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333 रुपये में बुक किया रूम, नहीं मिला वेस्टर्न टॉयलेट; अब 20000 का मुआवजा मिलेगा

एक बुजुर्ग को रेलवे की लापरवाह के बदले 20 हजार रुपये का मुआवजा मिलेगा। बुजुर्ग ने 333 रुपये में रेलवे रूम बुक किया था। मामला दो साल पुराना है।

Indian Railways

प्रतीकात्मक फोटो। (AI-generated image)

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एक 72 वर्षीय बुजुर्ग ने 333 रुपये में रेलवे के रिटायरिंग रूम की बुकिंग की। आईआरसीटीसी की वेबसाइट में वेस्टर्न टॉयलेट दिखाया गया था। मगर जब वे वहां पहुंचे तो उन्हें इंडियन टॉयलेट मिला। इसके बाद उसने रुम का इस्तेमाल नहीं किया। उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कर रिफंड की मांग की। उन्होंने रेलवे पर अनुचित व्यवहार और सेवा में कमी का आरोप लगाया। अपने 333 रुपये की ब्याज समेत वापसी, मुकदमेबाजी खर्च और मानसिक पीड़ा के मुआवजे के तौर पर 10 हजार रुपये की मांग की। 

 

बुजुर्ग की शिकायत पर चंडीगढ़ जिला आयोग ने 2 मार्च को 9 फीसद ब्याज समेत 333 रुपये की वापसी और मानसिक पीड़ा और मुकदमेबाजी के खर्च के तौर पर 3000 रुपये देने का निर्देश दिया। जिला आयोग के फैसले के खिलाफ बुजुर्ग ने राज्य आयोग में अपील की। आयोग ने अपने आदेश में धनराशि को अपर्याप्त बताया। अपने फैसले में मुआवजे की राशि को बढ़ाकर 20 हजार रुपये कर दिया। 22 सितंबर को राज्य आयोग ने कहा, 'हमारे विचार में दी गई राशि मात्र सांकेतिक है और उचित मुआवजे के मानक से काफी कम है।'

 

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वेबसाइट में जो दिखा, वह हकीकत में नहीं मिला

12 मई 2024 को 72 वर्षीय भारतेंदु सूद ने आईआरसीटीसी की वेबसाइट से राजस्थान के चित्तौड़गढ़ रेलवे स्टेशन पर एक रिटायरिंग रूम बुक किया था। वेबसाइट में रूम में वेस्टर्न टॉयलेट दिखाया गया था। स्टेशन पहुंचने पर भारतेंदु सूद को कमरे में इंडियन टॉयलेट मिला। उन्होंने अधिकारियों से मामले की शिकायत की और बिना इस्तेमाल के ही चाबियां लौटा दी। अधिकारियों ने भी अपनी गलती मानी और धनराशि लौटाने की बात कही। दरअसल, बुजुर्ग होने की वजह से भारतेंदु सूद को इंडियन टॉयलेट इस्तेमाल करने में दिक्कत होती है। इस वजह से उन्होंने रूम इस्तेमाल नहीं किया।

पैसा लौटाने से किया मना तो पहुंचे आयोग

बाद में पश्चिमी रेलवे ने कहा कि उन्होंने सेवा का लाभ उठाया है। इस आधार पर धनराशि लौटाने से मना कर दिया। रेलवे के इस व्यवहार के खिलाफ उन्होंने चंडीगढ़ जिला उपभोक्ता आयोग में मामला दर्ज कराया। जिला आयोग ने 3000 रुपये मुआवजा और 9 फीसद ब्याज के साथ धनराशि लौटाने का निर्देश दिया।

 

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अपने जवाब में आईआरसीटीसी ने तर्क दिया कि चित्तौड़गढ़ रिटायरिंग रूम का प्रबंधन रेलवे करता है। यात्री आरक्षण प्रणाली के माध्यम से रेलवे टेडा से पोर्टल की जानकारी अपडेट होती है। डेटा में बदलाव करने में उसकी कोई भूमिका नहीं होती है। रेलवे ने भी कहा कि यह मामला आईआरसीटी और रतलाम डिवीजन के तहत चित्तौड़गढ़ रिटायरिंग रूप से जुड़ा है।

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