उत्तर प्रदेश के औरैया जिले के बहुचर्चित दोहरे हत्याकांड में एमपी-एमएलए अदालत ने बुधवार को समाजवादी पार्टी के पूर्व एमएलसी कमलेश पाठक और उनके दो भाइयों समेत 10 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने वकील मंजुल चौबे और उनकी बहन सुधा चौबे की हत्या के मामले में सभी 10 आरोपियों को दोषी ठहराया था। दोनों की हत्या जमीन विवाद को लेकर की गई थी। मामले की सुनवाई करीब छह साल तक चली और इस दौरान दोनों पक्षों की ओर से कुल 72 गवाह पेश किए गए।
मामला मंदिर की करीब एक बीघा जमीन से जुड़े विवाद का बताया गया है। कभी कमलेश पाठक और मंजुल चौबे के बीच करीबी संबंध थे, लेकिन जमीन को लेकर दोनों के बीच विवाद बढ़ता गया। बाद में यही विवाद गंभीर रंजिश में बदल गया।पुलिस के अनुसार, 15 जनवरी 2020 को विवादित जमीन को लेकर दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए थे। आरोप है कि विवाद के दौरान कमलेश पाठक के गनर और उनके भाई भी मौके पर पहुंच गए। कहासुनी बढ़ने के बाद मारपीट और फायरिंग की स्थिति बन गई।
फायरिंग में भाई-बहन की मौत
आरोप है कि विवाद के दौरान कमलेश पाठक और उनके भाई संतोष पाठक की ओर से फायरिंग की गई। गोली लगने से मंजुल चौबे और उनकी बहन सुधा चौबे की मौके पर ही मौत हो गई। सुधा चौबे शिक्षिका थीं। घटना के बाद पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए कई आरोपियों को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने मामले में कुल 11 लोगों को आरोपी बनाया था। इनमें से एक आरोपी नाबालिग था, जिसका मामला किशोर न्यायालय भेजा गया। एक अन्य आरोपी को बाद में गैंगस्टर एक्ट के मामले में बरी कर दिया गया।
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छह साल चली अदालत में सुनवाई
इस दोहरे हत्याकांड की सुनवाई करीब छह साल तक चली। अभियोजन पक्ष की ओर से 33 गवाह पेश किए गए जबकि बचाव पक्ष की ओर से 39 लोगों ने गवाही दी। कुल 72 गवाहों के बयान दर्ज होने के बाद अदालत ने बुधवार को कमलेश पाठक, उनके भाइयों संतोष पाठक और राम पाठक समेत 10 आरोपियों को दोषी करार दिया। इसके बाद अदालत ने सभी 10 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
मामले में पुलिस और प्रशासन की ओर से कमलेश पाठक और उनके भाइयों की करोड़ों रुपये की संपत्ति पर भी कार्रवाई की जा चुकी है। प्रशासन के मुताबिक कमलेश पाठक की करीब 36.15 करोड़ रुपये, संतोष पाठक की 9.75 करोड़ रुपये और रामू पाठक की करीब 7.51 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई थी। मामले में 10 आरोपियों पर गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई की गई थी।
सपा सरकार में मिला था राज्यमंत्री का दर्जा
कमलेश पाठक लंबे समय तक समाजवादी पार्टी की राजनीति में सक्रिय रहे। वर्ष 1990 में उन्हें विधान परिषद सदस्य बनाया गया था। इसके बाद 1991 में उन्हें राज्यमंत्री का दर्जा मिला। वर्ष 2002 में उन्होंने डेरापुर विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर विधानसभा में प्रवेश किया। बाद में वे दिबियापुर और सिकंदरा विधानसभा सीट से भी चुनाव लड़े, हालांकि उन्हें हार का सामना करना पड़ा। समाजवादी पार्टी की सरकार में वर्ष 2013 में उन्हें रेशम विभाग का अध्यक्ष बनाकर राज्यमंत्री का दर्जा दिया गया था। इसके बाद मई 2015 में सपा ने उन्हें दोबारा विधान परिषद भेजा।
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दोस्ती से दुश्मनी और फिर दोहरे हत्याकांड तक पहुंची कहानी
मंजुल चौबे और कमलेश पाठक के संबंध कभी बेहद करीबी बताए जाते थे। मंजुल चौबे कॉलेज की राजनीति में भी सक्रिय रहे थे और छात्रसंघ अध्यक्ष चुने गए थे। शुरुआती दौर में कमलेश पाठक ने उनका साथ दिया था। बाद में राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं और जमीन के विवाद को लेकर दोनों के संबंध बिगड़ते गए।बताया जाता है कि गांव के पंचमुखी हनुमान मंदिर के पास स्थित करीब एक बीघा जमीन को लेकर दोनों पक्षों में विवाद गहराता गया। मंजुल चौबे ने जमीन पर कमलेश पाठक के दावे का विरोध किया। यही विवाद आगे चलकर इतनी बड़ी रंजिश में बदल गया कि जनवरी 2020 में मंजुल चौबे और उनकी बहन सुधा चौबे की हत्या कर दी गई।अब छह साल की लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद अदालत के फैसले ने इस चर्चित दोहरे हत्याकांड में 10 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।