बिहार के मुजफ्फरपुर बालिका गृहकांड की जांच के दौरान चर्चा में आईं बिहार की पूर्व मंत्री मंजू वर्मा और उनके पति चंद्रशेखर वर्मा को बड़ा झटका लगा है। बता दें कि बेगूसराय की विशेष MP-MLA कोर्ट ने दोनों को आर्म्स एक्ट मामले में दोषी ठहराते हुए 7-7 साल की सश्रम जेल की सजा सुनाई है। कोर्ट ने आर्म्स एक्ट की धारा 25(1-ए) के तहत 7 साल की जेल और 50 हजार रुपये जुर्माना लगाया है। वहीं, धारा 26 के तहत 5 साल की जेल और 40 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया।
सजा सुनाए जाने के बाद दोनों को न्यायिक हिरासत में लेकर बेगूसराय जेल भेज दिया गया। अब इस फैसले को चुनौती देने के लिए दोनों की निगाहें पटना हाईकोर्ट पर टिकी हैं। मुजफ्फरपुर कांड के बाद विवादों में घिरने के कारण उन्हें मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। अब आर्म्स एक्ट में सजा होने के बाद उनका राजनीतिक भविष्य भी संकट में पड़ गया है।
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छापेमारी में घर से मिली थे कारतूस
यह मामला 16 अगस्त 2018 का है। मुजफ्फरपुर बालिका गृहकांड की जांच कर रही
CBI
ने उस दिन बेगूसराय के चेरिया बरियारपुर थाना क्षेत्र स्थित श्रीपुर अर्जुन टोल में मंजू वर्मा के आवास पर छापेमारी की थी। छापेमारी के दौरान घर में रखे एक स्टील के ट्रंक से 50 जिंदा कारतूस बरामद हुए थे। इनमें 15 कारतूस .328 बोर, 10 कारतूस .8 MM, 19 कारतूस 7.62 बोर और 6 कारतूस .303 बोर के थे। बरामदगी के समय किसी तरह का लाइसेंस नहीं दिखाया जा सका था। CBI के पुलिस उपाधीक्षक उमेश कुमार ने जप्ती सूची के साथ चेरिया बरियारपुर थाने में आवेदन दिया। उसी आधार पर मंजू वर्मा और चंद्रशेखर वर्मा के खिलाफ आर्म्स एक्ट की धारा 25(1-बी)ए, 26 और 35 के तहत मामला दर्ज कर लिया गया।
8 गवाहों की गवाही के बाद आया फैसला
करीब 8 साल तक चले इस मामले में सरकार की ओर से अपर लोक अभियोजक राम प्रकाश यादव ने अदालत में पक्ष रखा। सुनवाई के दौरान 8 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। वहीं, मंजू वर्मा और उनके पति की ओर से वरिष्ठ वकील विजय कुमार महाराज और ललन महतो ने अपना पक्ष रखा। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद विशेष अदालत ने मंजू वर्मा और चंद्रशेखर वर्मा को आर्म्स एक्ट के तहत दोषी करार दिया। अदालत ने कहा कि बिना लाइसेंस बड़ी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद रखना गंभीर अपराध है। इसके बाद दोनों को सजा सुनाई गई।
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तबीयत खराब होने पर जेलर को इलाज का निर्देश
फैसला सुनाने के तुरंत बाद कोर्ट परिसर में मौजूद पुलिस ने पूर्व मंत्री मंजू वर्मा और चंद्रशेखर वर्मा को हिरासत में ले लिया। कानूनी प्रक्रिया पूरी कर दोनों को बेगूसराय मंडल कारा भेज दिया गया। जेल भेजे जाने से पहले मंजू वर्मा के अधिवक्ता ने कोर्ट में आवेदन देकर कहा कि उनकी तबीयत ठीक नहीं है। कोर्ट ने इस पर संज्ञान लेते हुए जेल अधीक्षक को निर्देश दिया कि उनका समुचित इलाज कराया जाए और जरूरत पड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया जाए। मंजू वर्मा नीतीश सरकार में समाज कल्याण मंत्री रह चुकी हैं।
मंत्री पद से देना पड़ा था इस्तीफा
मुजफ्फरपुर कांड के बाद विवादों में घिरने के कारण उन्हें मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। अब आर्म्स एक्ट में सजा होने के बाद उनका राजनीतिक भविष्य भी संकट में पड़ गया है। सजा के बाद दोनों पक्षों के समर्थक कोर्ट परिसर के बाहर जमा थे। फैसला सुनते ही जिले में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया। कानूनी जानकारों का कहना है कि अब मंजू वर्मा और चंद्रशेखर वर्मा के पास पटना हाईकोर्ट में अपील का विकल्प है। अदालत के इस फैसले के बाद बेगूसराय में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। जेल प्रशासन ने भी दोनों को अलग-अलग बैरक में रखा है।