बिहार के भोजपुर जिले में चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले ने नया मोड़ ले लिया है। अब इस मामले में जगदीशपुर के SDPO, शाहपुर थानाध्यक्ष और एनकाउंटर में शामिल अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ शाहपुर थाने में FIR दर्ज की गई है। इस कार्रवाई के बाद पूरे मामले की जांच और तेज हो गई है।
बताया जा रहा है कि मृतक के परिजन की शिकायत और एनकाउंटर को लेकर उठ रहे सवालों के आधार पर पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। भरत तिवारी की मौत के बाद से ही परिजन इसे फर्जी एनकाउंटर बताते रहे हैं और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
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न्यायिक जांच के आदेश
भरत तिवारी की मौत के बाद उनके परिवार और गांव के लोगों ने पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए थे। परिजन का आरोप है कि यह कोई मुठभेड़ नहीं, बल्कि सुनियोजित फर्जी एनकाउंटर था। मामले ने तूल पकड़ा तो राज्य की राजनीति भी गरमा गई और सरकार ने इसकी न्यायिक जांच के आदेश दे दिए। हालांकि, परिवार का कहना है कि सिर्फ जांच की घोषणा से उन्हें संतोष नहीं है। उनका आरोप है कि मामले से जुड़े कई अहम सबूत सामने आने के बावजूद अब तक दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं की गई।
परिवार ने दी सामूहिक आत्महत्या की चेतावनी
घटना के सात दिन बाद भी परिवार का गुस्सा और दर्द कम नहीं हुआ है। परिजन ने न्यायिक जांच पर भरोसा जताने से इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि अगर उन्हें न्याय नहीं मिला तो पूरा परिवार सामूहिक आत्महत्या करने को मजबूर होगा। मृतक के भाई चंदन तिवारी ने कहा कि न्याय मिलने में देरी हो रही है, जबकि दोषियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने कहा, 'हमें सिर्फ जांच नहीं, बल्कि दोषियों को सजा चाहिए। अगर न्याय नहीं मिला तो हमारा पूरा परिवार आत्महत्या कर लेगा।'
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मृतक के पिता काशीनाथ तिवारी ने बताया कि घटना के समय भरत तिवारी के पास दो मोबाइल फोन थे। पुलिस ने एक मोबाइल फोन और उनकी मोटरसाइकिल लौटा दी है लेकिन दूसरा निजी मोबाइल अब भी पुलिस के कब्जे में है।