लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की शुरुआती दिनों में ही सामने आई खामियों ने निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक्सप्रेसवे के करीब 23 अलग-अलग स्थानों पर सड़क धंसने के मामले सामने आने के बाद अब इसकी निर्माण से जुड़ी करीब 800 पन्नों की फाइलों की पड़ताल की जाएगी। IIT खड़गपुर की टीम ने मौके पर करीब 7 घंटे तक जांच और वीडियो रिकॉर्डिंग कराई तथा सड़क से करीब 30 नमूने लिए हैं। जांच के बाद टीम अपनी रिपोर्ट भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण मुख्यालय को सौंपेगी। इसके बाद यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि एक्सप्रेसवे की सड़क इतनी जल्दी क्यों धंस रही है और इसके लिए जिम्मेदारी किसकी बनती है।
कानपुर एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट की जांच के लिए आईआईटी खड़गपुर की टीम मौके पर पहुंची थी। टीम ने एक्सप्रेसवे पर चल रहे हर काम की वीडियो रिकॉर्डिंग कराई और मौके पर मौजूद कार्यदायी संस्था, स्वतंत्र एजेंसी तथा एनएचएआई के अधिकारियों से सवाल-जवाब किए। जांच के दौरान टीम ने करीब 30 नमूने भी लिए। इनमें चार प्रमुख स्थानों पर सड़क अधिक धंसने वाले हिस्से और कुछ सामान्य स्थिति वाले ग्रीन फील्ड के हिस्से शामिल हैं।
अब दोनों तरह के नमूनों की जांच कर उनकी गुणवत्ता में अंतर देखा जाएगा।जांच में एक अहम बिंदु जल निकासी व्यवस्था भी सामने आया। टीम ने पाया कि कुछ स्थानों पर सड़क का लेवल ड्रेनेज सिस्टम यानी नालियों से ऊपर था। इससे बारिश का पानी आसानी से बाहर नहीं निकल पाने की आशंका जताई गई।आईआईटी के निर्देश पर कुछ नालियां तोड़ी गईं और फिर सड़क पर पानी डालकर देखा गया कि पानी किस तरह नालियों तक पहुंचता है। जांच में कुछ जगह पानी नालियों से निकलने के बजाय सड़क पर जमा होता दिखाई दिया।
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14 जगह फिर धंसी सड़क, पुरानी सड़कें उखड़ रहीं
पिछले 24 घंटे में लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर 14 और जगह सड़क धंसने की बात सामने आई है। उन्नाव से लखनऊ के बीच कई स्थानों पर सड़क की हालत खराब हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक इन जगहों पर सड़क धंसने के साथ पुराना पेवमेंट भी उखड़ रहा है। उन्नाव से लखनऊ लेन पर किलोमीटर संख्या 28.6 से 63.9 के बीच बाबा खेड़ा, अमरसस, भवानी खेड़ा, रावल, बंडारा, अचलेश्वर और बैंटी गढ़ई सिंह गांव के पास सड़क धंसने की शिकायत सामने आई है।
रिपोर्ट के अनुसार कई जगहों पर सड़क के किनारे करीब छह फीट लंबा और चार फीट गहरा गड्ढा बन गया है। रविवार को बारिश के बाद हालात और खराब हो गए। कई स्थानों पर नालियां पानी से भर गईं।बताया गया है कि एक्सप्रेसवे का निर्माण करीब 4200 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है। जुलाई में उद्घाटन के बाद महज कुछ ही दिनों में सड़क धंसने और पेवमेंट उखड़ने की घटनाओं ने निर्माण एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
120 की रफ्तार का दावा, गड्ढों के कारण 50-80 की स्पीड
एक्सप्रेसवे को करीब 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से वाहनों के चलने के लिए तैयार किए जाने का दावा किया गया था। सड़क पर बने गड्ढों और उखड़े पेवमेंट के कारण वाहन चालकों को परेशानी हो रही है। लखनऊ जा रहे मोहम्मद आरिफ ने बताया कि वाहन चलाने में डर लगता है और गाड़ी की रफ्तार 50 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे के बीच रखनी पड़ रही है। 45 मिनट में लखनऊ पहुंचने का दावा था, लेकिन अब इससे ज्यादा समय लग रहा है। उन्नाव-लखनऊ लेन पर रावत गांव के पास तीन नए पेव सामने आए हैं। इसी लेन पर किलोमीटर संख्या 39.7 पर 100 मीटर के दायरे में नया पेवमेंट किया जा रहा है। वहीं लखनऊ से उन्नाव जाने वाली लेन पर इसराइल खेड़ा के पास भी सड़क उखड़ने की शिकायत सामने आई है।
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NHAI अधिकारी बोले- रिपोर्ट के बाद होगा फैसला
क्षेत्रीय अधिकारी गौतम विशाल के मुताबिक टीम ने मौके पर जांच कर ली है। अगले करीब 12 दिनों में रिपोर्ट आने की संभावना है। उनका कहना है कि पिछले दो दिनों से एक्सप्रेसवे के ग्रीन फील्ड पर कोई नई समस्या सामने नहीं आई है। रिपोर्ट आने के बाद एनएचएआई के सुझाव के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि करीब 4200 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस एक्सप्रेसवे की सड़क उद्घाटन के कुछ ही समय बाद बार-बार क्यों धंस रही है? आईआईटी खड़गपुर की तकनीकी रिपोर्ट और 800 पन्नों की निर्माण फाइलों की पड़ताल के बाद ही इसकी वास्तविक वजह सामने आने की उम्मीद है।