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दरभंगा में बीडीओ के छह ठिकानों पर EOU की दबिश, 89 लाख की काली कमाई के सबूत मिले

बिहार में आर्थिक अपराध इकाई ने बुधवार को केवटी के बीडीओ के छह ठिकानों पर दबिश दी है। पैतृक गांव से ससुराल तक रिकॉर्ड खंगाला गया। बताया जा रहा है कि लंबे समय से बीडीओ की निगरानी चल रही थी।

Bihar News

प्रतीकात्मक फोटो। (AI Generated Image)

बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई के तहत आर्थिक अपराध इकाई ने बुधवार सुबह दरभंगा जिले के केवटी प्रखंड के बीडीओ चंद्रमोहन पासवान के छह ठिकानों पर एक साथ छापेमारी कर प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा दिया। आय से अधिक संपत्ति मामले में हुई इस कार्रवाई में टीम को नकदी, जमीन से जुड़े दस्तावेज, स्वर्ण आभूषण और कई अहम वित्तीय रिकॉर्ड मिलने की चर्चा है।


ईओयू की यह कार्रवाई दरभंगा, मधुबनी और सीतामढ़ी जिले में एक साथ चल रही है। जांच की कमान डीएसपी राजन कुमार के नेतृत्व में संभाली जा रही है। सुरक्षा व्यवस्था इतनी कड़ी रही कि केवटी स्थित सरकारी आवास और प्रखंड कार्यालय के बाहर भारी पुलिस बल तैनात किया गया।

 

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किन-किन ठिकानों पर हुई रेड

आर्थिक अपराध इकाई की टीम ने बुधवार तड़के जिन ठिकानों पर छापेमारी शुरू की, उनमें केवटी प्रखंड मुख्यालय परिसर स्थित सरकारी आवास, बीडीओ कार्यालय, दरभंगा जिले के बहादुरपुर थाना क्षेत्र स्थित निजी आवास, मधुबनी जिले के बाबूबरही स्थित पैतृक घर, सीतामढ़ी स्थित ससुराल अन्य संदिग्ध ठिकाने और निवेश से जुड़े स्थान शामिल हैं।

89 लाख से अधिक की संदिग्ध संपत्ति

बिहार पुलिस मुख्यालय की आर्थिक अपराध इकाई की प्रारंभिक जांच में चंद्रमोहन पासवान के पास करीब 89 लाख 13 हजार 500 रुपये की आय से अधिक संपत्ति होने के प्रथम दृष्टया साक्ष्य मिले हैं। जांच एजेंसी का दावा है कि यह संपत्ति उनकी ज्ञात आय से लगभग 81.03 प्रतिशत अधिक है। इसी आधार पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) के तहत आर्थिक अपराध थाना कांड संख्या 09/26 दर्ज किया गया है।

कार्यालय खोलकर शुरू हुई फाइलों की पड़ताल

केवटी प्रखंड कार्यालय पहुंची ईओयू टीम ने कार्यालय खुलवाकर रजिस्टर, फाइलें, आलमारी और सरकारी दस्तावेजों की गहन जांच शुरू की। प्रधान लिपिक के पहुंचने के बाद आधिकारिक प्रक्रिया पूरी कर कई महत्वपूर्ण अभिलेखों को खंगाला गया। जांच एजेंसी बैंक खातों, जमीन निवेश, वित्तीय लेनदेन और संपत्ति खरीद से जुड़े रिकॉर्ड का मिलान कर रही है। इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और डिजिटल दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है।

 

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लंबे समय से निगरानी में थे बीडीओ

सूत्रों का कहना है कि आर्थिक अपराध इकाई काफी समय से वित्तीय गतिविधियों पर नजर रखे हुए थी। विश्वस्त सूचना और सत्यापन के बाद विशेष न्यायालय निगरानी, मुजफ्फरपुर से तलाशी वारंट प्राप्त कर यह कार्रवाई शुरू की गई। बताया जा रहा है कि बीडीओ पर पहले सरकारी लकड़ी के दुरुपयोग का आरोप भी लग चुका है। हालांकि उस मामले में क्या कार्रवाई हुई थी, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

कार्रवाई पूरी होने के बाद सामने आएगी पूरी तस्वीर

फिलहाल ईओयू की अलग-अलग टीमें कई स्थानों पर दस्तावेजों की जांच में जुटी हैं। अधिकारियों का कहना है कि तलाशी अभियान पूरा होने के बाद ही बरामदगी और संपत्तियों को लेकर विस्तृत जानकारी सार्वजनिक की जाएगी, लेकिन शुरुआती जांच ने इतना जरूर साफ कर दिया है कि यह मामला बिहार में सरकारी अधिकारियों की संपत्ति और भ्रष्टाचार जांच से जुड़े बड़े मामलों में शामिल हो सकता है।


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