नोएडा की ही तरह दिल्ली में भी सिस्टम की लापरवाही ने एक युवक की जान ले ली। पश्चिम दिल्ली के जनकपुरी इलाके में दिल्ली जल बोर्ड के काम के दौरान सड़क पर खोदे गए गहरे गड्ढे कमल नाम के युवक की गिकर मौत हो गई। घटना के बाद विपक्ष से लेकर सोशल मीडिया पर इस लापरवाही को लेकर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, दिल्ली सरकार ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए तीन इंजीनियरों को निलंबित किया है।
वहीं, आम आदमी पार्टी के अध्यक्ष अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि ये हादसा नहीं, बल्कि हत्या है। उन्होंने कहा, 'नोएडा की घटना से भी बीजेपी ने कुछ नहीं सीखा। घोर लापरवाही और गैर-जिम्मेदार रवैया अब बीजेपी सरकारों की पहचान बन चुका है, जिसका खामियाज़ा आम जनता भुगत रही है। ईश्वर उस परिवार को शक्ति दें, जिसने सरकार की लापरवाही की वजह से अपना बच्चा खो दिया।'
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आम आदमी पार्टी का गंभीर आरोप
आम आदमी पार्टी के पार्षद रामिंदर कौर ने कहा कि गड्ढे को पीडब्ल्यूडी के द्वारा खोदा गया था और इसमें बैरिकेडिंग नहीं की गई थी। उन्होंने कहा कि उस एरिया में काफी अंधेरा था और पिछले आठ महीने से लगातार काम चल रहा था और किसी भी तरह के सुरक्षा का इंतजाम नहीं किया गया था।
कांग्रेस ने मंत्री का मांगा इस्तीफा
इस मामले में कांग्रेस ने भी दिल्ली की बीजेपी सरकार पर जमकर हमला बोला। दिल्ली कांग्रेस के अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने इसे सरकारी लापरवाही का साफ सबूत बताते हुए मृतक के परिवार को तुरंत 1 करोड़ रुपये का मुआवजा देने की मांग की। साथ ही जनकपुरी के विधायक और मंत्री आशीष सूद से तत्काल इस्तीफा मांगा है।
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दिल्ली सरकार ने क्या कहा?
हालांकि, दिल्ली सरकार ने इस घटना पर सख्त रुख अपनाते हुए प्रारंभिक जांच के बाद तीन इंजीनियरों को सस्पेंड कर दिया है। इनमें एक एक्जीक्यूटिव इंजीनियर (EE), एक असिस्टेंट इंजीनियर (AE) और एक जूनियर इंजीनियर (JE) शामिल हैं। ये तीनों जनकपुरी लाइन रिहैबिलिटेशन प्रोजेक्ट इलाके से जुड़े हुए हैं।
दिल्ली के मंत्री परवेश साहिब सिंह ने कहा, 'यह सिर्फ शुरुआती कार्रवाई है। हादसे की पूरी जांच के लिए हाई-लेवल कमिटी बनाई गई है। यह कमिटी घटनास्थल का निरीक्षण करेगी, सुरक्षा के इंतजाम देखेगी, नियमों का पालन जांचेगी और लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों को ठहराएगी। जांच के आधार पर आगे सख्त कार्रवाई होगी।'