नेपाल के तराई क्षेत्र और गंडक नदी के जलग्रहण क्षेत्र में हो रही भारी वर्षा के मद्देनजर बिहार में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। मौसम विभाग ने अगले 48 घंटों में भारी बारिश का पूर्वानुमान जारी किया है। इसके बाद राज्य सरकार ने अलर्ट जारी किया। संभावित बाढ़ की परिस्थितियों को देखते हुए गंडक, बागमती और कोसी के किनारे बसे संवेदनशील जिलों में प्रशासन को अलर्ट रखा गया।
मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में आपदा प्रबंधन विभाग में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक बुलाई। बैठक में प्रधान सचिव आपदा प्रबंधन संतोष कुमार मल्ल, सचिव जल संसाधन डॉ. चंद्रशेखर सिंह समेत सीतामढ़ी, पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, शिवहर, वैशाली, गोपालगंज, सारण, मधुबनी, दरभंगा, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर, सहरसा, सुपौल, मधेपुरा, कटिहार, खगड़िया और बेगूसराय के जिलाधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़े। बैठक में अपर सचिव मो. नदीमुल गफ्फार सिद्दीकी, संयुक्त सचिव अविनाश कुमार और उप सचिव अमन प्रीत सिंह भी मौजूद रहे।
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17 जिलों में विशेष अलर्ट
बारिश की स्थिति को देखते हुए सीतामढ़ी, पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, शिवहर, वैशाली, गोपालगंज, सारण, मधुबनी, दरभंगा, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर, सहरसा, सुपौल, मधेपुरा, कटिहार, खगड़िया और बेगूसराय सहित अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखने का निर्देश दिया। ये सभी जिले गंडक, बागमती और कोसी नदी के किनारे बसे हैं और हर साल बाढ़ से प्रभावित होते हैं।
मुख्य सचिव ने जिला प्रशासन को नदी के जलस्तर एवं प्रवाह, निचले इलाकों, तटबंधों, नदी किनारे बसे गांवों, पुल-पुलियों और संपर्क मार्गों की लगातार निगरानी करने को कहा है। उन्होंने कहा कि हर घंटे जलस्तर की रिपोर्ट भेजी जाए और किसी भी तटबंध पर दबाव दिखने पर तुरंत जल संसाधन विभाग को सूचना दी जाए। कोसी नदी के जलस्तर में फिलहाल गिरावट दर्ज की गई है, लेकिन इसके बावजूद कोसी नदी के आसपास स्थित जिलों को सतर्कता बरतने का निर्देश है।
जल संसाधन विभाग के सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने बताया कि नेपाल में भारी बारिश के कारण गंडक नदी में पानी बढ़ने की संभावना है। वाल्मीकिनगर बराज से पानी छोड़ा जा सकता है। ऐसी स्थिति में पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण और गोपालगंज में नदी के किनारे बसे गांवों में पानी घुस सकता है। विभाग ने सभी तटबंधों पर इंजीनियरों की तैनाती कर दी गई है।
आपदा बचाव टीमें सतर्क
संभावित परिस्थिति से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए NDRF और SDRF की टीमों को सतर्क रखा गया है। सभी संबंधित जिलों में नाव, लाइफ जैकेट, रेस्क्यू उपकरण और अन्य आवश्यक संसाधनों को पर्याप्त संख्या में तैयार एवं उपलब्ध रखने को कहा गया। मुख्य सचिव ने कहा कि हर जिले में नावों की गिनती कर ली जाए और नाविकों को अलर्ट पर रखा जाए। संभावित प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को अग्रिम चेतावनी दी जाए। जरूरत पड़ने पर प्रभावित आबादी को सुरक्षित स्थानों पर समय रहते पहुंचाने का निर्देश भी दिया गया।
24 घंटे एक्टिव कंट्रोल रूम
उन्होंने कहा कि निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को पहले ही चेतावनी दी जाए कि वे ऊंचे स्थानों पर चले जाएं। पशुओं को भी सुरक्षित जगह ले जाने की व्यवस्था की जाए। जिला प्रशासन, पुलिस, जल संसाधन विभाग, आपदा प्रबंधन विभाग एवं अन्य संबंधित विभागों के बीच निरंतर समन्वय एवं संचार बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। सभी उपलब्ध संसाधनों को स्टैंडबाय और एक्टिव मोड में रखा जा रहा है, ताकि आवश्यकता पड़ने पर बचाव एवं राहत कार्य तत्काल प्रारंभ किया जा सके। राज्य सरकार द्वारा स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। कंट्रोल रूम 24 घंटे काम करेगा।
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अफवाह पर ध्यान न दें, प्रशासन पूरी तरह तैयार
मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने बैठक में उपस्थित सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि वे नियमित प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से जनप्रतिनिधियों और आमजन को जागरूक करते रहें और स्पष्ट करें कि वर्तमान स्थिति को लेकर किसी प्रकार की अफवाह या घबराहट की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर कई तरह की अफवाहें फैलाई जा रही हैं, उन पर ध्यान न दें। प्रशासन पूरी तरह सतर्क है और आवश्यक बचाव एवं राहत संसाधनों को पहले से ही संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात किया जा रहा है।
मुख्य सचिव ने कहा कि लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। सरकार हर स्थिति से निपटने के लिए तैयार है। सभी जिलों में राहत शिविरों के लिए जगह चिन्हित कर ली गई है। सूखा राशन, पॉलिथीन शीट और दवाओं का इंतजाम कर लिया गया है। बाढ़ आने पर लोगों को तुरंत राहत दी जाएगी। उन्होंने आम जनता से अपील की कि वे नदी किनारे न जाएं, बच्चों को नदी में न जाने दें और प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करें। किसी भी आपातकालीन सहायता के लिए आपदा प्रबंधन विभाग के टोल फ्री नंबर 1070 पर संपर्क किया जा सकता है।