जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने अपने स्वतंत्रता दिवस के भाषण में पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर के हालात का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में हो रही घटनाओं से उन्हें यह एहसास हुआ कि जिन पूर्वजों ने 'हमलावर खबरदार' का नारा दिया था, वे सही थे। उन्होंने संघवाद को भी मजबूत बनाने की आह्वान किया और कहा कि लोकतंत्र और संघवाद ही हमारे देश की सबसे बड़ी ताकत है। इसे जिंदा रखना हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।
सीएम उमर अब्दुल्ला ने कहा, 'जब मैं सरहद के पार और एलओसी के पार के हालात देखता हूं तो मुझे पता चलता है कि 80 साल पहले हमारे लीडरों ने जो हमारे लिए फैसला लिया था, वो सही फैसला था। जिन लोगों ने यह नारा बुलंद किया था 'हमलावर खबरदार', वो लोग सही थे। जो उन्होंने कुर्बानियां दीं, वो कुर्बानियां सही थीं।'
यह भी पढ़ें: चंडीगढ़ में पुलिस और प्रदर्शनकारी आमने-सामने, आजादी वाले दिन क्यों मचा बवाल?
पीओके हमारा हिस्सा: उमर अब्दुल्ला
उमर अब्दुल्ला ने आगे कहा, 'आज जब एलओसी के बार जम्मू-कश्मीर के उस हिस्से को देखते हैं तो दुख और अफेसोस और गहरी तकलीफ होती है। मुझे लगता है कि अगर 2019 में हमारे हालात न बदले गए तो शायद उस इलाके के जम्मू-कश्मीर के लोग आज हमारे साथ फिर से जुड़ने के लिए विरोध-प्रदर्शन कर रहे होते। जम्मू-कश्मीर का वह हिस्सा हमारा है। हम उन लोगों को अपना मानते हैं, उनमें से कोई भी अजनबी या बाहरी नहीं है। आज भी जम्मू-कश्मीर विधानसभा में उनके लिए सीटें आरक्षित हैं, इस उम्मीद के साथ कि एक न एक दिन वे लोग इन खाली सीटों का इस्तेमाल कर पाएंगे।
लोकतंत्र और संघवाद देश की सबसे बड़ी ताकत
उमर अब्दुल्ला ने अपने भाषण में संघवाद पर बेहद जोर दिया। कहा कि लोकतंत्र और संघवाद भारत की दो सबसे बड़ी ताकत हैं। हमारे मुल्क की दो सबसे बड़ी ताकतें हमारा लोकतंत्र और हमारा संघवाद। हर हाल में लोकतंत्र की रक्षा करना, उसे मजबूत करना और उसे जिंदा रखना हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उसके साथ-साथ इस मुल्क में संघवाद की रक्षा करना और उसे मजबूत करना भी हमारा जिम्मेदारी है। उससे हम पीछे नहीं हट सकते।
यह भी पढ़ें: प्रतिबंध से खनन तक, कैसे बदली भारत की 'समुद्र मंथन' नीति, उम्मीदें क्या हैं?
आगे कहा, 'हमारा मुल्क एक रियासतों का संघ है। न केवल यह कहा और समझा जाता है, बल्कि संविधानिक तौर पर इसे माना जाता है। आज के मौके पर जब हम संघवाद की बात करते हैं तो उस संघवाद को मजबूत करना हम जम्मू-कश्मीर से शुरू करें। हमसे जो कुछ भी छीना गया है, उसे वापस लौटाया जाना चाहिए ताकि वे केवल शब्द बनकर न रह जाएं।'