उत्तर प्रदेश के झांसी की चर्चित महिला ऑटो ड्राइवर अनीता चौहान सोमवार (5 जनवरी) को संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाई गईं। परिवार का आरोप है कि उनकी हत्या की गई है। परिजनों के मुताबिक, अनीता का किसी युवक से झगड़ा हुआ था और रात में हुई कहासुनी के बाद उसकी हत्या कर दी गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी सामने आया है कि अनीता को गोली मारी गई थी। अनीता झांसी की पहली महिला ऑटो-रिक्शा चालक थीं, जिन्हें दिसंबर 2021 में यूपी पुलिस ने सम्मानित किया था।
पुलिस के अनुसार, सुबह एक PCR कॉल मिली थी, जिसमें बताया गया कि एक ऑटो रिक्शा पलट गया है और उसके नीचे एक महिला फंसी हुई है। शुरुआती तौर पर ऐसा लग रहा था कि महिला की मौत ऑटो पलटने से हुई है। हालांकि, पुलिस परिवार द्वारा लगाए गए आरोपों की भी गंभीरता से जांच कर रही है।
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पोस्टमार्टम में क्या निकला?
पुलिस जब मौके पर पहुंची तो महिला मृत अवस्था में मिली। उसके सिर से खून बह रहा था। शुरुआती जांच में पुलिस को लगा कि मौत सड़क हादसे में हुई है लेकिन बाद में पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खुलासा हुआ कि महिला की गोली मारकर हत्या की गई थी। जांच में पता चला कि उसके गले के पास गोली फंसी हुई थी। रिपोर्ट के अनुसार उसे कनपटी में गोली मारी गई, जो अंदर जाकर गले में अटक गई। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। पुलिस ने इस मामले में तीन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
पुलिस जांच में क्या मिला?
पुलिस जांच में पता चला कि अनीता मुकेश झा के साथ रिलेशनशिप में थी। दोनों ने इस रिश्ते को लगभग 4 महीने पहले ही खत्म कर दिया था। पुलिस को शक है कि रिलेशनशिप जारी रखने से इनकार करने के कारण उनकी हत्या हुई है। पुलिस ऐसा मान रही है कि मुकेश ने ही हत्या की साजिश रची है।
पुलिस ने झांसी में बरुआ सागर बांध के पास मुकेश की कार बरामद की है। एक पुलिस अधिकारी ने पुष्टि की कि CCTV फुटेज से पता चला है कि उनकी मौत से कुछ घंटे पहले वही गाड़ी अनीता के ऑटो-रिक्शा का पीछा कर रही थी। जांच में यह बात सामने आने के बाद मुकेश को मुख्य आरोपी बनाया गया है लेकिन वह अभी तक फरार है। उसके बेटे और साले को भी हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।
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25000 रुपये का इनाम घोषित
पुलिस ने बताया कि अनीता के परिवार ने मुकेश के खिलाफ हत्या का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई है। उसकी गिरफ्तारी की जानकारी देने वाले को 25,000 रुपये का इनाम घोषित किया गया है। पुलिस के अनुसार, अनीता ने पहले मुकेश के खिलाफ आपराधिक धमकी और उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई थी लेकिन उसे गिरफ्तार नहीं किया गया था क्योंकि इन अपराधों में सात साल से कम की सजा थी।
कैसे बनी थी ऑटो-ड्राइवर?
अनीता चौधरी एक प्राइवेट कंपनी में काम करती थीं। उन्होंने वहां करीब 15 साल तक नौकरी की। साल 2020 में किसी बात को लेकर उनकी अपने सुपरवाइजर से कहासुनी हो गई। इसके बाद उन्होंने महाराष्ट्र जाकर काम करने का फैसला किया लेकिन उसी दौरान कोरोना महामारी फैल गई। महाराष्ट्र से लौटने के बाद उनके परिवार की आर्थिक स्थिति और खराब हो गई।
परिवार के विरोध के बावजूद अनीता ने ऑटो खरीदा और शहर में उसे चलाने लगीं। अपने इस साहसिक कदम और मेहनत के लिए अनीता को सरकार और प्रशासन की ओर से कई बार सम्मानित किया जा चुका है।