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बिहार में जमीन सर्वे का काम होगा तेज, 38 जिलों की रोज होगी निगरानी

बिहार में विशेष भूमि सर्वेक्षण का काम तेज करने के निर्देश दिए गए हैं। मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल ने पिछड़ रहे जिलों की नियमित निगरानी और लापरवाही पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

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प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit- ChatGPT

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बिहार में चल रहे विशेष सर्वेक्षण और बंदोबस्त कार्यक्रम को तय समय-सीमा में पूरा करने को लेकर राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। विभाग के मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने बिहार के सभी 38 जिलों में चल रहे विशेष सर्वेक्षण कार्य की जिलावार प्रगति की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने पहले और दूसरे चरण के काम की प्रगति, उपलब्ध कर्मचारियों और तय लक्ष्य के मुकाबले अब तक हुए काम की जानकारी ली।

 

समीक्षा के दौरान बांका, जमुई और सुपौल समेत कुछ जिलों में सर्वेक्षण कार्य की प्रगति उम्मीद के मुताबिक नहीं मिली। इस पर मंत्री ने संबंधित बंदोबस्त पदाधिकारियों को काम में तुरंत तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सिर्फ लक्ष्य तय करना काफी नहीं है बल्कि हर दिन के काम की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और उसकी सही तरीके से निगरानी भी होनी चाहिए। मंत्री ने साफ कहा कि विशेष सर्वेक्षण के काम में लापरवाही किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

 

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धीमे काम वाले जिलों पर नजर

मंत्री ने निर्देश दिया कि जिन जिलों में काम की गति धीमी है वहां बंदोबस्त पदाधिकारी हर दिन शाम को अपने सभी सहायक बंदोबस्त पदाधिकारियों और अमीनों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए काम की समीक्षा करेंगे। इस बैठक में राज्य मुख्यालय को भी जोड़ा जाएगा। बैठक का लिंक कम से कम तीन घंटे पहले सभी संबंधित अधिकारियों और मुख्यालय को भेजने का निर्देश दिया गया है।

 

उन्होंने कहा कि जिन जिलों का काम पीछे चल रहा है उनकी मुख्यालय स्तर से भी लगातार निगरानी की जाएगी। ऐसे जिलों के अधिकारियों के साथ हर तीन दिन में मुख्यालय स्तर से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए समीक्षा बैठक होगी। इसमें तय लक्ष्य के मुकाबले कितना काम हुआ, रोज कितनी प्रगति हुई और काम में क्या परेशानी आ रही है इन सभी बातों की जानकारी ली जाएगी। मंत्री ने कहा कि रैंकिंग में पीछे चल रहे जिलों पर खास ध्यान देना होगा और तय लक्ष्य के हिसाब से काम पूरा करना होगा।

 

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डॉ. जायसवाल ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सर्वेक्षण के काम की रोजाना प्रगति की जिला स्तर पर सही तरीके से निगरानी की जाए। उन्होंने कहा कि उपलब्ध कर्मचारियों के समय का सही इस्तेमाल होना चाहिए। अमीनों और दूसरे संबंधित कर्मचारियों को तय लक्ष्य के हिसाब से काम में लगाया जाए ताकि सर्वेक्षण का काम समय पर पूरा हो सके। मंत्री ने कहा कि विशेष सर्वेक्षण और बंदोबस्त का काम सरकार की बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल है। यह सीधे आम लोगों के जमीन के अधिकार और जमीन से जुड़े रिकॉर्ड से जुड़ा है। इसलिए इसमें किसी भी तरह की लापरवाही या बेवजह देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने सभी बंदोबस्त पदाधिकारियों को अपने-अपने जिलों में काम की जिम्मेदारी लेते हुए इसकी गति बढ़ाने और तय समय में लक्ष्य पूरा करने के निर्देश दिए।

 

उन्होंने अधिकारियों से कहा कि अगर किसी वजह से सर्वेक्षण का काम धीमा हो रहा है तो समस्या की पहचान कर उसका तुरंत समाधान किया जाए। कर्मचारियों या दूसरे संसाधनों की कमी को काम में देरी की वजह नहीं बनने दिया जाए। अगर कहीं अमीनों की कमी है या कोई तकनीकी परेशानी आ रही है तो इसकी जानकारी तुरंत मुख्यालय को दी जाए ताकि समस्या का जल्द समाधान किया जा सके।

सचिव और निदेशक ने भी दिए सख्त निर्देश

बैठक में विभाग के सचिव जय सिंह ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि निर्धारित समय-सीमा के भीतर कार्ययोजना बनाकर उसी अनुरूप कार्य पूरा करें। उन्होंने कहा कि प्रत्येक स्तर पर अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित होनी चाहिए और दैनिक प्रगति के आधार पर आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई की जाए। जो अधिकारी लापरवाही करेंगे उन पर कार्रवाई भी हो सकती है।

 

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वहीं भू-अभिलेख एवं परिमाप निदेशालय के निदेशक सुहर्ष भगत ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से विशेष सर्वेक्षण एवं बंदोबस्त कार्यक्रम की अद्यतन जिलावार स्थिति से अवगत कराया। उन्होंने रैंकिंग में पिछड़ रहे जिलों के बंदोबस्त पदाधिकारियों से टारगेट ओरिएंटेड कार्य करने के निर्देश दिए और सभी कर्मियों के प्रतिदिन के कार्य की समीक्षा की बात कही। उन्होंने बताया कि कई जिलों में किश्तवार और खानापुरी का कार्य तेजी से चल रहा है लेकिन कुछ जिलों में अमीनों की उपस्थिति कम है।

 

निदेशक ने बताया कि विशेष सर्वेक्षण का पहला चरण दस्तावेजों के संग्रह का है और दूसरा चरण जमीन के सत्यापन का है। दोनों चरणों को समय पर पूरा करना जरूरी है ताकि लोगों को नया खतियान और नक्शा समय पर मिल सके। इससे जमीन विवाद में कमी आएगी और लोगों को अपनी जमीन का सही अधिकार मिलेगा। बैठक में सभी जिलों के अधिकारियों ने अपनी प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की और आने वाले दिनों में लक्ष्य पूरा करने का आश्वासन दिया। मंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि बिहार में जमीन का हर रिकॉर्ड डिजिटल और पारदर्शी हो ताकि किसी भी किसान या जमीन मालिक को परेशानी न हो।


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