हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में धार्मिक यात्रा के दौरान लापरवाही का ऐसा मामला सामने आया है, जिसने हर माता-पिता को सोचने पर मजबूर कर दिया है। उत्तर प्रदेश से हिमाचल के शक्तिपीठों के दर्शन के लिए आया एक परिवार चाय-नाश्ता करने के बाद टैम्पो ट्रैवलर में सवार होकर आगे निकल गया लेकिन उनका आठ वर्षीय बच्चा धुसाड़ा स्थित ढाबे पर ही छूट गया। सबसे हैरानी की बात यह रही कि परिवार को करीब 80 किलोमीटर का सफर तय करने के बाद भी यह एहसास नहीं हुआ कि उनका बच्चा साथ नहीं है।
मासूम जब काफी देर तक अपने माता-पिता और परिवार के सदस्यों को आसपास नहीं देख पाया तो घबरा गया और रोने लगा। ढाबे पर मौजूद लोगों और स्थानीय लोगों ने बच्चे को अकेला देखा तो तुरंत पुलिस को सूचना दी। इसके बाद अंब पुलिस ने बच्चे को सुरक्षित अपनी निगरानी में लिया और शुरू की उसके परिवार की तलाश।
यह भी पढ़ें: नौकरी गई तो युवक ने किया आत्महत्या का प्रयास, नेरचौक मेडिकल कॉलेज में बवाल
ढाबे पर रह गया बच्चा
जानकारी के अनुसार लखनऊ के इंद्रा कस्बा थाना सदर क्षेत्र से करीब 21 यात्रियों का जत्था धार्मिक यात्रा पर हिमाचल आया था। जत्था 30 सितंबर को ट्रेन से जम्मू पहुंचा था। वहां माता वैष्णो देवी के दर्शन के बाद सभी यात्री टैम्पो ट्रैवलर से हिमाचल के विभिन्न शक्तिपीठों की यात्रा कर रहे थे। मंगलवार को जत्थे ने माता ज्वालाजी के दर्शन किए। इसके बाद चिंतपूर्णी होते हुए माता नैना देवी जाने के लिए रवाना हुआ।
रास्ते में दोपहर के समय धुसाड़ा में सभी यात्री चाय-नाश्ते के लिए एक ढाबे पर रुके। नाश्ता करने के बाद यात्री वापस वाहन में बैठ गए और टैम्पो ट्रैवलर आगे बढ़ गया लेकिन इस दौरान आठ वर्षीय बच्चा ढाबे पर ही रह गया। किसी ने यह सुनिश्चित नहीं किया कि सभी बच्चे और परिवार के सदस्य वाहन में वापस बैठ चुके हैं।
रोता मिला मासूम, स्थानीय लोगों ने संभाला
कुछ देर बाद ढाबे पर मौजूद लोगों की नजर अकेले बैठे बच्चे पर पड़ी। बच्चे के रोने पर उससे परिवार के बारे में जानकारी लेने की कोशिश की गई, लेकिन कम उम्र होने के कारण वह अपने परिवार और यात्रा के बारे में ज्यादा स्पष्ट जानकारी नहीं दे पाया। टकोली निवासी विशाल ठाकुर ने बच्चे को अकेला देखकर मामले की गंभीरता समझी और 112 हेल्पलाइन तथा अंब पुलिस को सूचना दी। पुलिस टीम मौके पर पहुंची और बच्चे को सुरक्षित अपने संरक्षण में लिया। अब पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी बच्चे के माता-पिता आखिर गए कहां हैं?
यह भी पढ़ें: ट्राउट मछली से तगड़ी कमाई करेगा कुल्लू, सरकार बनाएगी ब्रूड बैंक
CCTV बना सबसे बड़ा सुराग
बच्चे के पास गाड़ी का नंबर या परिवार का मोबाइल नंबर नहीं था। ऐसे में पुलिस ने तकनीक का सहारा लिया। अंब चौक और आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली गई। फुटेज में उस टैम्पो ट्रैवलर की पहचान की गई, जिसमें परिवार सवार होकर आगे गया था। पुलिस ने वाहन का नंबर ट्रेस किया और पहले उसके मालिक से संपर्क साधा। इसके बाद चालक से फोन पर बात की गई। चालक को जब पुलिस ने बताया कि आठ वर्षीय बच्चा धुसाड़ा के ढाबे पर छूट गया है तो परिवार के होश उड़ गए। उन्हें तब जाकर पता चला कि जिस बच्चे को वे अपने साथ समझकर आगे निकल गए थे, वह वास्तव में पीछे ही रह गया था।
पुलिस की सूचना के बाद बच्चे के माता-पिता नैना देवी से वापस अंब पहुंचे। पुलिस ने आवश्यक कागजी और कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद बच्चे को सुरक्षित उसके माता-पिता के सुपुर्द कर दिया। डीएसपी अंब अनिल पटियाल ने बताया कि बच्चा सुरक्षित है और उसे उसके परिजन को सौंप दिया गया है। पुलिस की तत्परता और स्थानीय लोगों की संवेदनशीलता से मासूम को समय रहते उसके परिवार से मिलाया जा सका।
80 किलोमीटर दूर निकल गए थे परिजन
यह घटना भले ही अंततः सुखद रही, लेकिन इसने सामूहिक धार्मिक यात्राओं में बच्चों की सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। 21 यात्रियों के पूरे जत्थे के एक साथ वाहन में बैठने के बावजूद एक आठ वर्षीय बच्चा पीछे कैसे छूट गया? वाहन चलने से पहले क्या यात्रियों की संख्या या बच्चों की मौजूदगी की जांच नहीं की गई? अगर ढाबे पर मौजूद लोगों की नजर बच्चे पर नहीं पड़ती या पुलिस को सूचना देने में देरी होती तो मामला गंभीर रूप ले सकता था।
इस घटना में एक तरफ परिवार की बेहद गंभीर लापरवाही सामने आई, वहीं दूसरी ओर स्थानीय लोगों की संवेदनशीलता, CCTV की मदद और अंब पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने संभावित अनहोनी को टाल दिया।
यह भी पढ़ें: गोल्ड लेकर लौटीं हिमाचल की बेटियां, सरकार देगी 1-1 करोड़ और नौकरी
यात्रियों के लिए बड़ा सबक
धार्मिक यात्रा हो या पारिवारिक टूर, बच्चों के साथ सफर करते समय केवल वाहन में बैठ जाना पर्याप्त नहीं है। वाहन रवाना होने से पहले परिवार या यात्रा समूह के जिम्मेदार व्यक्ति को यात्रियों की संख्या और खासकर बच्चों की मौजूदगी की पुष्टि करनी चाहिए। इस मामले में महज कुछ मिनट की असावधानी के कारण एक मासूम अपने परिवार से करीब 80 किलोमीटर दूर छूट गया।