तमिलनाडु के चेन्नई में 84 साल के एक बड़े ग्रेनाइट कारोबारी वीरमणि और उनके दो बिजनेस पार्टनर 64 साल के महेंद्र सिन्हा और उनकी 60 साल की पत्नी शांती को एक नाबालिग लड़की के साथ यौन शोषण करने के आरोप में पुलिस की एंटी-वाइस टीम ने पकड़ लिया है। यह पूरा मामला तब सामने आया था जब एक पेन ड्राइव में वीडियो मिला था। इस केस में पहले पुलिस इसे बंद करना चाहती थी लेकिन कोर्ट के कड़े आदेश के बाद दोबारा जांच शुरू हुई और सभी आरोपी जेल भेज दिए गए।
बच्चों की भलाई के लिए काम करने वाले एक वॉलंटियर ने 6 अक्टूबर 2025 को चेन्नई पुलिस को एक पेन ड्राइव सौंपी थी। इस पेन ड्राइव के अंदर एक वीडियो था जिसमें एक बुजुर्ग आदमी एक नाबालिग लड़की के साथ गलत हरकत करता हुआ दिखाई दे रहा था। शुरुआती जांच के बाद इस मामले को चेन्नई की सेंट्रल क्राइम ब्रांच की एंटी-वाइस टीम को सौंप दिया गया था।
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पुलिस की दलीलें
टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक एंटी-वाइस टीम ने अपनी शुरुआती जांच पूरी करने के बाद पोक्सो एक्ट की विशेष अदालत में एक क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी जिसमें कहा गया था कि इस केस में आगे कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती। पुलिस ने कोर्ट को बताया था कि वीडियो डिजिटल कैमरा रिकॉर्डिंग डेटा के हिसाब से साल 2019 का है और उसमें जो डिजिटल डेटा मिला है। उससे उस नाबालिग लड़की की कोई पहचान या उसका सही पता और ठिकाना नहीं मिल पा रहा है।
इस मामले में जिन पति-पत्नी पर मुख्य आरोपी की मदद करने का शक था उन्होंने भी पुलिस से पूछताछ में कहा था कि उनके घर पर ऐसा कुछ नहीं हुआ और न ही उन्होंने या मुख्य आरोपी ने ऐसी किसी लड़की को देखा है। 19 अगस्त को विशेष अदालत के जज ने पुलिस की इस क्लोजर रिपोर्ट को मानने से साफ मना कर दिया। जज ने आदेश दिया कि इस मामले को बंद नहीं किया जा सकता और इसकी नए सिरे से आगे की जांच की जानी चाहिए। साथ ही यह भी कहा गया कि इसकी प्रगति रिपोर्ट 4 हफ्ते के अंदर कोर्ट को सौंपनी होगी।
मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी
कोर्ट के इस कड़े आदेश के बाद जब सेंट्रल क्राइम ब्रांच की एंटी-वाइस टीम ने जांच को आगे बढ़ाया तो पुलिस को पता चला कि वीडियो में दिख रहा वह बुजुर्ग आदमी असल में उद्योगपति वीरमणि है। वह जेम्स ग्रेनाइट्स कंपनी का संस्थापक है और चेन्नई के अडयार इलाके में रहता है।
पुलिस की आगे की जांच में यह बात भी सामने आई कि वीरमणि ने चेन्नई के तेयनामपेट इलाके में एक मकान किराए पर ले रखा था। इस किराए के घर की देखभाल करने और कामकाज संभालने की जिम्मेदारी उसने महेंद्र सिन्हा और उनकी पत्नी शांती को दे रखी थी। उसी घर में एक नाबालिग लड़की काम करती थी और वीरमणि का उस घर में लगातार आना-जाना था। वहीं पर उसने उस लड़की के साथ गलत काम किया था। इन तीनों लोगों को पुलिस ने शनिवार के दिन गिरफ्तार कर लिया और अदालत के आदेश पर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया।
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पुलिस कमिश्नर के निर्देश
इस मामले के सामने आने के बाद चेन्नई के पुलिस कमिश्नर ए. अमलराज ने अपने अधीनस्थों को कड़े निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि वे इस बात की भी गहराई से जांच करें कि क्या उस नाबालिग लड़की को किसी एक व्यक्ति ने निशाना बनाया था या एक से ज्यादा लोगों ने गलत काम किया था या नहीं। इसके साथ ही, वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने यह पता लगाने के लिए भी एक आंतरिक जांच बिठा दी है कि अक्टूबर 2025 में शिकायत मिलने और पेन ड्राइव सामने आने के बाद से यह संवेदनशील मामला इतने लंबे समय तक बिना किसी ठोस कार्रवाई के फाइलों में क्यों दबा रहा और इसमें समय पर एक्शन क्यों नहीं लिया गया।