उत्तर प्रदेश के कानपुर में पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो 10 हजार रुपये में हाईस्कूल से लेकर पीएचडी तक की फर्जी डिग्री बनाकर देती थी। पुलिस ने आशंका जताई है कि यह गिरोह सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि कनाडा में भी पीडीएफ के जरिए फर्जी डिग्री सप्लाई करते थे। जब पुलिस ने छापेमारी की थी तो उन्हें कई विश्वविद्यालयों के 141 रबर स्टांप मिले। साथ ही 8 विश्वविद्यालयों की 62 फर्जी डिग्रियां भी बरामद हुईं। पुलिस का दावा है कि गिरोह का मुख्य सरगना पिछले 13 साल से अपने भाई के साथ मिलकर फर्जी मार्कशीट और डिग्रियां बनाकर बेच रहा था। पुलिस ने गिरोह के चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
यह मामला कानपुर के बेकनगंज इलाके का है, जहां मंगलवार को पुलिस ने छापेमारी की थी। इसके बाद चारों आरोपियों को जेल भेज दिया गया। पुलिस ने गिरोह के सरगना जया-उल-हसन उर्फ समीर को गिरफ्तार किया। साथ ही, उसके भाई हसन आसिफ को भी गिरफ्तार किया गया। इसके अलावा आमिर अहमद और नूरुद्दीन को भी गिरफ्तार किया गया है। पुलिस अधिकारी रघुबीर लाल ने बताया कि ये लोग नकली डिग्रियां इस तरह तैयार करते थे कि वे बिल्कुल असली लगती थीं।
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कौन-कौन से विश्वविद्यालयों की बनाते थे फर्जी डिग्रियां?
पुलिस की शुरुआती जांच के मुताबिक यह गिरोह कई विश्वविद्यालयों की नकली डिग्रियां बनाता था। इनमें से 8 विश्वविद्यालयों की फर्जी डिग्रियों के दस्तावेज पुलिस को मिले हैं।
1.अन्नामलाई विश्वविद्यालय
2.लिंगायत विद्यापीठ
3.कर्नाटक स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी
4.उस्मानिया यूनिवर्सिटी
5.डी.वाई. पाटिल विद्यापीठ
6.अलगप्पा यूनिवर्सिटी
7.आचार्य नागार्जुन यूनिवर्सिटी
8.छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय
फिलहाल इन विश्वविद्यालयों की फर्जी डिग्रियों के सबूत मिले हैं। इसके अलावा और भी यूनिवर्सिटी हो सकते हैं, जिनकी फर्जी डिग्रियां बनाई गई हों। पुलिस ने बताया कि गिरोह फिशिंग वेबसाइट्स के जरिए नकली ऑनलाइन वेरिफिकेशन सिस्टम भी तैयार करता था, जिससे दस्तावेज जांच के दौरान असली प्रतीत होते थे।
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कैसे हुआ गिरोह का पर्दाफाश?
पुलिस ने बताया कि वह किदवई नगर में पकड़े गए एक अन्य गिरोह की जांच कर रही थी। इसी दौरान उन्हें आमिर के बारे में जानकारी मिली, जिसने पकड़े गए गिरोह के खाते में 10 करोड़ रुपये का ट्रांजेक्शन कराया था। इसके बाद पुलिस ने आमिर की गतिविधियों पर निगरानी रखी तो पता चला कि ये लोग फर्जी डिग्रियां बनाते हैं।
इसके बाद डीसीपी ने अपना नकली ग्राहक बनाकर इस गिरोह से फर्जी डिग्री बनवाने की योजना बनाई। गिरोह ने उन्हें बीटेक की एक फर्जी डिग्री बनाकर दी। उसे देखकर खुद डीसीपी भी चौंक गए, क्योंकि वह डिग्री बिल्कुल असली जैसी दिखाई दे रही थी।