बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने सीतामढ़ी के एक सरकारी अस्पताल का दौरा किया। अस्पताल में कई गंभीर खामियां नजर आईं। अस्पताल प्रशासन ने मरीजों के बेड की चादरें तक नहीं बदली थीं। अस्पताल में पानी की सुविधा नदारद थी, वहीं साफ सफाई का भी बुरा हाल रहा। सोमवार देर रात गंदगी देखकर बिहार के स्वास्थ्य मंत्री ने कड़ी नाराजगी जताई और अब जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करने की बात कह रहे हैं।
बिहार के अस्पतालों में बदहाली की तस्वीरें पहले भी सामने आईं हैं। बारिश के मौसम में कई अस्पतालों के जनरल वार्ड और इमरजेंसी वार्ड में पानी तक घुसने की खबरें आ चुकी हैं। अस्पातल में बदइंतजामी को लेकर सवाल भी उठते रहे हैं। अस्पतालों के स्टाफ के खराब रवैये को लेकर भी सरकार पर सवाल उठते रहे हैं। अब खुद स्वास्थ्य मंत्री ने अस्पताल की गंभीर खामियों पर चर्चा की है।
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'बेड शीट तक नहीं बदली जा रही है, साफ-सफाई नहीं'
बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने कहा, 'हमने देखा कि बेड शीट नहीं बदली जा रही है, साफ-सफाई नहीं है, पानी नहीं मिल रहा है। जो भी संबंधित अधिकारी हैं, उनके नाम मांगें गए हैं। जैसे ही मुझे सूची बनाकर दी जाती है, इसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। मैं देखता हूं कि ये लोग काम क्यों नहीं कर रहे हैं। हमने कहा है कि आप हमें सूची दीजिए ताकि हम जान सकें कि हमें क्या करना है।'
निशांत के सामने भिड़ पड़े स्टाफ और मरीज
निशांत कुमार के सामने एक महिला अस्पताल के स्टाफ से उलझ गई। महिला ने दावा किया कि अस्पताल में मरीज को ऑक्सीजन के लिए परेशान होना पड़ा है। स्टाफ ने कहा कि जरूरत से ज्यादा ऑक्सीजन देना भी सेहत के लिए खराब होता है। एक महिला नर्सिंग स्टाफ ने भी मरीज की बातों का खंडन किया। निशांत कुमार ने कहा कि आप इन्हें ठीक से देखिए। निशांत कुमार ने वहां मौजूद कई लोगों से अस्पताल की बदइंतजामी को लेकर सवाल भी किए।
बिहार के अस्पतालों पर क्या कहती है CAG रिपोर्ट?
बिहार के अस्पतालों पर साल 2024 में भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट आई थी। 2 साल पहले भी अस्पातलों की हालत बदहाल स्थिति में ही थी। अस्पतालों के बुनियादी ढांचे, कम स्टाफ, खराब उपकरणों का जिक्र रिपोर्ट में था। 4 बड़े सब डिविजनल अस्पातल (SDH) ऐसे थे, जहां इमरजेंसी ऑपरेशन थिएटर तक नहीं था। इंडियन पब्लिक हेल्त सिस्टम (IPHS) की ओर से तय मानकों का यह उल्लंघन है। सरकार हर SDH में एक इमरजेंसी ऑपरेशन थिएटर होने की बात कहती है।
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वेंटिलेटर के बिना काम कर रहे अस्पताल
2024 की CAG रिपोर्ट में बताया गया कि पटना, जहानाबाद, वैशाली, मधेपुरा और नालंदा जैसे जिलों में सिर्फ 54 अस्पतालों में मौजूद वेंटिलेटर काम कर रहे थे। 132 वेंटिलेटर में से सिर्फ 71 ही चालू हालत में थे। बाकी वेंटिलेटर तकनीशियनों की कमी और इंटेंसिव केयर यूनिट (ICU) के काम न करने के कारण इस्तेमाल नहीं हो पाए। रिपोर्ट में कहा गया है कि कुशल कर्मचारियों की कमी और ICU के काम न करने के कारण 57 वेंटिलेटर बेकार पड़े थे।
डायग्नोस्टिक सुविधाओं का टोटा
CAG रिपोर्ट में यह बात सामने आई कि राज्य में बीमारियों की जांच को लेकर सुविधाएं खराब हालत में थीं। जांचे गए 68 स्वास्थ्य केंद्रों में जरूरी डायग्नोस्टिक सेवाओं में से 19 फीसदी से लेकर 100 फीसदी तक कई सेवाएं नदारद थीं। मरीजों को इलाज के लिए प्राइवेट लैब की रिपोर्ट पर निर्भर रहना पड़ता है। लैब तकनीशियनों भारी किल्लत है।
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डॉक्टर और स्टाफ की भीषण किल्लत
विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि 1,000 लोगों पर एक डॉक्टर होना चाहिए। इसके लिए 1,24,919 एलोपैथिक डॉक्टरों की जरूरत है। प्रभावित जिलों में सिर्फ 58,144 डॉक्टर उपलब्ध हैं, जो प्रति 2,148 लोगों पर एक डॉक्टर का अनुपात है। यह कमी अन्य हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स में भी है।