मालिनी अवस्थी के गीतों पर झूम उठा डीएलसीसुपवा, 4 दिन के प्रोग्राम में जमा रंग
दादा लख्मी चंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ परफॉर्मिंग एंड विजुअल आर्ट्स (डीएलसीसुपवा) में में हुए चार दिन के प्रोग्राम में कलाकारों ने अपना रंग दिखाया।

Photo Credit: Special Arrengament
दादा लख्मी चंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ परफॉर्मिंग एंड विजुअल आर्ट्स (डीएलसीसुपवा) में नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (एनएसडी) की तरफ से आयोजित कराए जा रहे भारत रंग महोत्सव (भारंगम) के 25वें संस्करण और यूनिवर्सिटी के अपने ‘सारंग’ महोत्सव का गुरुवार को रंगारंग कार्यक्रम के साथ समापन हुआ। चार दिवसीय इस गीत-संगीत, अभिनय और अद्भुत महोत्सव के भव्य समापन समारोह में कई बड़ी हस्तियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। मौके पर पदमश्री से सम्मानित प्रसिद्ध लोक गायिका मालिनी अवस्थी ने अवधी भाषा में अपने गीतों पर दर्शकों को झूमने पर मजबूर पर किया। उनके साथ ‘न आना इस देश लाडो’ फेम अभिनेत्री मेघना मलिक, बॉलीवुड अभिनेता सुनील चितकारा व अभिनेता विक्रम कोचर, सनसनी फेम श्रीवर्धन त्रिवेदी मुख्य रूप से मौजूद रहे। यूनिवर्सिटी के कुलगुरू डॉ अमित आर्य व रजिस्ट्रार डॉ गुंजन मलिक मनोचा ने अतिथियों का स्वागत किया और उन्हें सम्मानित किया।
समापन सत्र में मालिनी अवस्थी ने पूर्वांचल में शादी के दौरान महिलाओं द्वारा गाए जाने वाले गीतों के दौरान होने वाले अभिनय का शानदार मंचन देते हुए कहा कि हमारी दादी, नानी और पुरानी महिलाओं ने अभिनय सीखा नहीं है, लेकिन वह शादी-विवाह के गीतों पर हंसने व रोने के भाव काफी शानदार तरीके से पेश करती हैं। वह अभिनय बनावटी नहीं होता, वह आत्मा व अभिव्यक्ति से निकल कर आता है।
यह भी पढ़ें: अमेरिका में हुई थी दुर्घटना में मौत, अब परिवार को मिलेगा 262 करोड़ का मुआवजा
झूम उठे लोग
उन्होंने छात्रों से इससे सीखने की बात कही। अपनी बातचीत के दौरान जैसे ही उन्होंने ‘नखरे वाली बन्नो आई पिया’ गीत प्रस्तुत किया, तो सभी दर्शक झूमने पर मजबूर हो गए। अभिनेत्री मेघना मलिक भी खुद को रोक नहीं पाई और मंच पर डांस करने पहुंच गई। चार दिवसीय ‘भारंगम’ के दौरान दिल्ली, पंजाब व श्रीलंका से आए चार नाटकों का मंचन किया गया। एनएसडी की तरफ से 107 लोग इन नाटकों में हिस्सा लेने के लिए यूनिवर्सिटी पहुंचे, जिनमें कलाकार, टेक्निशियन, म्यूजिशियन व अन्य स्टाफ सदस्य मौजूद रहे।

