स्थल की खोज के रूप में एक विशाल नंदी की मूर्ति की फोटो छाप दी गई है। उनका कहना है कि तमिलनाडु पर लिखी गई एक किताब में मुथुवेलु सुब्बैया अय्यर को 1947 में राज्य का पहला मुख्यमंत्री बताया गया है। वहीं पूर्व सीएम एम. करुणानिधि को 'एमके रामासामी' लिखा गया है।
उन्होंने यहां तक कहा कि किताबों पर त्रिशा विजय, विजय आदितन, मोनिका सूर्या, जोथी हरिहरन और मनीषा सरवनन जैसे नाम बतौर लेखक लिखे गए हैं। मुरुगन का कहना है कि यह किसी मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति के लिखे का ढेर लगता है। इसमें हर लाइन में गलतियां हैं।
किसने खरीदीं ये किताबें?
7 एकड़ में फैले और 300 करोड़ रुपये की लागत से बने इस पुस्तकालय की नींव DMK सरकार के दौरान रखी गई थी। इसका उद्घाटन 16 अक्टूबर को मौजूदा मुख्यमंत्री विजय ने किया। सीएम विजय ने इसे DMK शासन के भ्रष्टाचार का नया सबूत बताते हुए कहा, 'आने वाली पीढ़ियां DMK को माफ नहीं करेंगी। यह पार्टी भ्रष्टाचार के साहित्य में भी नंबर-1 बन गई है।' TVK ने 13 फरवरी 2026 की तारीख वाला एक बिना दस्तखत का परचेज ऑर्डर भी पेश किया जो DMK के समय का बताया गया।
DMK ने आरोपों को नकारते हुए कहा कि विवादित किताबों पर जून की तारीख की सील लगी है जबकि लाइब्रेरी की बाकी किताबों पर मार्च की सील है। इससे साफ होता है कि खरीदारी मई में नई सरकार बनने के बाद हुई है। DMK ने किताबों पर लिखे 'विजय' नाम वाले लेखकों का हवाला देकर सीएम पर तंज भी कसा।
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नेताओं और सहयोगियों की प्रतिक्रियाएं
मक्कल नीधि मय्यम के प्रमुख और राज्यसभा सांसद कमल हासन ने इसे तमिल भाषा के साथ एक बड़ा धोखा और शर्मनाक हरकत करार दिया। उन्होंने इन नकली किताबों को तुरंत हटाने और फर्जी पब्लिशर्स के दफ्तरों को सील करने की मांग की। TVK की सहयोगी कांग्रेस के सांसद माणिक्यम टैगोर ने मांग की है कि जांच को केवल इस एक लाइब्रेरी तक सीमित न रखकर, DMK शासन के दौरान पूरे राज्य की लाइब्रेरी में खरीदी गई सभी किताबों का ऑडिट कराया जाए।
वहीं भाजपा ने भी इस मामले में डीएमके पर तमिल जनता के साथ धोखाधड़ी करने का आरोप लगाया है। फिलहाल, जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या ये किताबें सरकार की गठित की गई विशेषज्ञ समिति की सिफारिश पर खरीदी गई थीं। साथ ही समिति को अंधेरे में रखकर यह खरीद की गई।