वहीं, ‘सारंग’ महोत्सव के दौरान रंगमंच, म्यूजिक, डांस, कविता पाठ, लोक नृत्य व संवाद सत्रों का आयोजन किया गया। इसमें देश के अलग-अलग राज्यों की कला व संस्कृतियों की झलक कलाकारों ने प्रस्तुत की। वहीं, डीएलसीसुपवा के 50 छात्रों ने भी अपनी प्रस्तुति मंच पर दी। छात्रों ने कथक, भरतनाट्यम, रंगमंच, बॉडी मूवमेंट थियेटर, भंगड़ा, कव्वाली, म्यूजिक की प्रस्तुति दी। आयोजन को सफल बनाने के लिए यूनिवर्सिटी के अलग-अलग डिपार्टमेंट के करीब 60 से अधिक वॉलंटियर्स व पूरे सुपवा यूनिवर्सिटी परिवार ने अपना योगदान किया।
सुपवा में दिखा एनएसडी जैसा माहौल
समापन समारोह के दौरान लोक गायिका मालिनी अवस्थी ने कहा, ‘सुपवा की धरती पर कुलगुरु डॉ अमित आर्य ने जिस तरह से कला का बीज बोया है और उसकी बागवानी के साथ उसकी रखवाली की है, वह शानदार है। मुझे सुपवा परिसर में आकर ऐसा महसूस हुआ, जैसे एनएसडी में पहुंच गए हैं। इस भव्य आयोजन में मुझे बुलाने के लिए मैं उनका आभार व्यक्त करती हूं।’ उन्होंने छात्रों से कहा, ‘संगीत व अभिनय एक साथ जुड़े हुए हैं। अगर अभिनय को हटा दिए जाए तो संगीत में भी रस नहीं रह जाता है। हमारे ग्रामीण क्षेत्रों में शादी विवाह के दौरान महिलाओं द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले गीत इसका उदाहरण हैं। उन्होंने छात्रों को अपनी खुद की अभिव्यक्ति को बाहर लाने के लिए प्रेरित किया।’
रंगमंच अपने आप में संपूर्ण विद्या - श्रीवर्धन त्रिवेदी
सनसनी फेम एंकर व रंगकर्मी श्रीवर्धन त्रिवेदी ने कहा कि सुपवा ने एक शानदार आयोजन किया है और मुझे उम्मीद है कि आगे भी इस तरह के आयोजन होने जरूरी हैं। क्योंकि यह इस क्षेत्र व समय की जरूरत है। मुझे उम्मीद है कि डीएलसीसुपवा इस आयोजन को दूर-दराज तक के क्षेत्र में लेकर आएगा, ताकि उन लोगों तक भी इस तरह की शिक्षा पहुंच सके, जो संसाधन के अभाव में यहां तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। हमारे आसपास बहुत टैलेंट है, बस उन्हें सही दिशा व मार्गदर्शन देने की जरूरत है।
किसी शहर में सुपवा है, तो इससे खूबसूरत क्या होगा - मेघना मलिक
अभिनेत्री मेघना मलिक ने कहा कि पहले अभिनय को लेकर केवल एक ही संस्थान का नाम था एनएसडी और उसके बारे में भी अधिकतर लोगों को जानकारी नहीं होती थी, लेकिन आज सुपवा जैसा संस्थान आपके शहर में है, आपके आसपास है, तो इससे खूबसूरत बात तो कुछ हो ही नहीं सकता। इतनी शानदार बिल्डिंग और इतने शानदार रंग यहां देखने को मिल रहे हैं और यह आयोजन कमाल का है। मैं छात्रों से यही कहना चाहती हूं कि अपने शिक्षकों को पकड़ कर रखें और उनके खूब ज्ञान अर्जित करो।
संस्कृति का संगम होना जरूरी - विक्रम कोचर
फिल्म अभिनेता विक्रम कोचर ने कहा कि कुछ भी करने से पहले यह सुनिश्चित करना होता है कि आप करना क्या चाहते हैं। एक फाइनल डिसीजन लेना होता है। आप जो काम कर रहे हैं, उससे प्यार करना जरूरी है। जो आपको पसंद है, तो उसके रिजल्ट मिलेंगे और आप मंजिल तक पहुंच सकेंगे। उन्होंने छात्रों से कहा कि अभी एक जगह ठहरने की जरूरत नहीं है। हमेशा अपने आप में चेंज लाते रहने की जरूरत है।
यह भी पढ़ें: 'आप कुछ नहीं करेंगे', महुआ मोइत्रा ने नोएडा पुलिस और अमित मालवीय को क्यों घेरा?

यह उत्सव एक गर्व का क्षण रहा - डॉ अमित आर्य
डीएलसीसुपवा के कुलगुरु डॉ अमित आर्य ने कहा, ‘नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा ने ‘भारंगम’ के 25वें संस्करण का आयोजन करने के लिए हमारे संस्थान को चुना यह हमारे लिए गर्व की बात है और हमने इस आयोजन को सफल बनाने के लिए हर संभव प्रयास किया। इस सफल आयोजन में यूनिवर्सिटी परिसर के सभी सदस्यों ने अपना भरपूर सहयोग दिया। मुझे पता चला कि ‘सारंग’ महोत्सव काफी पहले बंद हो गया, तो हमने इसे फिर से शुरू करने का संकल्प किया। यह खुशी की बात है कि हमने एक शानदार आयोजन को फिर से जिंदा किया। आगे भी इस तरह के बड़े आयोजन यूनिवर्सिटी करती रहेगी, उसके लिए पूरा रोड मैप तैयार किया जा रहा है।’
और पढ़ें
Copyright ©️ TIF MULTIMEDIA PRIVATE LIMITED | All Rights Reserved | Developed By TIF Technologies
CONTACT US | PRIVACY POLICY | TERMS OF USE | Sitemap



